शिमला। ED ने  करीब दो साल पुराने मामले में ऊना में माइनिंग के धंधे से जुड़े एक मामले में पंजाब के लखविंदर सिंह नामक व्‍यक्ति की मनी लांड्रिंग एकट के तहत दो करोड़ 98 लाख रुपए की प्रापर्टी अटैच की  हैं। इनमें 2 करोड़ 85 लाख अचल संपति है जबकि 13 लाख रुपए के  चल संपति हैं।

यह मामला अवैध खनन से जुड़ा हुआ है।ईडी  के पास यह मामला 2022 में आया था  व तब भी ईडी ने लखविंदर सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की थी। अब  करीब दो साल बाद ईडी ने ये संपति अटैच कर दी हैं।

सूत्रों के मुताबिक लखविंदर सिंह की फर्म मैसर्स लखविंदर सिंह  धोखाधड़ी कर कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के धंधे में शामिल थी व  ऊना  में अवैध खनन  का धंधा चलाकर अकूत संपति हासिल कर रहा था।

जांंच के दौरान  दौरान ईडी ने इसके हिमाचल , हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में 13 ठिकानों में छापेमारी की और वहां से कई आपतिजनक सामाग्री जब्‍त की।

याद रहे लखविंदर सिंह के खिलाफ ऊना थाने पुलिस ने अवैध खनन का  मामला दर्ज किया था।  इसके ऊना में तीन क्रशर चल रहे  हैं। बाद में इस मामले को ईडी को सौंप दिय गया।  ईडी के पास ये मामला 2022 में पहुंचा और जांच के दौरान इसे मामले को धन शोधन का पाया  गया।

सूत्रों के मुताबिक दस्‍तावेजों की पड़ताल करने पर पाया गया कि लखविंदर सिंह ने हिमाचल प्रदेश माइनर मिनरल्‍स (कनसेशंस एंड मिनरल्‍स (प्रिवैंशन आफ इलीगल माइनिंग ट्रांसपोर्टेशन एंड स्‍टोरेज) रूल्‍ज 2015 के तहत वह खदानों से कितना माल ले जा रहा है इसकी सही जानकारी नहीं दे रहा था।

यह जानबूझ कर और बेइमानी से इस जानकारी को छिपा रहा था। इस तरह ये प्रदेश  सरकार  के खजाने में जाने वाली करोड़ों की रायल्‍टी का को अदा नहीं कर रहा था। ये सब प्रदेश सरकार के सरकारी विभागों की मिलीभगत से किया जा रहा था। इसके ट्रकों  में कितना माला जा रहा था इसे पूछने वाला कोई नहीं था।

लेकिन बाद में जब ईडी ने कार्यवाही शुरू की तो  उसके बाद सरकारी विभागों ने भी तमाम खदानों पर शिकंजा कसना शुरू  किया व अबक्रशर मालिकों को पहले की बताना होता है कि वह कितना माल निकालेंगे व विभाग पहले ही रायल्‍टी वसूल लेते हैं।

गौर हो कि ऊना व निचले हिमाचल के बाकी जिलों में कांग्रेस व भाजपा के नेता एक दूसरे पर खनन माफिया का साथ देने का  इल्‍जाम लगाते रहे है लेकिन कभी कोई  कार्यवाही नहीं हुई। अब ईडी ने जरूर  संपतियां अटैच की हैं।  प्रदेश में मचे राजनीतिक घमासान के बीच अब ल‍खविंदर सिंह के  प्रदेश के नेताओं के साथ संबंधों को खंगाला जा रहा हैं।