शिमला।परिवहन मंत्री जी एस बाली से दर्द नहीं झेला जा रहा हैं। उनके दर्द की दवा मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह के पास हैं लेकिन वो दवा भी नहीं कर रहे हैैं।क्‍यास ये लगाए जा रहे है कि जो दर्द बाली झेल रहे हैं वो मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से ही दिया गया हैं। अब बाली है कि दवा भी वीरभद्र सिंह ही से मांग रहे हैं।जिसने दर्द दिया उसी से दवा की मांग । ये अजीब स्थिति हैं। जबकि वो कांग्रेस आला कमान से दवा की मांग करते तो कई कुछ हो भी जाता । 

बाली का दर्द आज भी राजधानी में आयोजित संवाददाता सम्‍मेलन में  छलक आया। बोले, राहुल गांधी की धर्मशाला रैली में मंच न मिलना केबिनेट मंत्री का अपमान हैं। यह कार्यक्रम सरकार के चार साल की उपलब्धियों को गिनाने के मकसद से रखा गया था, मगर मंच पर बैठने वाले नेताओं की सूची से उनका नाम एकाएक गायब कर दिया गया। बाली ने कहा कि इसके कारणों के तह तक जाने के लिए मुख्यमंत्री को इसकी जांच करवानी चाहिए।

जानते हैं कि बाली नादान नहीं हैं व ये भी जानते हैं कि नाम किसने व क्‍यों कटवाया । कहते है कि एक बार पहले भी उन्‍हें कांग्रेस मुख्‍यालय में बीस मिनट तक अंदर ही बंद कर दिया था। तब भी दिल्‍ली से कोई नेता मुख्‍यालय में आया था। सचिवालय में बड़े बाबू बाली कांड के पीछे वीरभद्र ,सुधीर व टीजी नेगी का हाथ होने का क्‍यास लगाने भी लगे हैं। लेकिन ये सचिवालय के ‘ फिरकी’ बाबूओं  क्‍यास हैं। असली नाम तो बाली खुद जानते हैैं। पब्लिक कब करते हैं ये देखना हैं।

जी एस बाली एक अरसे से खुद को कांगड़ा का बड़ा नेता साबित करने में जुटे हैं। लेकिन वीरभद्र सिंह उन्‍हें हमेशा चित कर देते हैैं।इस बार भी ऐसा ही हुआ। राहुल गांधी की रैली में मंच पर सारे मंत्री व सीपीएस विराजमान थे। युवा कांग्रेस अध्‍यक्ष व मुख्‍यमंत्री का लाडला विक्रमादित्‍य तक मंच पर था । लेकिन बाली मंच पर नहीं दिखें।यादविंद्र गोमा जो बाली से कद काठी में बेहद जूनियर हैं, वो भी मंच पर थे। ऐसे में  रैली में आई कांगड़ा की जनता अपने अपने नेताओं को मंच पर देखकर,खुश थी । जनता को लगा कि उनके नेता को इज्‍जत मिल रही हैं। लेकिन न जाने नगरोटा बगवां की जनता जो बाली को जिताती रही हैं। क्‍या सोच रही होंगी। केवल एकमात्र मंत्री ,जो प्रोटोकॉल के हिसाब से सरकार में तीसरे नंबर का मंत्री हैं वो मंच पर नहीं हैं। ये पता लोगों  को वहीं लग गया था कि बाली को मंच तक की सीढि़या चढ़ने से रोक दिया गया हैं।

ऐसे में बाली का दर्द रह रह कर छलक रहा हैं। एक पत्रकार ने पूछा भी कि जो हुआ उससे क्‍या आप Hurt हुएं, सहज होने की कोशिश ते हुए बाली बोले ,शाम तक ठीक हो जाउंगा।  उधर, कांग्रेस अध्‍यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्‍खू ने बोला कि इस मसले को सुलझा लिया जाएगा व पार्टी जांच करेगी। सुक्‍खू ने साथ ही ये भी जोड़ा कि बाली की मुख्‍यमंत्री से मुलाकात कराई जाएगी। साफ हैं कि ज्‍यादा कुछ होने वाला नहीं हैं। बाली को दर्द झेलना ही पड़ेगा।

बाली आज भाजपा की ओर से राज्‍यपाल को सौंपी चार्जशीट पर अपने व अपने विभाग पर लगे आरोपों पर सफाई देने के लिए बुलाई कांफ्रेंस में बोल रहे थे। चार्जशीट पर वो बोले की भाजपाइयों को लोकायुक्‍त  या हाईकोर्ट में जाना चाहिए। हालांकि जब उन्‍होंने पिछली बारर खुद धूमल सरकार के खिलाफ चार्जशीट तैयार की थी तो वो  न तो लोकायुक्‍त के पास गए थे  और न ही हाईकोर्ट गए थे।

वो बोले भी वीरभद्र सरकार की विजीलेंस ने उनकी ओर से बनाई गई चार्जशीट की सही ढंग से जांच नहीं करवाई । उन्‍होंने कहा कि उन्‍होंने धूमल सरकार के खिलाफ बनाई चार्जशीट में बेनामी संपतियों करा प्रमुखता से जिक्र किया था। लेकिन सतर्कता विभाग ने ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं लिया।

जाहिर सी बात है कि वो वीरभद्र सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलना चाहते हैं लेकिन हिम्‍मत नहीं कर पा रहे हैं। अन्‍यथा वो राहुल गांधी की रैली में मंच पर रोकने की शिकायत राहुल गांधी से ही कर देते। हिमाचल प्रभारी अंबिाक सोनी को तो वीरभद्र सिंह ने पहले ही आइने में उतारा हुआ हैं। ऐसे में वो राहुल गांधी व सोनिया गांधी से फरियाद करते। लेकिन वो जानते है कि सोनिया व राहुल के दरबार में उनके मोहरे ज्‍यादा काम नहीं करेंगे। वहां अंबिका सोनी व आशा कुमारी बाली की ज्‍यादा पैरवी नहीं करेंगी। बाली राहुल के सामने कुछ अलग दिखाना चाहते थे लेकिन अलग -थलग ही हो गए और अब हमला भी नहीं बोल पा रहे हैं। बस दर्द छलक रहा हैं।

बाली चाहते तो इस अपमान के लिए वो कोई बड़ा कदम उठा सकते थे । लेकिन उन्‍होंने अभी तक ऐसा नहीं किया। शायद कोई कमजोरी हैैं जो उन्‍हें ठीक से गरजने भी नहीं देती हैं। वीरभद्र सिंह ने मनकोटिया के साथ भी कुछ इसी तरह के खेल खेले थे लेकिन मनकोटिया ने कभी सीडी कांड को हवा दे कर तो कभी भाग्‍यवती  का मसला उठा कर अपने दिल को  ठंडक पहुंचाई थी। लेकिन बाली ऐसा कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। उन्‍हें बस इस बात की तसल्‍ली जरूर हैं कि उन्‍होंने नगरोटा बगवां में सफल प्रोग्राम कर अपनी ताकत दिखा दी।