शिमला। एनजीटी ने इंदिरा गांधी मेडिकल अस्पताल के क्षेत्रीय कैंसर सेंटर के साथ प्रस्तावित टर्शरी कैंसर सेंटर की पांच मंजिलों के निर्माण के लिए हरी झंडी दे दी है। पंचाट ने शर्ते लगाई है कि कैंसर अस्पताल की इस इमारत पर सोलर एनर्जी, रेन हार्वेसिटंग और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का प्रावधान करना जरूरी है ताकि पर्यावरण […]
शिमला। एनजीटी ने इंदिरा गांधी मेडिकल अस्पताल के क्षेत्रीय कैंसर सेंटर के साथ प्रस्तावित टर्शरी कैंसर सेंटर की पांच मंजिलों के निर्माण के लिए हरी झंडी दे दी है। पंचाट ने शर्ते लगाई है कि कैंसर अस्पताल की इस इमारत पर सोलर एनर्जी, रेन हार्वेसिटंग और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का प्रावधान करना जरूरी है ताकि पर्यावरण के संभावित नुकसान को रोका जा सके।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल, सदस्य एस पी वांगड़ी ,के रामकृष्णन और विशेषज्ञ सदस्य नगीन नंदा ने पीठ ने स्वास्थ्य विभाग की अर्जी पर यह हरी झंडी दी। पीठ ने कहा कि 13 फरवरी 2019 को सुपरवाइजरी कमेटी के सिफारिशों का अवलोकन करने पर यह साफ है कि मौजूदा क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल के साथ बनने वाले इस टर्शरी कैंसर सेंटर का बनना लाजिमी। इसलिए सुपरवाइजरी समित ने जो नक्शा पास किया है उसे एनजीटी उपरोक्त शतो्रं के साथ मंजूरी देता है।
एनजीटी ने 16 नवंबर 2016 के अपने फैसले में राजधानी शिमला में अढाई मंजिल से ऊपर के तमाम निर्माण पर पाबंदी लगा दी थी और कोर एरिया में आपात सेवाओं के अलावा किसी भी तरह का निर्माण करने पर पांबदी लगा दी थी। चूंकि यह अस्पताल कोर एरिया में था तो और इसका नक्शा पांच मंजिला था । ऐसे में इसके निर्माण पर खतरा मंडरा गया था।
45 करोड़ रुपए के इस सेंटर के लिए केंद्र सरकार से 2016 में 16 करोड़ रुपए आइजीएमसी के पास पहुंच गए थे। अस्पताल ने तमाम एनओसी भी ले ली थी । लेकिन इस बीच योगेंद्र मोहन सेन गुप्त नामक व्यक्ति की याचिका पर नंवबर 2017 में पंचाट का फैसला आ गया और राजधानी में अढाई मंजिल से ऊपर के निर्माण पर पांबदी लग गई ।
दिसंबर 2017 में प्रदेश में जयराम सरकार सता में आ गई लेकिन न तो सरकार ने और न ही नौकरशाही ने इस मसले की ओर ध्यान दिया।
आखिर में योगेंद्र मोहन सेन गुप्त ने सरकार से लेकर अस्पताल तक अवगत कराया कि अस्पताल के निर्माण पर पाबंदी नहीं है। लेकिन सरकार नहीं मानी । इस पर आइजीएमसी के कैंसर विभाग के प्रमुख डाक्र मनीष गुप्ता ने इस अस्पताल की फाइल जुलाई अगस्त में पंचाट की ओर से गठित से सुपरवाइजरी कमेटी में जमा करा दी। लेकिन सब काम ढील से होता रहा । 2295 वर्गमीटर के क्षेत्र पर अब लोक निर्माण विभाग ने इस पांच मंजिलें भवन का निर्माण करना है।। 90:10 के अनुपात में बनने वाले इस अस्पताल के लिए 16 करोड़ 52
लाख रुपए आइजीएमसी में जमा हो चुक है जिसमें केंद्र से 14करोड़87 लाख व राज्य सरक के हिस्से की एक करोड़ 65 लाख की रक म शामिल हैं।
एनजीटी से हरी झंडी मिलने के बाद यहां पर निर्माण शुरू होगा व लीनियर एक्सीलेटर मशीन लगा दी जाएगी।
आइजीएमसी में सालाना कैंसर के 22 सौ से 25 सौ के करीब मरीज आ रहे हैं। रोजाना 50 से साठ कैमियो हो रहे हैं। जबकि सौ से 120 तक रोजाना रेडियोथेरेपी हो रही हैं।
