शिमला।राजधानी के मैहली के समीप घोड़पा गांव में चल रहे निर्माण से नीचे की तरफ बसने वाले परिवारों को जिंदा दफन होने का डर सताने लगा है।जहां ये निर्माण हो रहा है उसी के बीस -तीस मीटर की दूरी में 2022 में भी एक बड़ा हादसा हो चुका है और उस हादसे में दो मजदूर जिंदा दफन हो गए थे।
यही नहीं 2023 की बरसात में प्रदेश भर में तबाही मची थी और उसके बाद निर्माण को लेकर सुक्खू सरकार ने संजीदा होने का जनता को भरोसा दिया था।लेकिन यहां कुछ और ही हो रहा है।
बहरहाल मौजूदा निर्माण को लेकर इस निर्माण के नीचे मकान बना रहे सुनील कुमार ने कहा कि अगर कभी कोई हादसा हुआ तो वो भी 2022 के हादसे की तरह कहीं जिंदा ही दफन न हो जाए।इस निर्माण के नीचे कुछ दूरी पर अपना मकान बना रही उर्वशी ने डीसी शिमला अनुपम कश्यप को लिखी चिटठी में सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे। जिसमें मौके पर निरीक्षण करने,ये निर्माण कायदे -नियमों के मुताबिक हो रहा है या नहीं, सीवरेज के इंतजाम आदि को देखने का आग्रह किया गया था।
शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अफसरों के नोटिस में लाया कि कोई सेटबैक नहीं रखे गए है। अगर हादसा हुआ तो नीचे के तमाम निर्माणाधीन व बाकी मकान जद में आ जाएंगें। यह निर्माण कुतुबमीनार की तरह किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ये निर्माण 90 डिग्री पर हो रहा है।
इस मामले को लेकर बीडीओ मशोबरा और टीसीपी की ओर से निर्माण बंद करने को लेकर नोटिस भी गए लेकिन निर्माा बंद नहीं हुआ। न बीडीओ मशोबरा और न ही साडा के अफसरों की ओर से ये बताया जा रहा है कि इस तरह निर्माण करने को कहां से मंजूरी मिली हुई। न ही ये बताया जा रहा है कि क्या ये निर्माण सुरक्षित है या नहीं।
बीडीओ मशोबरा और साडा की ओर से मौके पर टीम गई थी।टीसीपी के कनिष्ठ अभियंता हेम राज ने कहा कि उनने काम बंद करने का नोटिस दे दिया है।जो शख्स निर्माण कर रहा है वो दावा करता है कि उसने तत्कालीन प्रधान से निर्माण की मंजूरी ली हुई है। लेकिन मंजूरी के कागजात कहां है ये किसी भी अफसर को पता नहीं है। नोटिस के बाद भी काम बंद नहीं हुआ तो हेमराज कहते है कि वो काम बंद नहीं करवा सकते।वो ये भी कहते है कि वहां पर दूसरे लोगों ने भी डंगे लगा रखे है। ये पूछे जाने पर कि सबके खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है। वो ज़्यादा नहीं बोले।
सहायक नगर नियोजक प्रेम लता चौहान ने कहा कि क्या उन्हें इस तरह कि किसी मंजूरी के कागजात मुहैया करा दिए गए है। वो कहती है कि ऐसे कोई कागजात अभी नहीं दिए गए है। ऐसे में निर्माण कैसे हो रहा है। इस बावत उनके पास कोई सीधा जवाब नहीं है। हालांकि उनने ये जरूर कहा कि वो इस मामले में आगे कार्यवाही करेंगी। उनने इस संवाददाता से ये जरूर पूछा कि वो किसकी तरफ से बात कर रहे है। यानी किसकी तरफदारी कर कर रहे।
ये मसला तो है ही कि ये निर्माण बिना मंजूरी या नक्शा पास कराए किया जा रहा है।लेकिन इससे भी बड़ा मसला ये है कि अगर 2023 की तरह बरसात हुई और जमीनें धंसी और यहां हो रहे निर्माण गिरे तो कितनी जानें दफन होंगी उसकी जिम्मेदारी किसकी होंगी।क्या इस तरह किसी की सुरक्षा को दांव पर लगाया जा सकता है। वो भी तब जब मामला डीसी शिमला अनुपम कश्यप, बीडीओ मशोबरा और निदेशक टीसीपी हिमेस नेगी के नोटिस में लाया जा चुका है।
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