शिमला। प्रदेश के दृष्टिहीनों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के सखा व कांग्रेस विधायक रघुबीर सिंह बाली के नगरोटा -बगवां स्थित ठिकाने पर सुक्खू की करतूतों का भंडा फोड़ दिया। इस मौके पर पाटिल संग कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार मौजूद रहे। साथ ही दृष्टिहीनों ने रजनी पाटिल के सामने एलान कर दिया है कि अगर उनकी मांगे पंद्रह दिनों के भीतर नहीं मानी जाती है तो सोनम वांगचुक की तरह राजधानी शिमला में सचिवालय के बाहर आमरण अनशन शुरू कर देंगे।
याद रहे बाली के घर पूर्व मंत्री गुरमुख सिंह बाली के जन्मदिन के मौके पर प्रदेश भर से दिव्यांगों को बुलाया गया था। इस मौके पर दृष्टिहीन भी वहां मौजूद थे। इस दौरान दृष्टिहीनों का कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल से आमना -सामना हो गया। दृष्टिहीनों ने इस मौके पर पाटिल से कहा कि वो शिमला की गलियों में 23 अक्तूबर 2023 से धरना-प्रदर्शन कर रहे है लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू उनकी मांगों को लेकर तरजीह ही नहीं दे रहे हैं।
ब्लाइंड पर्सन एसोसिएशन शिमला के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि वो मौके पर हैं और उनने अपना पक्ष रजनी पाटिल व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के समक्ष रखा है। राजेश ठाकुर ने रजनी पाटिल को बताया कि वो पौने तीन सालों से आंदोलन कर रहे है। सुक्खू ने उनकी सहारा पेंशन छीन ली है। 14 महीने से उनको एक पैसा भी नहीं मिला है। उनकी बैकलॉग के पदों को नहीं भरा जा रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू उनको मिलने तक का समय नहीं दे रहे हैं।
राजेश ठाकुर ने साफ किया कि वो 23 अक्तूबर 2023 से धरने पर बैठे है। लेकिन उनकी मांगे नहीं मानी जा रही है। उनने पाटिल को बताया कि अगर उनकी मांगे नहीं मांनी गई तो जिस तरह कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर बैठ गए थे उसी तरह वो भी आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे।
ठाकुर ने कहा कि पाटिल ने उनको भरोसा दिया है कि वो इस बावत मुख्यमंत्री सुक्खू से बातचीत कर मसले को सुलझावाएंगी। हालांकि इस जश्न के मौके पर बाद में सुक्खू भी गए थे । खबर लिखे जाने तक दृष्टिहीनों की उनसे बातचीत हुई या नहीं इस बावत ताजा जानकारी नहीं हैं।
उधर, राजधानी शिमला में इस धरने में दयावंत सेन और आनी के गांव छौहार के दृष्टिहीन देसराज बैठे हुए हैं। दृष्टिहीन देसराज ने कहा कि हाल ही में 16 जून 2026 को सचिवालय के बाहर रैली निकाली थी व वहीं धरना भी दिया व 19 जून तक धरना चलता रहा। 19 जून को सामाजिक न्याय व आधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल से वार्ता हुई । मंत्री शांडिल ने भरोसा दिया कि वो दस दिन के भीतर दृष्टिहीनों की मुख्यमंत्री सुक्खू से मुलाकात करा देंगे। लेकिन ये मुलाकात आज भी नहीं हुई है।इसके बाद वो दोबारा कालीबाड़ी धरना स्थल पर आ गए।
जब मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात नहीं करवाई गई तो वो दोबारा से आठ जुलाई को सचिवालय के बाहर एकत्रित हुए। वहां से वो मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ओकओवर का घेराव करने चल पड़े लेकिन उन्हें ओकओवर से पहले ही कमांडों बुलाकर रोक दिया। देसराज ने कहा कि उनके साथ कुछ दृष्टिहीन ऐसे में भी थे जो धुंधला सा देख सकते है।
उनने देखा कि दो बार सीएम सुक्खू अपने आलीशान काफिले के साथ उनके मुंह के सामने से गुजरे लेकिन उनसे मुलाकात तक नहीं की। पुलिस ने उसके बाद उन्हें दोबारा कालीबाड़ी भेज दिया व वो तब से लेकर अब तक वहीं पर आंदोलन पर है।
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