शिमला।देश भर में कचरा निपटान के लिए मोदी सरकार ने नियमों में बेशक बदलाव कर दिया है लेकिन राज्यों के सामने निपटान को लेकर प्रौद्योगिकी और पैसे की कमी जैसी बड़ी चुनौतियों को लेकर कोई खाका तैयार नहीं है। कचरा निपटान नियमों में किए नए बदलावों के बीच इस बड़ी खामी को हिमाचल के पर्यावरण […]
शिमला।देश भर में कचरा निपटान के लिए मोदी सरकार ने नियमों में बेशक बदलाव कर दिया है लेकिन राज्यों के सामने निपटान को लेकर प्रौद्योगिकी और पैसे की कमी जैसी बड़ी चुनौतियों को लेकर कोई खाका तैयार नहीं है। कचरा निपटान नियमों में किए नए बदलावों के बीच इस बड़ी खामी को हिमाचल के पर्यावरण सचिव भारतीय वन सेवा के 1994 बैच के अधिकारी सुशील कुमार सिंगला ने आज राजधानी में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इंगित किया।
केंद्र सरकार के सूचना मंत्रालय के जरिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स’ -2026 में जोड़े नए बदलावों के प्रचार के लिए देशव्यापी अभियान छेड़ा गया है। इसके तहत आज सचिवालय में पर्यावरण सचिव का एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित करवाया गया।
शहरी व ग्रामीण इलाकों में हर तरह के कचरे के निपटान को लेकर आ रही चुनौतियों को पूछे एक सावल के जवाब में सिंगला ने कहा कि प्रौद्योगिकी और पैसा बड़ी चुनौतियां है। प्रदेश सरकार की ओर से इस बावत मसला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया है। कितना बजट मांगा गया है इस बावत सिंगला ने कहा कि ये अन्य विभाग देख रहा है।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स’ -2026 में जोड़े नए बदलावों वाले नियम अप्रैल 2026 से लागू हो गए है। जब सिंगला से ये पूछा गया कि अप्रैल से अब तक इन नियमों के उल्लंघन को लेकर हिमाचल प्रदेश में कारपोरेट घरानों,बड़ें होटलों,फार्मास्यिूटिकल्स कंपनियों,सीमेंट कारखानों समेत बाकियों पर क्या-क्या कार्रवाइयां की गई है, इस बावत वो कुछ भी खुलासा नहीं कर पाए। ये पूछे जाने पर कि क्या वो कुछ पिन प्वांइट कर सकते है, सिंगला ने कहा कि प्रर्वतन एजेंसियां कार्रवाई करती रहती है।
याद हो कि प्रदेश में जल, हवा व पानी को जहरीला करने वालों की कोई कमी नहीं है।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चूंकि सबसे बड़ी प्रवर्तन एजेंसी है, ऐसे में क्या-क्या कार्रवाइयां हुई इसका कुछ तो खुलासा होना ही चाहिए था।शायद इस बावत पिछले चार साल की सुक्खू सरकार की उपलब्धियां वो बताना नहीं चाहते होंगे जबकि मोदी सरकार ने नए नियम ही बनाए है वो उनका पूरे देश में डंका बजवाने पर आमदा है। यहां भी मोदी सरकार ने प्रचार अभियान का ऐसा प्रारूप बनाया कि केंद्र सरकार के बनाए नियमों का प्रचार वो प्रदेश सरकार के सचिव से करवा रही है। ये ही नए दौर की राजनीति है।
याद रहे सुप्रीम कोर्ट की ओर से 18 अगस्त 2026 को सिविल अपील संख्या 6174/2023 में दिए गए आदेश के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के क्रियान्वयन की निगरानी की जा रही है।
सैलानियों से वसूली जाएंगी फीस:
बहरहाल सिंगला ने खुलासा किया कि आने वाले समय में सैलानियों से फीस ली जाएगी लेकिन इसका प्रारूप क्या होगा इस बावत खाका तैयार किया जा रहा है।ये एंट्री फीस के रूप में ही हो सकता है।
रैकिंग को लेकर सपना
उन्होंने कहा कि हिमाचल के शहर भी स्वच्छता की रैंकिंग में राष्ट्रीय स्तर स्थान बना पाए इस बावत ये विचार किया जा रहा है कि प्रदेश के किन- किन शहरों पर फोकस किया जा सकता है।
नहीं चले उपकरण
पर्यावरण सचिव की संवाददाता सम्मेलन में प्रजेंटेशन देने के लिए पीपीटी तैयार किया गया था लेकिन मजे की बात है कि सचिवालय में उपकरण ही नहीं चले तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिशासी अभियंता ने जुबानी बोल कर ही काम चलाया। व्यवस्था परिवर्तन का नारा देने वाली सुक्खू सरकार की गवर्नेंस की ये एक छोटी सी मिसाल है। वो भी सचिवालय में।
गौरतलब हो कि नए नियमों में कचरा निपटान को लेकर कई स्तरों पर जिम्मेदारियों का प्रावधान किया गया है।
ये पूछे जाने पर कि पर्यावरण नियमों की अवहेलना का पता लगाने के लिए बोर्ड के पूर्व चेयरमैन ने एक फलाइंग स्क्वायड गठित किया गया है क्या वो क्रियाशील है या निष्क्रिय हो गया है, इस बावत सिंगला ने कहा कि डंडे के दम पर काम कराना ठीक नहीं है।
