शिमला। आजाद विधायकों हमीरपुर से आशीष ठाकुर,नालागढ़ से के एल ठाकुर और कांगड़ा के देहरा से होशियार सिंह की ओर से दिए इस्‍तीफे को विधानसभा स्‍पीकर कुलदीप सिंंह पठानिया ने पेंच फंसाकर इन तीनों विधायकों की राह को मुश्किल कर दिया हैं। उन्‍होंने इनके इस्‍तीफे फिलहाल मंजूर नहीं किए हैं। लगता है अब लंबी पठकथा लिखी जानी है।

 स्‍पीकर के पास इन विधायकों के इस्‍तीफे स्‍वेच्‍छा से है व ये सही है ये जानने का अधिकार हैं। अगर स्‍पीकर को लगता है कि ये इस्‍तीफे स्‍व्‍ेच्‍छा या सही नहीं है तो वह इस्‍तीफे मंजूर करने से इंकार कर सकता हैं। बहरहाल अभी स्‍पीकर कुलदीप पठानिया ने विधायकों के इस्‍तीफे मंजूर नहीं किए हैं।अभी वह जांच पड़ताल करेंगे।

कर्नाटक, महाराष्‍ट्र और राजस्‍थान में ऐसा हो चुका हैं व स्‍पीकर ने समूह में दिए गए इस्‍तीफों को मंजूर करने से इंकार कर दिया था।

अब हिमाचल में भी यही  खेल शुरू हो गया हैं। सरकार गिराने के लिए विधायकों के इस्‍तीफे दिलवाने का काम शुरू हो गया हैं अभी आजाद विधायकों से शुरूआत हुई हैं।

 इन आजाद विधायकों में से देहरा से आजाद विधायक होशियार सिंह ने मीडिया से कहा कि उन्‍हें भाजपा का टिकट मिलेगा ऐसा भरोसा दिया गया है व वह चुनाव मैदान में उतरेंगे।

लेकिन अगर उनका इस्‍तीफा मंजूर नहीं हुआ तो फिर उन्‍हें सुप्रीम कोर्ट में जाना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट भी स्‍पीकर को एकदम इस्‍तीफा देने के निर्देश नहीं दे सकता। दोनों ही संवैधानिक पद है। स्‍पीकर को अपने स्‍तर पर जांच कर यह पक्‍का करना होगा कि इस्‍तीफे स्‍वेच्‍छा से दिए गए हैं।

हिमाचल में तो क्रास वोटिंग  के बाद आजाद विधायक आशीष शर्मा और गगरेट से कांग्रेस के अयोग्‍य ठहराए गए विधायक चैतन्‍य शर्मा के पिता राकेश शर्मा के खिलाफ एफआइआर दर्ज हो चुकी हैं। अगर स्‍पीकर के सामने ऐसा कुछ सामने आया कि इस्‍तीफे के पीछे कुछ लेनदेन और कोई सौदा है तो वह कई कुछ कर सकते हैं।

महाराष्‍ट्र,मध्‍यप्रदेश,राजस्‍थान और कर्नाटक में भाजपा ने जब सरकारें तोड़ी व तोड़ने की कोशिश की तो इसी तरह समूह में इस्‍तीफे दिए थे। पार्टियों सेजुड़े विधायकों के खिलाफ तब स्‍पीकर ने अयोग्‍य ठहराने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी व  फैसला लेने में ही लंबा अरसा लगा दिया था। ये मामले में भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

अब हिमाचल में ऐसा होने के संकेत मिल रहे  हैं। ऐसे में आजाद विधायकों का लोकसभा चुनावों के साथ भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ कर दोबारा विधानसभा पहुंचने का सपना फिलहाल स्‍पीकर  की मुटठी में हैं।