शिमला। राज्‍यसभा चुनावों में क्रास वोटिंग कर पाला बदलने वाले छह कांग्रेस विधायकों व सवा साल में ही विधायकी से इस्‍तीफा देने वाले तीन आजाद विधायकों ने आज शहीद-ए–आजम भगत सिंह के बलिदान दिवस पर भाजपा का दामन थाम लिया।  

जब देश भर में लोग शहीद-ए-आजम भगत सिंह  के बलिदान और आजादी की जंग में दिए उनके योगदान को याद कर रहे थे ,  तब दिल्‍ली से लेकर हिमाचल तक भाजपाई  क्रास वोटिंग करने वाले छह विधायकों और तीन आजाद विधायकों के भाजपा में शामिल होने पर जश्‍न मना रहे थे।

हैरानी की बात ये है कि इस पूरे तामझाम में कभी चाल,चरित्र और चेहरे का तमगा छाती में लगाए घूमने वाली भाजपा के केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, प्रदेश अध्‍यक्ष राजीव बिंदल और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पूरी शिददत से शामिल रहे।

संविधान के प्रावधानों का व मूल भावना का यहां जिक्र करना बेमानी हैं। बस इतना ही ये वाक्‍या हिमाचल के इतिहास में दर्ज हो गया है और ये नौ विधायक जिनमें सुधीर शर्मा, राजेंद्र राणा,चैतन्‍य शर्मा,देवेंद्र भूटटो,रवि ठाकुर और इंदरदत लखन पाल का नाम भी इतिहास में शामिल हो गया हैं।

इसके अलावा तीन आजाद विधायकों जिनमें नालागढ़ से केएल ठाकुर ने 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा से बगावत की थी,हमीरपुर से आशीष शर्मा और देहरा से होशियार सिंह के नाम भी इतिहास में शामिल हो गए हैं।

ये नौ विधायक भाजपा में शामिल हुए ये संविधान की मूल भावना के कितने मनमाफिक है यह अल्‍हदा मसला है लेकिन इन नौ विधायकों को शहीद-ए-आजम भगत सिंह की शहादत के दिन भाजपा ने पार्टी में शामिल किया ये बड़ा मसला हैं।

भगत सिंह वह बलिदानी थे जिन्‍होंने ब्रिटिश हुकूमत को ये याचिका लिखकर सकते में डाल दिया था कि उन्‍हें फांसी के बजाय गोली से उड़ा दिया जाए। उनका व्‍यक्तित्‍व उसूलों से भरा पड़ा रहा। लेकिन आज ही के दिन भाजपा ने हिमाचल में क्रास वोटिंग

आज के दिन बेशक अनुराग,बिंदल और जयराम ने पार्टी के लिए बड़ा कारनामा कर दिया हो लेकिन पूर्व मुख्‍यमंत्री शांता कुमार,धूमल से लेकर कांग्रेस के पुराने नेताओं की आत्‍मा तो जरूर ही उन्‍हें झिंझोड़ रही होगी।कांग्रेस पार्टी में भी कई दिग्‍गज है जो सत्‍ता की राजनीति की जगह उसूलों की राजनीति करते है,उन्‍हें आज पता नहीं कैसा लग रहा होगा।

अब भाजपा सत्‍ता पाने के लिए आतुर हैं और संभवत- वह इसमें सफल भी हो जाए लेकिन संविधान का क्‍या।संविधान की मूल भावना का क्‍या। आज के दिन यही बड़ा सवाल हैं।