शिमला। एनजीटी की ओर से मनाली से रोहतांग तक वाहनों की पांबदी से स्थानीय लोगों के कारोबार पर पड़े असर को देखते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि वो एनजीटी के आदेशों से सहमत नहीं है।सीएम ने कहा कि मनाली से रोहतांग तक वाहनों की पांबंदी से कुछ होने वाला नहीं है। वहां ग्लेशियर […]
शिमला। एनजीटी की ओर से मनाली से रोहतांग तक वाहनों की पांबदी से स्थानीय लोगों के कारोबार पर पड़े असर को देखते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि वो एनजीटी के आदेशों से सहमत नहीं है।सीएम ने कहा कि मनाली से रोहतांग तक वाहनों की पांबंदी से कुछ होने वाला नहीं है। वहां ग्लेशियर भी नहीं पिघल रहे है।वहां कोई पहाड़ गिरने वाला नहीं है।ऐसे में एनजीटी के आदेश ठीक नहीं है।
भाजपा विधायक गोबिंद ठाकुर नेप्रश्न काल शुरू होने से पहले एनजीटी के आदेशों से मनाली के लोगों को आ रही समस्याओं का ध्यान स्पीकर की ओर खींचा। गोबिंद ठाकुर ने कहा कि सरकार इस मामले में कुछ नहीं कर रही है।ठाकुर ने कहा कि उन्होंने पिछले वीरवार को नियम 67 के तहत इस मामले में चर्चा के लिए नोटिस दिया था। इस पर स्पीकर ने कहा कि सरकार से अभी इस पर जवाब नहीं आया है।प्रश्नकाल में इस मसले पर चर्चा नहीं हो सकती। इस पर ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री के अपने निजी मुकदमों में पी.चिदंबरम और कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकीलों से पैरवी कराते है। जबकि आम लोगों के हितों की सही तरीके से पैरवी नहीं की जाती। इस पर सीएम नाराज हो गए।उन्होंने कहा कि उनकी सरकार एनजीटी के फैसलों से बाहर नहीं जा सकती।वीरभद्र सिंह ने कहा कि उनके मुकदमों की पैरवी बड़े वकील सरकारी खर्चे पर नहीं करती। इसके लिए वो पैसे अपने जेब से देते है।
सदन में स्िथति तब गर्म हो गई जब वीरभद्र सिंह ने कहा कि विधायक के वहां पर निजी हित है। ये समस्या तब ज्यादा पेचिदा हुई जब विधायक ने स्थानीय लोगों को बहकाया। सीएम बोले ”मैं आपको जानता हूं, इनकी वजह से ये समस्या हुई है। बजाय मामले को सुलझाने के इन्होंने इस मसले पर राजनीति की है। ये चाहते है कि मनाली में आग सुलगती रहे,लोग उलझते रहे”।
गोबिंद ठाकुर ने कहा कि सरकार ने एनजीटी में अपने हाथ काट कर दे दिए है।पक्ष ठीक से नहीं रखा गया। दिल्ली से दो सीएनजी की बसें टेस्टिंग के लिए आई 25 लाख रुपया खर्चा आया। इस बीच नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने दखल देते हुए कहा कि विधायक का ये निजी हित का मामला नहीं है। ये उनके विधानसभा क्षेत्र का मामला है। वो चर्चा ही तो मांग रहे है। उन्होंने आग्रह किया कि किसी भी नियम के तहत इस मामले में चर्चा की जाए।
बाद में संसदीय मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सदन कहा कि सरकार नियम 62 के तहत चर्चा कराने को तैयार है। फैसला स्पीकर लें। अब इस मामले में बुधवार को सदम में चर्चा होंगी।
