शिमला। मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ दिल्‍ली हाईकोर्ट में वीबीएस रिश्‍वत कांड   व वक्‍कामूला से जुड़े घोटाले को लेकर दायर याचिका पर सीबीआई अब 12 मार्च को स्‍टेटस रिपोर्ट देगी।

दिल्‍ली हाईकोर्ट में आज सीबीआई को जिस पीठ के समक्ष स्‍टेटस रिपोर्ट देने थी वह पीठ बैठी ही नहीं । मामले की सुनवाई अब 12 मार्च को निर्धारित की गई है।

 

फिलहाल इससे वीरभद्र सिंह को तात्‍कालिक तौर पर 12 मार्च तक राहत मिली है। भाजपा व वीरभद्र विरोधियों को अब 12 मार्च तक का इंतजार है।

प्रशांत भूषण ने कॉमन काज संस्‍था की ओर से वीरभद्र सिंह के खिलाफ उनके स्‍टील मंत्री रहते हुए वीबीएस रिश्‍वत कांड की जांच को लेकर याचिका दायर की थी।मामले में सीबीआई ने कहा था वह इस मामले में पहले ही जांच कर रही है। इस पर दिल्‍ली  हाईकोर्ट ने सीबीआई को 12 फरवरी तक स्‍टेटस  रिपोर्ट  हाईकोर्ट में पेश करने  की हिदायत दी थी।

प्रशांत भूषण ने इसके बाद एक और याचिका दायर की थी जिसमें उन्‍होंने अरुण धूमल और भाजपा नेता अरुण जेटली की ओर से वीरभद्र सिंह के खिलाफ लगाए गए भ्रष्‍टाचार के आरोपों से सार्वजनिक  हुए नए तथ्‍यों  का हवाला दिया गया है।  प्रशांत भूषण ने इस याचिका में हाईकोर्ट  की निगरानी में एसआईटी से इस मामले की जांच कराने का आग्रह किया था। इस याचिका पर भी आज ही सुनवाई होनी थी।  लेकिन अब मामला 12 मार्च के लिए टल गया है।

 

धूमल के खिलाफ  जांच की तेज

उधर, वीरभद्र सिंह सरकार ने पूर्व मुख्‍यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ एचपीसीए और बाकी मामलों में जांच तेज कर दी है। एचपीसीए मामले में पिछले डेढ महीने में विजीलेंस ने धूमल के तत्‍कालीन  प्रधान निजी सचिव भीम सेन , रिटायर वरिष्‍ठ  आईएएस अफसर सुभाष नेगी, राजस्‍व विभाग में एक कनिष्‍ठ  अफसर  समेत कई अफसरों से पूछताछ  कर ली है। विजीलेंस  सूत्रों के मुताबिक राजस्‍व विभाग के एक कनिष्‍ठ  अफसर  ने पूछताछ  में खुलासा किया है उसने  धर्मशाला में एचपीसीए  के बने होटल  के लैंडयूज को बदलने के फैसले  को केबिनेट में ले जाने  के  लिए फाइल पर नोट बनाया था।  लेकिन वरिष्‍ठ  अधिकारी  ने उससे ये फड़वा दिया। उसके बाद अब विजीलेंस  ने धूमल को एक प्रश्‍नावली भेज कर जवाब मांगा है।

भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक जिस तरह से भाजपा ने वीरभद्र सिंह के कारनामों  का भंडाफोड़  कर उनकी कुर्सी को खतरे में डाला हुआ है उससे आहत  हो वीरभद्र सिंह ने अब धूमल  सरकार के कार्याकाल में हुए बेनामी सौदों समेत कई और मामलों में जांच कराने के लिए हरी झंडी दे दी है।