शिमला।मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह सिंह ,उनके प्रधान निजी सचिव वीसी फारका और मुख्‍य सचिव पी मित्रा जिस सचिवालय से प्रदेश में राज करते हैं वहां से केवल दो किलोमीटर की दूरी पर इन सबकी नाक के नीचे पर्यावरण नियमों  को ठेंगा दिखाकर सौ से ज्‍यादा फ्लैटों की एक कालोनी खड़ी हो गई है।

ये किन किन लोगों व अफसरों की मिलीभगत से बनी है इसका खुलासा अभी नहीं हो पाएगा। लेकिन शहर में फैले पीलिए के बाद जिस तरह से हाईकोर्ट ने आईपीएच व प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अफसरों पर गाज गिराई उससे थर्रा कर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने इस सोसायटी पर आपराधिक मुकदमा दायर करने का फैसला ले लिया है। हालांकि बोर्ड यहां पर बिलकुल पाक साफ नजर नहीं आ रहा है। फिर भी बोर्ड के सदस्‍य सचिव विनीत कुमार ने 19 अप्रैल को अपने मातहत अफसर को कालोनी खड़ाा करने वाली सोसायटी के कर्ताधर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दायर करने के आदेश दिए है। आईएफएस अफसर सदस्‍य सचिव प्रदूूषण कंट्रोल बोर्ड विनीत कुमार वही अफसर है जिनके खिलाफ पीलिया कांड में प्रदेश हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर शोकॉज नोटिस दे रखा है।

रिपोर्टर्स आइ डॉट कॉम के पास उपलब्‍ध दस्‍तावेज प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के कारनाामों की खुद पोल खोल देते है।बोर्ड के दफ्तर से कुल एक किलोमीअर की दूरी पर बन रही इस कालोनी के कर्ताधर्ताओं को बोर्ड के अधिकारी 23 जून 2014,18जुलाई 2014,4अगस्‍त2014, 7अप्रैल 2015,18जून2015 और 20अक्‍तूबर 2015 को चिट्ठियां लिखकर सोसायटी को निर्माण न करने के निर्देश देते रहे । लेकिन  ये काम नहींं रुका। कायदे से बोर्ड को  तीन नोटिस देने के बाद सोसायटी के खिलाफ मुकदमा दायर कर देना चाहिए था। लेकिन बोर्ड ने ऐसा नहीं किया और काम चलता रहा।बोर्ड ने इस बारेनगर निगम को भीअवगता  कराया कि वो इस कालोनी का निर्माण कार्य रुकवाए। लेकिन धूमल सरकार व वीरभद्र  सिंह सरकार में रसूखदारोंं ने ऐसा हाहाकार मचाया कि न तो काम निगम ने रुकवाया और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मुकदमा दायर किया।लेकिन पीलिया कांड में जब प्रदूषण बोर्ड के सदस्‍य सचिव विनीत कुमार और बाकी अधिकारियों पर गाज गिरी तो वो होश में आए।मुकदमा कभी भी दायर हो जाएगा।

मामला पंथाघाटी में प्रदेश के सबसे बड़े अस्‍पताल इंदिरा गांधी मेडिकल अस्‍पताल के डॉक्‍टरों की ओर से गठित आईजीएमसी डाक्‍टर्स को-आपरेटिव हाउसिंग सोसायटी का हैै।

सोसायटी ने पंथाघाटी में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से बिना अनुमति लिए 20  हजार वर्ग से ज्‍यादा इलाके में निर्माण कर दिया।( जबकि सोसायटी ने  नगर निगम से 14000 वर्ग मीटर में इस सोसायटी का निर्माण करने का नक्‍शा पास करवा लिया था।सारा घपला यहीं हुआ हैै। बताते है कि ये सारा मामला धूमल सरकार के दौरान 2008 से लेकर 2012 के बीच हो गया।अब सोसायटी के आका भंडा निगम पर फोड़ने पर आ गए है।

