शिमला।हिमाचल प्रदेश लोकायुक्त ने जिला सोलन के जाबली में सेटलमेंट के दौरान सेटलमेंट विभाग के कारकूनों की ओर से अंजाम दी गई काली करतूतों का भंडा फोड़ दिया है।
लोकायुक्त की ओर से नियुक्त किए गए जांच अधिकारी ने जिला सोलन के जाबली-गाही पटवार सर्कल में 2008 से शुरू हुए सेटलमेंट जो 2019 तक चला,के दौरान सेटलमेंट करने वाले कर्मचारियों ने गांव गाही-जाबली से रेलवे लाइन तक बने सार्वजनिक रास्ते को कई जगहों पर राजस्व रिकार्ड से गायब कर दिया। जहां रास्ता लगा था वहां खडड बना दी व रास्ते को निजी लोगों के नाम कर दिया।
जिसकी वजह से गांवों के लोगों की ओर से सौ सालों से ज्यादा समय से इस्तेमाल किए जा रहे रास्ते पर निजी लोगों ने कब्जे कर लिए व होटल व भवन बना दिए गए। दिलचस्प ये है कि ये रास्ता1909 के सेटलमेंट के दौरान से राजस्व दस्तावेजों में अंकित हैं।
लेकिन सेटलमेंट के दौरान सेटलमेंट करने वाले कर्मचारियों ने इस रास्ते की कई जगहों पर चौड़ाई कम कर दी। इसके अलावा इसकी लंबाई भी कम कर दी। एक जगह पर जिस खसरा नंबर पर ये रास्ता था वहां से इसे हटा कर खडड में दिखा दिया।
ये सब लोकायुक्त की जांच में उजागर हो गया है।
याद रहे कि इस मामले को लेकर ग्राम व समाज सुधार समिति गांव गाही के प्रधान कृष्ण दत अत्री ने मुख्यमंत्री से लेकर राजस्व मंत्री और तमाम संबधित अधिकारियों तक शिकायत की थी लेकिन कहीं से कुछ नहीं ।
यही नहीं इस मामले को स्थानीय विधायक व सुक्खू के लाडले विनोद सुल्तानपुरी ने 2 सितंबर 2024 को विधानसभा के सदन में भी उठाया था। इसका जवाब देते हुए प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने सदन में भरोसा दिलाया था कि वो इस मामले में उचित कार्यवाही अमल में लाएंगे। लेकिन मंत्री नेगी ने इस मामले में कुछ भी नहीं किया व सदन में दिए भरोसे को तोड़ दिया।
सुक्खू के टॉप पटवारी यानी राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की ओर से विधानसभा में भरोसा देने के बावजूद कोई कार्यवाही अमल में न लाने पर अत्री ने इस बावत एक चिटठी लोकायुक्त को भी लिखी व उनसे मामले में कार्यवाही करने का आग्रह किया।
जस्टिस बारोवालिया ने संज्ञान
अत्री की ओर से लिखी चिटठी पर लोकायुक्त जस्टिस चंदर भूषण बारोवालिया ने संज्ञान ले लिया व सुनवाई के दौरान लोकायुक्त की ओर से जांच अधिकारी को नियुक्त करा कर रपट तलब की।
जांच अधिकारी की जांच रपट में हुआ घोटाले का खुलासा
लोकायुक्त जांच अधिकारी ने जब राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों संग 17 फरवरी 2026 को मौके का मुआयना किया तो सारी काली करतूतों का भंडा फूट गया।
मौके पर शिकायतकर्ता कृष्ण दत अत्री, विनोद अत्री और मोहन दत अत्री के अलावा कानून गो सर्कल परवाणू के फील्ड कानून गो अनमोल कुमार और पटवार सर्कल बसाल जाबली के पटवारी नीरज कुमार हाजिर रहे। इस दौरान गांव गाही का सबंधित राजस्व दस्तावेजों का अवलोकन भी किया गया।
लोकायुक्त की ओर से नियुक्त जांच अधिकारी ने अपनी रपट में खुलासा किया कि हालांकि खसरा नंबर 1001/466 में राजस्व दस्तावेजों में रास्ता दिखाया गया है लेकिन मौके पर यह रास्ता है ही नहीं ।यहां पर खडड है। जमाबंदी के मुताबिक इस खसरा नंबर का एरिया 0-02-63 दिखाया गया है जबकि सेटलमेंट से पहले ये एरिया0-09-00 दर्ज था। इससे साफ होता है कि रास्ते के एरिया को सेटलमेंट कार्यवाही के दौरान सेटलमेंट स्टाफ ने कम कर दिया गया।
