शिमला। 1017 दिनों से आंदोलन कर रहे दृष्टिहीनों की अगर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सुन लेते तो पुलिस एक्शन में टांग तुडवा चुके दृष्टिहीन दयावंत सेन कैंसर से पीडि़त अपनी पत्नी के साथ होते है। दयावंत सेन की पत्नी सुरेखा भी दृष्टिहीन है और वो भी 2023 से आंदोलन में शामिल रही थी।
ये दृष्टिहीन 23 अक्तूबर 2023 से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत है। सिराज मंडी के गांव भलाती के दयावंत सेन की रामपुर की सुरेखा से आंदोलन के दौरान ही मुलाकात हुई। दोनों ने ये सोच कर कि ये मुश्किल जिंदगी का सफर एक साथ तय कर लेंगे 25 नवंबर 2024 को शादी कर ली।
उसके बाद ब्लाइंड पर्सन एसोसिएशन के बैनर तले बाकी दृष्टिहीनों के साथ ये दोनों भी आंदोलन में शामिल हो गए। संघ के बैनर तले दृष्टिहीनों ने 27 मार्च 2025 को सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर दिया। इस दिन पुलिस कार्रवाई के दौरान धक्का-मुक्की हुई और दयावंत सेन की टांग तोड़ दी। दयावंत सेन की ओर से पुलिस के खिलाफ कोई एफआइआर नहीं हुई । पुलिस ने भरोसा दिया कि वो दयावंत का सारा खर्च उठाएगी। शुरू में तो सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन बाद पुलिस ने दयावंत को उसके घर सिराज पटक दिया।
दयावंत सेन और उसकी पत्नी सुरेखा दोनों दृष्टिहीन अस्वस्थ अवस्था में आंदोलन में दोाबारा शामिल हो गए व एक साल तक लगातार सचिवालय के बाहर और कालीबाड़ी के समीप धरने पर रहे।
समय बीतता गया लेकिन सुक्खू सरकार इनकी हड़ताल को समाप्त नहीं कर पाई। इस बीच सुक्खू सरकार में बुजुर्ग मंत्री धनीराम शांडिल व बाकियों से कई दौर की बातचीत भी हुई लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू इन दृष्टिहीनों की मांग मानने को तैयार नहीं हुए । इन दृष्टिहीनों की एकमात्र मुख्य मांग ये है कि विभिन्न विभागों में चतुर्थ श्रेणी के बैकलॉग के तहत दिव्यांगों के पदों को भरा जाए। लेकिन सुक्खू सरकार में मित्रों के पद तो भरे जा रहे है लेकिन इन दृष्टिहीनों के पदों की भर्ती नहीं हो रही है।
बहरहाल दृष्टिहीनों के 23 अक्तूबर 2023 से चल रहे इस आंदोलन के बीच दयावंत और सुरेखा पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट गया जब ये पता चला कि सुरेखा को आखिरी स्टेज का कैंसर हैं। सुरेखा को पीलिया हुआ जब वो रामपुर इलाज के लिए गई तो वहां से उसे चमियाणा भेज दिया। जून 2026 में वहां पता चला की उसे पैनक्रैज का कैंसर है । वहां से उसे बाइप्सी के साथ आइजीएमसी भेज दिया । जुलाई के पहले सप्ताह में रिपोर्ट आ गई जिसमें कंफर्म हो गया कि सुरेखा को पैनक्रैज की कैंसर हैं और वो भी आखिरी स्टेज का।
कालीबाड़ी के समीप धरने पर बैठे दयावंत सेन कहते है उनकी पत्नी रामपुर में मायके में है। उनकी देखभाल उनकी मां कर रही हैं। आइजीएमसी में तीन चार बार कीमो हो चुका है। वो बड़ी मुश्किल में है। वो तो दृष्टिहीन है ही साथ ही उनकी टांग टूटी हुई है। सुक्खू सरकार ने उनको बीपीएल से भी बाहर कर दिया है।
जाहिर है कि अगर सुक्खू इन दृष्टिहीनों की मांग को निपटा देते तो आज दयावंत इस मुश्किल की घड़ी में अपनी पत्नी के साथ होते । लेकिन सुक्खू जिद पर अड़े है।
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