शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने NHAI और मैसर्स गावर शिमला हाइवे प्राइवेट लिमिटेड को चमियाणा की रंजना को चार सप्ताह के भीतर दो करोड़ 23 लाख 55 हजार 924 रुपए का मुआवजा अदा करने के आदेश दिए है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीए एस संधेवालिया और न्यायमूर्ति विपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने ये आदेश जारी किए है।
खंडपीठ ने कहा कि NHAI और गावर कंपनी को दोनों को पचास -पचास फीसद रकम का भुगतान करना होगा। अदालत ने कहा कि रंजना के मकान के नुकसान का का आकलन पिछले साल जुलाई में कर दिया था लेकिन न NHAI ने और न ही गावर कंपनी ने रंजना को धेला भी अदा किया। अदालत ने 23 सितंबर से पहले -पहले ये भुगतान करने का आदेश दिया है।
याद रहे कि चमियाणा मे गावर कंपनी की ओर से बनाए जा रहे फोरलेन के निर्माण के दौरान चमियाणा में रंजना का साढ़े तीन मंजिला मकान गया था। इस मकान के साथ चंदा का मकान भी क्षतिग्रस्त हो गया था और इसे पूरी तरह से असुरक्षित घोषित कर दिया था।
इस बावत चंदा ने प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक चिटठी लिखी थी व चंदा ने कहा था कि रंजना का मकान ढहने से साथ लगता उसका मकान भी बुरी तरह से क्षेतिग्रस्त हो गया व प्रशासन ने इस मकान को असुरक्षित घोषित किया हुआ है। लेकिन NHAI और गावर की ओर से अभी तक इन दोनों को कोई मुआवजा नहीं मिला है।खंडपीठ ने चंदा कि इस चिटठी को जनहित याचिका मंजूर कर लिया।
खंडपीठ ने अपने आदेश में लिखा की रंजना के मकान की कीमत का आकलन एक करोड़ 65 लाख 17 हजार 336 रुपए किया गया है जबकि बाकी सामान की कीमत का आकलन 58 लाख 38 हजार 588 रुपए किया गया है। यानी कुल आकलन दो करोड़ 23 लाख 55 हजार 924 रुपए किया गया है।
खंडपीठ ने कहा कि NHAI अपनी जिम्मेदारी इस तरह से हाथ नहीं झाड़ सकती । ये तर्क सही नहीं है कि पहाड़ की कटिंग सही से की गई या नहीं और सुपरविजन भी सही था। अगर ये सब कुछ ठीक था तो चार मंजिला मकान पल भर में नहीं ढहती।
खंडपीठ ने सुक्खू सरकार को चंदा देवी के मकान की कीमत का आकलन करने का भी आदेश दिया व कहा कि इस प्रक्रिया को तय प्रक्रिया के मुताबिक जल्द से जल्द पूरा किया जाए।मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है।
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