बागा/मांगल।मंगलवार शाम को हुई भारी प्री मानसून बारिश से जेपी कंपनी के सीमेंट कारखाने से भारी पानी आने से मलबे के नीचे दबे आठ ट्रकों  व खतरे में आए कई गांवों ने प्रदेश  के अब तक के दो मुख्‍यमंत्रियों प्रेम कुमार धूमल और वीरभद्र सिंह  के मंसूबों को साफ कर दिया है।ये मंसूबे साफ है।क्रिमिनल कारपोरेट घरानों के सब गुनाह माफ।बदले  में इन मुख्‍यमंत्रियों ने क्‍या हासिल किया है ये सब छिपा ढका है। अगर कुछ हासिल नहीं किया है तो कार्रवाई क्‍यों नहीं हुई।ये सवाल स्‍थानीय लोग सरेआम उठा रहे है।

स्‍थानीय  लोगों ने विधायक गोबिंद शर्मा एसडीएम  और  डीएसपी के सामने  सरेआम कहा भी कि अटैची सबके मुह बंद कर देती है।इस पर हिमाचल पुलिस कैडर  के अफसर विनोद धवन  बिफरे भी।स्‍थानीय लोगों ने कहा कि अगर अटैची का कमाल  नहीं है तो  कंपनी  के मालिक मनोज गौड़ के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्‍यों नहीं होती। स्‍थानीय लोगों ने बागा थाने में एफआईआर दर्ज  करने की अर्जी दे रखी है। दूसरे, ये भी सामने आ गया है कि हाईकोर्ट व एनजीटी  को कैसे अंधेरे में रखा जा रहा है।

प्री मानसून की पहली बारिश से बागा में लगी जेपी कंपनी  के सीमेंट कारखाने  के मलबे से भारी तबाही मची।इस तबाही ने जेपी कंपनी के कई गुनाहों को सामने ला दिया। इन गुनाहों से एसडीएम अर्की के एल वर्मा,डीएसपी दाड़ला विनोद धीमान और भाजपा विधायक गोंबिद शर्मा भी रूबरू हुए। लेकिन हैरानी की बात न तो डीएसपी  विनोद  धीमान  और न ही  एसडीएम  ने इन आपराधिक कृत्‍यों का संज्ञान लिया।सबूत एकत्रित नहीं किए और न ही बयान दर्ज किए।जबकि मामूली  सा एक्‍सीडेंट  हो जाने पर पुलिस ड्राइवर  को पकड़ लेती है और गाड़ी  को अपने कब्‍जे में ले लेती है। लेकिन हिमाचल  पुलिस कैडर के  डीएसपी स्‍तर के इस अफसर व हिमाचल  प्रशासनिक कैडर के एसडीएम स्‍तर के अफसर  ने उस जगह  का मुआयना  करने की जहमत नहीं उठाई जहां से पानी के बहाव ने नीचे की ओर तबाही मचाई थी।

सीमेंट कारखाने को लगाने से पहले कंपनी को पानी की निकासी  को लेकर कई तरह की मंजूिरयां लेनी पड़ती है। इन मंजूिरयों के बावजूद अगर  प्‍लांट  के पानी से तबाही मचे तो विभिन्‍न  कानूनों के तहत  एफआईआर और गिर फतारी का प्रावधान है। एसडीएम के ध्‍यान में पानी की  निकासी  में किसी तरह की अवहेलना  आए तो  उन्‍हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड   व सरकार को  रिपोर्ट  भेजनी होती है। इस पर  प्‍लांट   के बिजली के कनैक्‍शन  काट  दिए जाते है।

प्‍लांट से  बारिश के पानी के साथ्‍ा मंगलवार को गांव बागा में  आठ ट्रक मलबे में दब गए थे।

एसडीएम व डीएसपी को गाड़ी  में  बिठकर मौके का जायजा करवा रहे स्‍थानीय युवक  ने  जेपी कंपनी की  ओर से बारिश की आड़ में पानी छोड़ने का राज बताया भी। लेकिन एसडीएम  और डीएसपी ने  जहां से पानी छोड़ा गया वहां का जायजा  नहीं लिया  और न कोई सबूत एकित्रत किया। मजे की बात तबाही मचने के बाद जेपी कंपनी के प्‍लांट की बिजली एक पल के लिए  भी नहीं गई जबकि दो दिनों तक स्‍थानीय गांव अंधेरे में रहे। गांव न्‍यू भलग में निजी स्‍कूल में पानी भर गया। इस स्‍कूल में 80 बच्‍चे पढ़ते है।भलग का बस स्‍टैंड गायब हो गया है।जायजा  लेते वक्‍त एक और खुलासा हुआ। जेपी कंपनी के इंजीनियरों ने भलग व न्‍यू भलग के बीच आने जाने  के लिए  लोहे का एक पुल बना रखा है। ये पुल भी मलबे की चपेट में आ गया। तब खुलासा हुआ  ये अस्‍थाई  पुल मलबे पर बनाया गया था।