सोसायटी के कर्ताधर्ताओं का कहना है कि जब उन्‍होंने नक्‍शा पास करवाया तो निगम ने उन्‍हेंं ऐसा कुछ नहीं बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी मंजूरी लेनी लाजिमी है।इसके अलावा पर्यावरण मंजूरी का भी कोई झमेला नहीं  था।हालांकि   ये कर्ताधर्ता सही कह रहे है।पर्यावरण मंजूरी लेने की जरूरत तब पड़ती है अगर बिल्‍ट अप एरिया 20 हजार वर्ग मीटर से ज्‍यादा हो।सूत्रों के मुताबिक जब नक्‍शा पास कराया गया था तो ये 20  हजार वर्ग मीटर से कम ही था।लेकिन जब सोसायटी ने पर्यावरण विभाग से पर्यावरण मंजूरी मांगी तो सोसायटी के दस्‍तावेजों में ये बिल्‍ट अप एरिया 21हजार से ज्‍यादा सामने अा गया।कांड यहीं से सामने आ रहा है।इस पर पर्यावरण विभाग ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड सोसायटी के खिलाफ उचित कार्यवाही करने के आदेश दिए।

अब बड़ा सवाल ये है कि क्‍या सोसायटी ने नगर निगम में नक्‍शा पास कराते समय घपला किया है।हालांकि कोई भी घपला सरकारी विभागों के अफसरों की मिलीभगत से नहीं हो सकता। आरोप तो ये भी है कि निगम में नक्‍शा पास कराते वक्‍त प्रभावशाली लोगों के प्रभाव काइस्‍तेमाल किया गया था। सचिवालय  के कई आईएएस अफसर जुगाड़ कराने में शामिल रहे थे। लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।,सूत्र बताते है कि मुख्‍यमंत्री कार्यालय का एक बड़ा अफसर,एक प्रधान सचिव और  धूमल सरकार में धूमल के बेहद करीबी रहा एक तत्‍कालीन प्रधान सचिव मौजूदा  अफसरों पर लगातार दबाव बनाने में लगे हुए है।कहा तो ये भी जा रहा है कि ये मुकदमा अदालत में दायर ही इसलिए किया जा रहा है कि सोसायटी पर थोड़ी बहुत पैनाल्‍टी  लग जाए और अदालत के फैसले  के आने तक पर्यावरण विभाग से पर्यावरण मंजूरी ले ली जाए।इससे बोर्ड के अफसर भी पाक साफ बच जाते है और सोसायटी का काम भी हो जाताा  है।बहरहाल खेल जारी है।

इस मसले पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्‍य सचिव  विनीत कुमार  ने कहा कि बोर्ड ने पर्यावरण विभाग के निर्देश पर सोसायटी के खिलाफ मुकदमा दायर करने  के आदेश दिए है। ये पूछे जाने पर कि बोर्ड सोसायटी को जून2014 से नोटिस दिए जा रहा है तो पहले कार्यवाही क्‍योंं नहीं की,विनीत कुमार बोले उनके नोटिस में ये मामला जैसे ही आया उन्‍होंने मुकदमा दायर करने के आदेश  दे दिए।चूंकि बाकी का काम उनके मातहत अफसरों का है।

उन्‍होंने कहा कि पर्यावरण मंजूरी  और कंसेंट ऑफ इस्‍टेबलिश  निर्माण पूरा होने के बाद भी मिल सकती  है।सोसायटी के कर्ताधर्ताओं के प्रति जुबानी सहानुभूति जताते हुए वो बोले किसी को घर बनाने से थोड़े ही रोक सकते हैै,बस कानूनों व नियमों का पालन होना चाहिए।

इस दिलचस्‍प मामले में नगर निगम  की नजर में आज सोसायटी का  स्‍टेटस क्‍या है इस बावत  नगर निगम के स्‍मार्ट  अफसर (गोलमोल जवाब देने में निगम के अफसर बहुत स्‍मार्ट है) योजना वास्‍तुकार राजीव शर्मा बोले कि वो फाइल मंगवाकर जो भी कार्यवाही बनेंगी,करेंगे।

