शिमला। हिमाचल प्रदेश के बददी की बेटी मुस्कान जिंदल ने अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा में 87वां रैंक हासिल कर नया मुकाम हासिल किया है।मुस्कान ने यह परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर प्रदेश का नाम ऊंचा किया हैं। एसडी कालेज चंडीगढ़ से बीकॉम आनर्स में विवि में पाचवां रैंक हासिल करने वाली मुस्कान ने […]
शिमला। हिमाचल प्रदेश के बददी की बेटी मुस्कान जिंदल ने अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा में 87वां रैंक हासिल कर नया मुकाम हासिल किया है।मुस्कान ने यह परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर प्रदेश का नाम ऊंचा किया हैं। एसडी कालेज चंडीगढ़ से बीकॉम आनर्स में विवि में पाचवां रैंक हासिल करने वाली मुस्कान ने सफलताओं के झंडे गाड़ने का सिलिसला रुकने नहीं दिया। बीकाम करने के बाद उम्र कम होने की वजह से मुस्कान आइएएस की परीक्षा नहीं दे पाई।21 साल पूरे होने पर ही मुस्कान ने पहली बार आइएएस की परीक्षा दी और सफलता का झंडा गाड़ दिया।
मुस्कान ने कहा कि उसने अपने पिता पवन जिंदल का सपना पूरा किया है। जब वह छोटी थी तो उसके पिता चाहते थे कि वह आइएएस अधिकारी बने। वह तभी से इस सपने को पूरा करने के लिए जुट गई थी। गायन की शौकीन मुस्कान पार्श्व गायक किशोर कुमार की गीतों की कायल है। मुस्कान ने कहा कि खेलों की ओर ज्यादा रूझान नहीं रहा।
मुस्कान ने कहा कि आइएएस बनने के लिए बाहर जाकर कोचिंग की ज्यादा जरूरत नहीं है। ये आनलाइन कोचिंग का दौर है। उन्होंने थोड़े –समय के लिए कई कोचिंग केंद्रों में कोचिंग ली लेकिन ज्यादा समय उन्होंने घर पर रह कर ही तैयारी की। मुस्कान बोली आनलाइन कोचिंग से घर बैठे भी तैयारी हो सकती है। खुद ज्यादा अच्छी पढ़ाई होती है। आज कल गूग्गल पर सब कुछ हैं।
मुस्कान ने कहा कि वह सात से आठ घंटे रोजाना पढ़ती थी। दोस्तों व अपनो से मिलना जुलना और सोशल लाइफ से उन्हें कभी दूर नहीं होना पड़ा। इन सबके साथ भी सफलता हासिल की जा सकती है। मुख्य परीक्षा में कामर्स व अकाउटेंसी जैसे विषयों के साथ शामिल हुई मुस्कान ने कहा कि उनका साक्षात्कार भी बहुत अच्छा रहा था। साक्षात्कार ओपिनियन बेसड ज्यादा था।ये ज्यादा मुश्किल नहीं रहा। मुस्कान ने कहा कि इस सफलता के पीछे उनकी मां का योगदान भी कम नहीं है।
चार भाई – बहनों में दूसरे स्थान पर जिंदल परिवार की इस बेटी की सफलता से पूरा बददी ही नहीं प्रदेश भी गौरवांवित महसूस कर रहा है।
मुस्कान के पिता पवन जिंदल ने कहा कि हमारे समाज में महिलाओं का नौकरी करना अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए उन्होंने सोच लिया था कि अगर बेटी को नौकरी करवानी है तो टॉप स्तर की ही होनी चाहिए। इसलिए उन्होंने पांचवी –छठी से ही मुस्कान को आइएएस बनने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया था।मुस्कान उम्मीदोंपर खरी उतरी है।
कोराबारी जिंदल परिवार 35 साल पहले हरियाणा के जींद से बददी आ गए थे। तब से वह यहीं के हो कर रह गए।
22 साल की मुस्कान की इस शानदार उपलब्धि पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नडडा ने मुस्कान को बधाईदी है।