इसके अलावा मलबे  को रोकने के लिए लगाई दीवार  भी मलबे पर खड़ी कर दी गई है।  ये शिवमंदिर  के पास से ढह गई है। इंजीनियरिंग के ये  सब नमूने डीएसपी,एसडीएम  और एमएलए  ने अपनी आंखों से देखे। जेपी कंपनी ने हाईकोर्ट व एनजीटी  में  कहा है कि उसने  वीपी मोहन कमेटी  की ओर से सुझाए सुरक्षा कदमों को अपनाया है। मलवे पर बनी मलवा रोकने की दीवारें और पुल आंखें खोलने वाले  है। यहां  एक  मंदिर  भी मलबे में दब गया है।

प्‍लांट से जल निकासी के इंतजाम और भी हैरान करने वाले है। लेकिन सबसे हैरान करने वाले सरकार और प्रशासन के कदम है। स्‍थानीय लोगों के मुताबिक  डीसी सोलन मदन चौहान  ने भी  कुछ दिन पहले मौके का जायजा लिया था। पर जेपी कंपनी  के खिलाफ  कोई कदम नहीं उठाया।स्‍थानीय लोग  इस बात से हैरान है व सरेआम आरोप लगाते है कि अटैची  का धंधा चला हुआ है।

नुकसान का जायजा लेने के बाद  भाजपा  विधायक  गोबिंद शर्मा व वीरभद्र सिंह सरकार के एसडीएम और डीएसपी ने  लोगों  के साथ  बागा में बैठक की। स्‍थानीय लोगों ने बैठक  में सबसे पहला हमला गोबिंद शर्मा पर ही किया। स्‍थानीय  लोगों ने  गोबिंद शर्मा  से पूछा  कि जेपी  के सीमेंट प्‍लांट से  तबाही 2007-08 से मच रही है । उनकी जुबान चुप क्‍यों है। लोगों ने अफसरों व नेताओं पर अप्रत्‍यक्ष  तौर पर रिश्‍वत लेने के आरोप भी लगाए।

गोबिंद शर्मा  व एसडीएम ने मलबे में दबे ट्रकों का मसला उठाया  । जिनके ट्रक दबे थे उन्‍होंने  कहा िक उनकी गाड़ियां जे पी कंपनी ले लें और उन्‍हें नए गाड़ियां दी जाए। पंचायत प्रधान नंदलाल चौहान  ने भी इसी की वकालत की। लेकिन एसडीएम  ने कहा इसे कंपनी  नहीं मानेगी। बाद में कंपनी के कर्ता धर्ता जे शेरू ने इसे माना भी नहीं और कहा कि  मरम्‍मत पर जो भी खर्चा आएगा उसे कंपनी उठाएगी। स्‍थानीय लोगों का कहना था कि हमेशा ऐसा ही होता है। प्रशासन  व नेता कंपनी के पक्ष के मुताबिक फैसला लेते है।

सबसे दुर्भाग्‍यपूर्ण क्षण  वो रहा जब  एसडीएम  ने कंपनी के कर्ता धर्ता  जे शेरू  के सामने लोगों के लिए पानी के टैंकर मुहैया कराने  के लिए मदद मांगी। ये शर्मनाक भी था जो कारपोरेट हाउस तबाही के लिए जिम्‍मेदार था उसी के आगे मदद के लिए हाथ फैलाए गए। जबकि कायदे से आदेश होने चाहिए थे।

इस बैठक में एक और बड़ा खुलासा  ये हुआ  है कि कंपनी 2008-09 के बाद मलबे में दबे लोगों के खेतों की फसलों का मुआवजा नहीं दिया। बैठक में स्‍थानीय पटवारी  ने बताया  कि गांव भलग  के लोगों का 16 फसलों का मुआवजा बनाया  जा चुका है। बाकी गांवों  का बना नहीं है।  इस खुलासे  ने साफ  कर दिया कि धूमल व वीरभद्र सरकार  की सरकारों   ने स्‍थानीय  लोगों  के साथ किस तरह  का मजाक  किया है। लोगों को 16-16 फसलों का मुआवजा नहीं दिलाया जा सका है। मुआवजा  न देने पर एफआईआर  भी दर्ज नहीं  है।

यही  नहीं भाग चंद नामक एक  व्‍यक्‍ित  ने कहा कि  उसका मकान कंपनी के मलबे से 2011-12 में ढह गया था। प्रशासन  ने उसे कहा कि वह सुरिक्षत मकान में चले जाए। मकान का किराया कंपनी अदा करेगी। भागचंद  ने किराए पर मकान ले  लिया और उसमें बसने लगा। स्‍थानीय पटवारी ने बैठक  में सबके सामने  खुलासा किया  कि उसी ने भागचंद को मकान दिलाया था। मकान  मालिक  अब रोज उसे तंग करता है  उसका किराया  दिला दो । कंपनी ने न किराया दिया  और न मकान  की मरम्‍मत कराई। भागचंद अब इसी असुरिक्षत  मकान में परिवार के साथ रह रहा है।  बैठक में दाड़ला के नायब तहसीलदार ने भी कहा कि भागचंद असुरक्षित भवन में रहा है। उन्‍होंने  खुद  भी कंपनी के  अधिकारियों को मकान की मरम्‍मत के लिए कहा पर कंपनी नहीं मानी। हालांकि जे  शेरू  ने इस पर कई दलीलें देने  की कोशिशें की।जब पटवारी और  नायब तहसील दार ये खुलासे कर रहे थे तो डीएसपी  व एसडीएम  दोनों चुपचाप रहे। मामला दर्ज नहीं हुआ। कानून  के मुतािबक िकसी  भीनागरिक को असुरिक्षत भवन  में रहने के लिए  मजबूर  करना  गुनाह है।यहां  ये गौरतलब है कि अर्की  के एसडीएम  मुख्‍यमंत्री  वीरभद्र  सिंह के बेहद करीबी है।