इसके अलावा मौके पर खसरा नंबर 777/524 और 693/520 पर रास्ता तो है लेकिन कई हिस्सों में जितनी चौड़ाई राजस्व दस्तावेजों में दर्ज की गई है उतनी मौके पर है ही नहीं। इसी तरह खसरा नंबर 694/532 पर दर्ज रास्ता जो रेलवे ट्रैक की ओर से जा रहा है उसे पूरी तरह से रेलवे बाउंडरी तक नहीं बनाया गया है और एक जगह इसे निजी भूमि पर पहुंचा दिया गया है।
अब बड़ा सवाल ये है कि सेटलमेंट स्टाफ ने ये सब घोटाला क्यों किया और इसकी एवज में स्टाफ ने किससे क्या हासिल किया । कायदे से सुक्खू सरकार को उक्त स्टाफ को चिन्हित करना चाहिए।
तहसीलदार जिष्टू के निर्देशों का हवाला
लोकायुक्त की ओर से नियुक्त जांच अधिकारी ने अपनी रपट में इन तमाम काली करतूतों को ठीक करने बारे मई 2022 में कसौली के तत्कालीन तहसीलदार मनमोहन जिष्टू की ओर से दिए गए निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। जिष्टू ने इन काली करतूतों को ठीक करने के निर्देश दिए थे। जांच अधिकारी ने साफ किया है कि इन निर्देशों की आज तक अनुपालना नहीं की गई है।
जांच अधिकारी ने लोकायुक्त को सौंपी अपनी रपट में पटवार सर्कल गाही -जाबली में 2008 से 2019 के बीच किए गए सेटलमेंट के दौरान की गई धांधलियों को ठीक करने के लिए राजस्व व सेटलमेंट विभाग को दुरुस्त करने की सिफारिश की गई है। जांच अधिकारी ने राजस्व व सेटलमेंट विभाग को गांव के इस रास्ते की पुराने व नए राजस्व दस्तावेजों के मुताबिक दोबारा से निशाहीदेही कर लोगों के रास्ते की बहाली करने का आग्रह किया है।
तहसीलदार जिष्टू ने 2022 में ही पकड़ लिया था घोटाला
सेटलमेंट स्टाफ की ओर से 2008 से 2019 के बीच सेटलमेंट के दौरान किए इस घोटाले को कसौली के तत्कालीन तहसीलदार मनमोहन जिष्टू ने 2022 में ही पकड़ लिया था। उन्होंने व तत्कालीन कानून गो में 2022 में ही संबधित दस्तावेजो की पड़ताल कर इस घोटाले को पकड़ लिया था व इन धांधलियों को ठीक करने के लिए उन्होंने कमिशनर आफ लैंड एडमिनिस्ट्रेशन कसुम्प्टी को रपट भी सौंपी थी। लेकिन राजस्व विभाग ने तब से लेकर अब तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी कटघरे में
ये घोटाला राजस्व विभाग के नोटिस में 2022 से लंबित है लेकिन विभाग जिद पर अड़ा हुआ है।इसके अलावा 2 सितंबर 2024 को तो कसौली से कांग्रेस विधायक विनोद कुमार सुल्तान पुरी ने इस मामले को विधानसभा के पटल पर उठाया था। इस पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस मामले को दुरुस्त करने का भरोसा भी दिया था। इसके अलावा जिस समय ये मामला सदन में उठा था तब सदन में अफसर दीर्घा में राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे । लेकिन न तो मंत्री जगत सिंह नेगी ने कुछ किया और न ही राजस्व विभाग के अफसरों ने इस बावत कान धरे। सुक्खू व नेगी के नाक के नीचे पूरी सरकारी मशीनरी दुबकी पड़ी है।
ऐसे में अत्री जैसे काकरोच अभी तक सुक्खू की व्यवस्था से भिड़ रहे है और अब सुक्खू सरकार अब अवैध कब्जों को नियमित करने की नीति ला चुकी है। ऐसे में धांधलियां करने वालों की मौज ही है।
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