शिमला।अगर विधानसभा स्‍पीकर कुलदीप पठानिया ने  पूर्व विधानसभा अध्‍यक्ष विपिन परमार समेत भाजपा के नौ विधायकों को माफ या चेतावनी देकर नहीं निपटाया तो इन पर जेल,बर्खास्‍तगी और निलंबन की तलवार लटक गई हैं।

बीते रोज इन विधायकों ने स्‍पीकर की ओर से भेजे नोटिस का जवाब दे दिया हैं। अब गेंद स्‍पीकर पठानिया के पाले में चली गई हैं। राज्‍यसभा चुनावों में क्रास वोटिंग करने के बाद प्रदेश में जिस तरह का माहौल बन गया है उसे देखते हुए लगता है कि अब आने वाले समय में मारकाट मचने वाली हैं।   

विधानसभा की कार्यवाही को चलाने के लिए नियत किए गए नियमों के तहत नियम 86 के तहत विशेषाधिकार हनन व सदन व पीठ की अवमानना को लेकर दंड का प्रावधान किया गया हैं।

नियम 86 के तहत ये मिल सकता है दंड

यदि विशेषाधिकार समिति की यह राय हो, कि विशेषाधिकार हनन् हुआ है तो समिति सिफारिश कर सकेगी और सभा को निम्नलिखित दण्ड देने की शक्ति होगी (1) धिक्कारना; (2) भर्त्‍सना करना; (3) सदस्य का निलम्बन; (4) जुर्माना; (5) सदस्य का निष्कासन; (6) कारावास, जिसकी अवधि सभा के निर्णय पर निर्भर होगी परन्तु जो सत्रावसान या सभा के विघटन के पश्चात् आगे नहीं  बढ़ सकेगी।

इसके अलावा कोई अन्‍य दंड जो जो संविधान के अनुच्छेद 194 के उपबन्धों के अनुसरण में समुचित बैठता हो।  

 याद रहे स्‍पीकर कुलदीप पठानिया ने नाहन से कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी की शिकायत पर सुलह से भाजपा विधायक व पूर्व स्‍पीकर विपिन परमार,जिला चंबा के चुराह हलके से विधायक व पूर्व उपाध्‍यक्ष हंसराज,करसोग से दीपराज,नाचन से विनोद कुमार,बिलासपुर सदर से त्रिलोक जम्‍वाल,आनी से लोकेंद्र कुमार, ऊना से सतपाल सत्‍ती,,बल्‍ह से इंदर सिंह गांधी और बंजार से सुरेंद्र शौरी  के खिलाप विशेषाधिकार हनन व अवमानना की कार्यवाही शुरू  की हैं। इन्‍हें बाकायदा नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। इन सभी विधायकों ने 18 मार्च को जवाब देने की आखिरी तारीख को अपना जवाब लिखित में स्‍पीकर को सौंप दिया हैं।

अजय सोलंकी ने इन पर 28 फरवरी को सदन में हुई कार्यवाही के दौरान हंगामा करने का इलजम लगाया हैं। अपनी शिकायत में सोलंकी ने मुख्‍य तौर पर  इन विधायकों को जब सदन से बाहर करने के लिए मार्शलों को हिदायतें दी गई तो इन्‍होंने मार्शलों के साथ धक्‍का मुक्‍की की। विधानसभा की कार्यवाही के कागजात जो सदन में विधानसभा के कर्मचारियों के मेज पर थे उन्‍हें उठाकर स्‍पीकर की ओर फेंका, सदन में नारेबाजी की व कार्यवाही में बाधा डालने का  प्रयास किया।

बड़ा इल्‍जाम ये भी लगाया कि इन विधायकों की ओर से मचाए गए हंगामें के कारण उस दिन मनी बिल या बजट के पारित होने में बाधा हो सकती है जिसकी वजह से प्रदेश में वितीय संकट खड़ा हो सकता था और प्रदेश की जनता पर विपरीत प्रभाव डाल सकता था।

इन सदस्‍यों ने विधानसभा सदन  के सम्‍मान को कम करने , बाकी विधायकों की सुरक्ष्‍र जोखिम डालने , स्‍पीकर का अपमान किया हैं। इसके लिए इनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन व अवमानना की कार्यवाही की जाए।

सोलंकी की शिकायत के बाद विशेषाधिकार हनन समिति की ओर से सचिव विधानसभा ने इन नौ विधायक को नोटिस देकर जवाबा मांगा।

जवाब देने के बाद पूर्व स्‍पीकर विपिन परमार ने कहा कि उन्‍होंने जवाब दे दिया है और वह स्‍पीकर का पूरा सम्‍मान करते हैं।

 

विधानसभा के कैमरों में कैद हैं सबूत

इस मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि ये पूरा हंगामा विधानसभा के कैमरेां में कैद हैं । नोटिस के मुताबिक इन कैमरों की फुटेज इन विधायकों को भी दी गई हैं।

अगर मौजूदा माहौल के बीच स्‍पीकर ने  इनके खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाही कर दी और ये विधायक उसे अदालत में भी चुनौती देते है तो ये फुटैज अदालत में भी जाएगी। ऐसे में अदालत से क्‍या होगा इसका अंदाजा अभी तो नहीं ही लगाया जा सकता हैं।

अगर कहीं स्‍पीकर पठानिया ने इन नौ विधायकों का निष्‍कासन कर दिया तो प्रदेश विधानसभा के 25 में से 16 विधायक ही रह जाएंगे।