शिमला।भाजपा की अंदरुनी बगावत ने भाजपा के नालागढ़ से प्रत्‍याशी के एल ठाकुर,हमीरपुर से आशीष शर्मा और देहरा से होशियार सिंह की नींदे उड़ा दी हैं जबकि देहरा में कांग्रेस प्रत्‍याशी मुख्‍यमंत्री की पत्‍नी कमलेश ठाकुर ने मुख्‍यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्‍खू का चैन छीन लिया है।

अगर देहरा में कांग्रेस प्रत्‍याशी कमलेश ठाकुर हार गई तो ये हार सुक्‍खू की मुख्‍यमंत्री की कुर्सी को भी खतरे में न डाल दे तो आश्‍चर्य नहीं होना चाहिए।

नालागढ़ में भाजपा प्रत्‍याशी के एल ठाकुर को भाजपा के बागी हरप्रीत सिंह सैणी ने परेशान कर रखा है। सैणी पूर्व विधायक हरि नारायण सैणी के परिवार से है।वह बागी हो गए है व बतौर आजाद प्रत्‍याशी चुनाव मैदान में है। 2022 के विधानसभा चुनावों में केएल टिकट न मिलने के कारण बागी हो गए थे व जीत भी गए थे।

चूंकि इस बार नालागढ़ में मुकाबला कड़ा है ऐसे में अगर बागी हजार–दो हजार वोट भी भाजपा के ले जाएगा तो केएल की नैया को डुबोने से कोई नहीं बचा सकता। उधर,भाजपा के पूर्व प्रत्‍याशी लखविंदर राणा भी केएल के लिए कितना काम कर रहे है ये भी जगजाहिर है।

हरप्रीत सैणी को बिठाने के लिए भाजपा नेताओं ने पूरी ताकत लगा दी थी लेकिन वो नहीं माने। ये दीगर है कि उनके चुनाव मैदान में उतरने से सिख वोटों का विभाजन हो जाएगा। कांग्रेस प्रत्‍याशी हरदीप सिंह बावा भी सिख परिवार से है । हरप्रीत के खड़े होने से सिख मतों का विभाजन हो जाएगा। लेकिन हरप्रीत के खड़े होने से केएल से नाराज भाजपा मतदाताओं को हरप्रीत को वोट डालने का विकल्‍प मिल गया है।

के एल के इस्‍तीफा देने से भाजपा का बड़ा कुनबा नाराज हो गया है व केएल को मजा चखाना चाहता है। इसके अलावा जयराम व उनकी जुंडली सुक्‍खू सरकार को गिरा ही दे ये अब मुश्किल लग रहा है।हालीलाज कांग्रेस भी बड़ा विद्रोह करने की स्थिति में नहीं रही हैं। ऐसे में नालागढ़ के लोग सरकार के साथ ही जाना चाहेंगे।

इसी तरह हमीरपुर में  आशीष शर्मा  के लिए भी हमीरपुर के भाजपाई पूरी तरह से बाहर नहीं निकल रहे हैं। आशीष  के पास पैसों की कमी नहीं है लेकिन पार्टी के लोग ही घर बैठ जाए तो जीतना आसान नहीं रहता हैं। वो भी नई  राजनीतिक परिस्थितियों में । यहां पर बहुत सारा दारोमदार भाजपा के बड़े नेता व पूर्व मुख्‍यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के रुख पर बहुत कुछ निर्भर हैं। मोदी –शाह व नडडा की तिकड़ी की ओर से हाशिए पर णकेल दिए गए अनुराग प्रचार में उतरे जरूर है लेकिन जनता में असर धूमल का ही हैं और धूमल राजनीति के गुढ़ रहस्‍यों व रणनीतियों से अच्‍छे से बावस्‍ता है। भोरंज से पूर्व विधायक कमलेश कुमारी जरूर आशीष के लिए प्रचार करने उतरी हैं। नरेंद्र ठाकुर, उर्मिल ठाकुर व टिकट के दावेदार कितना काम आशीष के लिए कर रहे है ये सभी जानते है। इसके अलावा पंचतारा होटलों में उनके साथ आंनद लेने वाले उनके सखा राजेंद्र राणा भी प्रचार में एंट्री नहीं मार रहे है। साफ है आशीष के लिए मुकाबला आसान नहीं हैं।

देहरा में मुख्‍यमंत्री सुक्‍खू की पत्‍नी कमलेश ठाकुर ने पति का चैन पूरी तरह से छीन रखा है। चुंकि पत्‍नी है तो चैन तो लंबे अरसे से छीना ही जा रहा होगा।बहरहाल यहां भी सुक्‍खू के लिए भाजपा की बगावत ही मददगार साबित हो सकती है।पूर्व विधायक रमेश ध्‍वाला को भाजपाई चला हुआ कारतूस मान रहे है लेकिन ध्‍वाला को भाजपा प्रत्‍याशी होशियार सिंह के अलावा नेता प्रतिपक्ष जयराम व उनकी जुंडली से हिसाब चुकता करना है। जानकारी के मुताबिक व इस दिशा में लगे भी हुए हैं। कई भाजपा पदाधिकारियों ने देहरा में इस्‍तीफा भी दे दिया है। होशियार सिंह को पौंग बांध विस्‍थापितों का बड़ा साथ मिलता था लेकिन इस बार पौंग विस्‍थापित होशियार से नाराज है। ये बड़ा वोट बैंक है। अंदरखाते रविंद्र रवि की भूमिका भी निगाहबानी में रहेगी। ऐसे में होशियार सिंह के लिए ये अंदरुनी बगावत कम घातक नहीं हैं।