बैठक में मलबे के नीचे दबे मकानों का मसला भी उठा।  कंपनी ने मलबे में दबे मकानों का मुआवजा  नहीं दिया।  पंचायत प्रधान नंदलाल चौहान ने कहा कि दबे  मकानों का जो आकलन कंपनी ने अपने स्‍तर पर बनाया है उसीका  50 प्रतिशत  लोगों को दे दिया जाए। स्‍थानीय लोगों  की माने तो  भाजपा और कांग्रेस सरकार के शासन की शह पर ही कंपनी की ये मजाल है कि वो  दबे घरों का मुआवजा नहीं दे रही है। जे शेरू  ने दलील दी कि  जब  पारचू कांड हुआ था तो मुख्‍यमंत्री ने कहा था नालों के 25 फूट के दायरे में मकान न बनाए जाए। इसलिए लागों ने नालों के आस पास मकान क्‍यों  बनाए। जे शेरू  कहना चाह  रहे थे कि लोगों को मालूम था कि ये मकान मलबे  में दबेंगे। इसिलए पैसे की खातिर ऐसा किया गया। जेपी कंपनी के कर्ताधर्ताओं का दबदबा इस कदर का है कि मुख्‍यमंत्री वीरभद्र  के नाम का इस्‍तेमाल  करने से भी कोई हिचकते नहीं है।

इस बैठक में एक दिलचस्‍प और शर्मनाक खुलासा और हुआ। प्रदेश हाईकोर्ट  ने  वी पी मोहन कमेटी की रिपोर्ट को स्‍वीकार करने के बाद कंपनी को  आठ लाख  क्‍यूबिक मलवा उठाने के आदेश दे रखे है।ये मलबा तो उठा नहीं मंगलवार को और मलबा नीचे आ गया। पंचायत प्रधान चौहान ने मांग की मलवे को उठाने के लिए बीस टिप्‍पर  लगाए लाए। इस पर जे शेरू  ने कहा कि  वो दो टिप्‍पर लगा सकते है और सप्‍ताह के भीतर चार पांच तक कर सकते है। एसडीएम  ने  कहा कि  कंपनी आठ टिप्‍पर लगा दें। जे शेरू  ने यहां जो खुलासा  किया वो हैरतअंगेज  था। उसने कहा कि उनके पास मलवा फेंकने को डंपिंग साइट ही नहीं है। इससे साफ  है कि प्रदेश  की भाजपा व कांग्रेस सरकार  की नाक  के नीचे कारपोरेट घराने तबाही  का खेल किस तरह खेल रहे और एक भी एफआईआर  दर्ज नहीं है। ये सब खुलासे डीएसपी   के सामने हुए पर उनकी ओर से कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

एसडीएम  ने  28 तारीख  तक  कंपनी को कई काम करने के निर्देश  दिए है। साथ  ही कहा कि अगर ये काम नहीं हुए तो वो सरकार को अपनी रिपोर्ट भेज देंगे  जो कंपनी के खिलाफ होगी। उन्‍हें रिपोर्ट  तुरंत  देने से किसने राेका है ये कोई नहीं जानता। स्‍थानीय लोग अटैची  की बात करते है तो कुछ मुख्‍यमंत्री और मुख्‍यमंत्री कार्यालय  की ओर ईशारा करते है। स्‍थानीय लोगों ने अर्की  में  87 दिनों तक क्रमिक भूख हड़ताल भी की। इस हड़ताल के दौरान उनके पास न तो भाजपाई आए और न ही कांग्रेसी। यहां  ये उल्‍लेखनीय  है कि  ये हड़ताल  लोकसभा चुनावों से पूर्व शुरू  हुई थी और इसी महीने समाप्‍त  की गई। डीसी  और एसडीएम अब कहते है  कि हड़ताल  खत्‍म करने से पहले वो कोई आश्‍वासन दे देते और जूस पिला देते। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार व प्रशासन नग्‍न होकर जलील करने  पर आ गई है। वीरभद्र सिंह  की सरकार को लोकसभा चुनावों में सबक सिखा दिया गया है। स्‍थानीय नेताओं को विधानसभा चुनावों में पूछेंगे।अब मामला इस महीने के आखिर में एनजीटी में लगना है।