शिमला। राज्यसभा सीट के लिए मतदान के बाद भाजपा कांग्रेस के विधायकों को प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की नाक के नीचे से उड़ा ले गई और सुक्खू देखते रह गए हैं। अब जब सब कुछ हो गया तो यह इल्जाम लगाना कि सीआरपीएफ और हरियाणा पुलिस पांच छह विधायक का अपहरण कर ले […]
शिमला। राज्यसभा सीट के लिए मतदान के बाद भाजपा कांग्रेस के विधायकों को प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की नाक के नीचे से उड़ा ले गई और सुक्खू देखते रह गए हैं। अब जब सब कुछ हो गया तो यह इल्जाम लगाना कि सीआरपीएफ और हरियाणा पुलिस पांच छह विधायक का अपहरण कर ले गई है अपने आप में हास्यस्पद हैं।
मुख्यमंत्री सुक्खू के पास गृह विभाग का महकमा भी है। खुफिया एजेंसी उनके अधीन है । ऐसे में सब कुछ उनकी नाक के नीचे चलता रहा और उन्हें कोई भनक न लगी हो ऐसा कैसे हो सकता हैं।
इस पूरे प्रकरण में अब प्रदेश मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक समेत सुक्खू की तमाम सरकारी मशीनरी की भूमिका कटघरे में आ गई हैं। साथ ही जाहिर हो गया है कि सुक्खू प्रदेश में कांग्रेस का बहुमत होने के बावजूद राज्यसभा सीट के चुनावों में कहीं न कहीं चूक कर गए हैं। अब तो उन्हें सत्ता से हाथ धोना पड़ सकता हैं।
उनका यह दावा करना कि भाजपा ने गुंडागर्दी की है अपने आप हास्यस्पद हैं। उनके प्रदेश में सब कुछ हुआ। जिन विधायकों को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि उनका अपहरण किया गया हैव शाम को अभिषेक मनु सिंघवी के साथ सिसिल होटलमें हुई बैठक में शामिल थे। इसके बाद उन्होंने अपना वोट दिया और दोपहर बाद विधानसभा परिसर से वह बाहर निकल गए।
अगर अपहरण जैसी कोई बात होती तो सुक्खू की पुलिस उसे आराम से रोक सकती थी। अब कहा जा रहा है कि ये विधायक कल गोवा के लिए रवाना हो जाएंगे। इनके पीछे बाकी विधायक नहीं आएंगे इसकी क्या गारंटी हैं। अधिकांश विधायक हालीलाज कांग्रेस समर्थक है। चाहे वह राजेंद्र राणा हो या सुधीर शर्मा।