उधर,आईजीएमसी डॉक्‍टर्स  को आपरेटिव हाउसिंग सोसायटी  के चेयरमैन डाक्‍टर श्‍याम कौशिक अलग ही दास्‍तां बताते है। उन्‍होंने कहा कि सोसायटी ने नगर निगम से जब  नक्‍शा पास कराया था तो निगम ने उन्‍हें ऐसा कुछ नहीं बताया कि  पर्यावरण मंजूरी भी लेनी होती है ।वो 2008 से इस प्रोजेक्‍ट  पर लगे हुए है।अब तक तो फ्लैट बन भी जाते। ये पूछने पर कि सोसायटी ने नगर निगम से जो नक्‍शा पास कराया वो साढ़े चौदह हजार वर्गमीटर के बिल्‍टअप एरिया का था व जब पर्यावरण मंजूरी मांगी तो पर्यावरण विभाग में 21 हजार वर्ग मीटर से ज्‍यादा का एरिया  बताया। क्‍या ये घपला नहीं किया गया है। डाक्‍टर कौशिक ने कहा कि इन दोनोंं विभागों का अपना अपना फंडाा है। बोर्ड पार्किंग व खुले स्‍पेस को भी बिल्‍ट अप एरिया  मान रही है। सोसायटी ने नक्‍शेे  के मुताबिक ही काम कराया है।हालांकि उनकी इस दलील को प्रदूषण बोर्ड के इंवायरंमेंट इंजीनियर एस के शांडिल गलत करार देते है कि वो इस मामले में भारत सरकार की अधिसूचना के मुताबिक ही काम कर रहे है।उसमें हर चीज परिभाषित है।शांडिल ये भी जोड़ते है कि बिल्‍ट अप एरिया को लेकर दस्‍तावेज सोसायटी ने खुद दिए है। बोर्ड ने कुछ नहीं किया है।

डाक्‍टर कौशिक से ये पूछने पर कि बोर्ड सोसायटी को जून 2014 से काम बंद करने के नोटिस भेज रहा हैतो उन्‍होंने काम बंद क्‍यों नहीं किया।वो बोले कि उन्‍होंंने काम बंद करा दिया था।

हालांकि ये सही नहीं लगता। अगर काम बंद कर दिया होता तो इतने सारे नोटिस सोसायटी को नहीं मिलते। आरोप ये भी लग रहे है कि सोसायटी ने बहुत से फ्लैट बाहर के लोगों को बेच  दिए है।12 फ्लैट किसी ठेकेदार को दिए है। इस मसले पर कौशिक ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है।हालांकि इस मसले की स्‍वतंत्र पड़ताल अभी की जानी बाकी हैै।

बहरहाल जो भी हो रसूखदारोंं के खेल सरकार की मिलीभगत से सरकार की नाक के नीचे जारी हैै।अब देखना ये है कि इस मामले में आगे क्‍या खेल होता हैै।

गौरतलब हो कि हीरानगर में एमएलए कालोनी,पंथाघाटी में आईएएस कालोनी,बेमलोई के नीचे डीएलएफ कालोनी के बाद अब पंथाघाटी में एक आौर कालोनी का निर्माण विवाादों में आ गया है। हीरानगर में प्रदेश के नेताओंं ने अपनाा रसूख दिखाकर कानून  के साथ उत्‍पात मचाया था तो आईएएस कालोनी में प्रदेश के नौकरशाहों ने स्‍टील फ्रेम की ताकत प्रदेश की भोली भाली जनता को दिखाई। डीएलएफ कालोनी में  प्रदेश के बड़े  नेता और उनके पुत्रों ने कानून के साथ हाहाकार मचाया तो अब पृथमद्ष्‍टया आईजीएमसी के डॉक्‍टरों ने पंथाघाटी में कानून का सरेआम मजाक उड़ाया है।सिलसिला बाकी जगहों पर भी जारी है और सच मानिए हर जगह सरकार की मौन हामी इन सब तबकों के साथ है।चूंकि ये रसूखदार है,बस इसलिए।हैरानी ये है कि इस सबमें भाजपा,कांग्रेस व वामपंथी सब एक साथ है।सब के सब कहीं न कहीं रसूखदार, कानून तोड़ने वालों के साथ।

समाज के इन रसूखदार तबकों ने कानून को जैसे चाहा वैसेे तोड़ा-मरोड़ा व अपने मुताबिक कर लिया।बस मजबूर वो रहे जो आम लोग थ्‍ो। उनके लिए कहीं कोई रास्‍ता नहीं है।

यहां पढ़े सोसायटी पर आपराधिक मुकदमा  चलाने के लिए मातहत अफसर को लिखा ये पत्र-:

me