शिमला।कबायली इलाकों जिला किन्नौर,लाहुल स्पिति और जिला चंबा के पांगी और भरमौर में किसानों को नौतोड़ के तहत जमीन दिलाने के मसले पर हाहाकार मच गया है। जब से प्रदेश में कांग्रेस की सुक्खू सरकार सत्ता में आई है तब से इस मसले पर तब से अब तक पद पर रहे राज्यपाल राजस्व मंत्री जगत […]
शिमला।कबायली इलाकों जिला किन्नौर,लाहुल स्पिति और जिला चंबा के पांगी और भरमौर में किसानों को नौतोड़ के तहत जमीन दिलाने के मसले पर हाहाकार मच गया है।
जब से प्रदेश में कांग्रेस की सुक्खू सरकार सत्ता में आई है तब से इस मसले पर तब से अब तक पद पर रहे राज्यपाल राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी को ठेंगा दिखाते रहे है। अब कांग्रेस पार्टी ने पूरे कबायली इलाकों में इस मामले को लेकर पदयात्रा शुरू कर रखी है। लेकिन राजभवन टस से मस नहीं हो रहा है।
वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत राज्यपाल को नौतोड़ के तहत वनभूमि को किसानों को आवंटित करने के लिए इस अधिनियम को कुछ अवधि के लिए निलंबित करने का अधिकार है।(वन संरक्षण अधिनियम 1980 केंद्रीय अधिनियम है) इस बावत सुक्खू सरकार ने सत्ता में आते ही पहले ही मंत्रिमंडल की बैठक में इस अधिनियम को निलंबित करने का फैसला मंजूर कर राज्यपाल को भेज दिया था लेकिन तब से लेकर अब तक इस मसले पर कहीं कुछ नहीं हुआ है।
दस बार मिल चुके है मंत्री जगतसिंह नेगी
सुक्खू सरकार में कबायली मामलो के मंत्री जगत सिंह नेगी 2023 से अब तक जितने भी राज्यपाल पद पर रहे,उनसे दस बार मिल चुके है, लेकिन सभी राज्यपाल उनको ठेंगा दिखाते रहे है। आखिर बार मंत्री जगत सिंह नेगी 28 अगस्त 2026 को राज्यपाल से मिले थे। हिमाचल प्रदेश कबायली सलाहकार परिषद के सदस्य केसर नेगी ने आज राजधानी में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इस मसले पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
नेगी ने भाजपा, किन्नौर से पिछली बार भाजपा के प्रत्याशी रहे सूरत नेगी और राजभवन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि ये सब इस मसले पर राजनीति कर रहे है।
नेगी ने कहा कि इस दौरान भरमौर से भाजपा विधायक जनक राज,लाहुल स्पिति से कांग्रेस विधायक अनुराधा ठाकुर और मंत्री जगत सिंह नेगी खुद राज्यपाल से मिले लेकिन आश्वासन ही मिला। जनकराज केवल एक ही बार उनके साथ गए। शायद उसके बाद भाजपा वालों ने उनको इस मसले को उठाने से इंकार कर दिया होगा।
नेगी ने दावा किया राजभवन यानी राज्यपाल को भाजपा प्रभावित कर रही है और कबायली इलाकों के किसानों को नौतोड जमीनें आवंटित करवाने में रोड़ा डाल रही है।हर बार उठाई गई राज्यपाल की आशंकाओं को दूर किया जा चुका है।
किन्नौर से ही 20 हजार आवेदन
नेगी ने दावा किया नौतोड़ जमीन के लिए किन्नौर से ही 20 हजार आवेदन आ चुके है। जबकि लाहुल स्पिति व पांगी व भरमौर से भी इतने ही आवेदन होंगे। इनमें से साढ़े छह हजार मामलो का तो संयुक्त निरीक्षण भी हो चुका है। ये पूछे जाने पर कि मंत्री व कांग्रेस भी तो इस मसले पर राजनीति ही कर रहे है। इतने आवेदन है तो वोटों के लिए ही तो सब कुछ हो रहा है।नेगी ने कहा जिसको नौतोड़ का पटटा मिलेगा वो कांग्रेस का वोटर ही थोड़े होगा।भाजपा वालों को भी तो पटटा मिलेगा।
कबायली इलाकों में कांग्रेस की नौतोड यात्रा
नौतोड़ मामले पर जिला किन्नौर में 11 सितंबर से कांग्रेस पार्टी की ओर से पदयात्रा शुरू की गई है।केसर नेगी ने कहा कि ये यात्रा आखिरी गांव सुमरा से शुरू हुई और लाहुल स्पिति में स्थानीय कांग्रेस विधायक अनुराधा ठाकुर ने हाल ही में इस यात्रा को शुरू किया है । पांगी और भरमौर में भी ये जल्द ही शुरू हो जाएंगी।
राजभवन का घेराव
उन्होंने कहा कि कबाइली इलाकों में यात्रा समाप्त होने के बाद इसे शिमला की ओर मोड़ दिया जाएगा।यहां महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मौन रखा जाएगा व उसके बाद राजभव की ओर कूच किया जागा व वहां आंदोलन किया जाएगा।
नेगी ने कहा कि कबायली लोग इस मसले पर किसी भी हद तक जा सकते है और जरूरत पड़ी तो राजभवन के बाहर अनिश्चितकालीन या भूख हड़ताल भी करनी पड़ी तो ,करेंगे।
सूरत नेगी व जयराम ठाकुर पर इल्जाम
केसर नेगी ने इल्जाम लगाया कि बीते दिनों किन्नौर से भाजपा नेता सूरत नेगी ने भरी सभी में दावा किया कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 को राज्यपाल 2027-28 में दो साल के लिए निलंबित करेंगे व उस दौरान नौतोड़ मिलेगा।
नेगी ने कहा कि इससे साफ हो गया भाजपा इस मामले पर अड़ंगा डाल रही है ताकि कांग्रेस पार्टी को चुनावी लाभ न मिले। उन्होंने कहा कि मंत्री नेगी के राज्यपाल से मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भी राज्यपाल से मिले। संभवत: वो भी इसे टालने की ही सलाह देतें होंगे।
551 पटटे मिले थे वीरभद्र सिंह सरकार में
नेगी ने दावा किया कि 2016 -17 में इस अधिनियम को तत्कालीन राज्यपाल उर्मिला सिंह ने व उसके बाद राज्यपाल देवव्रत ने निलंबित किया था । इस दौर 551 किसानों को नौतोड़ के तहत पटटे मिले थे। जबकि जयराम सरकार में 2019 में भी ये अधिनियम राज्यपाल ने एक साल के लिए निलंबित किया था। उस समय केवल एक किसान को नौतोड़ का पटटा मिला था। संभवत: ये किसी भाजपा कार्यकर्ता को ही मिला होगा।
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