शिमला।मार्च 2024 में सप्ताह में पांच दिन की डयूटी करने पर सहमति बन जाने के बाद इसे लागू न करने से खफा देश भर के बैंक कर्मचारियों ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन तक हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया है। राजधानी शिमला में आयोजित बैंकों के अधिकारियों व कर्मचारियों के सात […]
शिमला।मार्च 2024 में सप्ताह में पांच दिन की डयूटी करने पर सहमति बन जाने के बाद इसे लागू न करने से खफा देश भर के बैंक कर्मचारियों ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन तक हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया है।
राजधानी शिमला में आयोजित बैंकों के अधिकारियों व कर्मचारियों के सात संगठनों की ओर से आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के राज्य संयोजक नरेंद्र शर्मा ने मोदी सरकार पर वादाखिलाफी का इल्जाम लगाया। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि अगर बैंकर्स की मांगों को नहीं माना गया तो कर्मचारी व अधिकारी अक्तूबर में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चलें जाएंगे।
इसके अलावा पर फार्मेंस लिंकड इंसेंटिव के मामले में निचले कर्मचारियों व अधिकारियों के बीच अदायगी के मामले में बड़ा भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार अंग्रेजों की तरह बांटो व राज करो की नीति पर चल रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शर्मा ने कहा कि बैंकों में सप्ताह में पांच दिन डयूटी करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार से 2015 से वार्ताएं चल रही है। लेकिन केवल आश्वासन मिलते रहे। केंद्र सरकार के तमाम मंत्रालयों, एलआइसी, सेबी,मनी मार्किंटिंग,रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया समेत सभी अदारों में पांच दिन का सप्ताह है। वित मंत्रालय में भी पांच ही दिन काम होता है। केवल बैंकों में ये लागू नहीं है।
शर्मा ने कहा कि लंबे सर्घष व वार्ताओं के दौर के बाद मार्च 2024 में इंडियन बैंकर्स एसोसिएशन व बैंकों की यूनियंस के बीच एग्रीमेंट हो गया कि बैंकों में भी पांच दिन का सप्ताह होगा। लेकिन 24 मार्च 2024 से लेकर अब तक मोदी सरकार ने इस एग्रीमेंट को मंजूरी ही नहीं दी।हालांकि बीच में 11 सितंबर को भी हड़ताल की गई थी। लेकिन मोदी सरकार पूरी तरह से असंवेदनशील रही । ऐसे में बैंकर्स को ये कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने इस हड़ताल को जायज ठहराते हुए कहा कि बैंकों में काम का भारी बोझ है। बैंकर्स रोजाना तीन-तीन घंटें ज्यादा काम करते है। इसके अलावा केंद्र सरकार के दर्जनों फलैगशिप प्रोग्राम्स है। ये सब बैंकों के कंधों पर ही हो रहा हैं। उन्होंने कहा कि पूरी आर्थिकी डिजिटल हो गई है । ऐसे में बैंकों में बैंकएंड पर काम बढ़ गया है।
इसके अलावा उन्होंने बैंकों की तबादला नीति को भी कटघरे में खड़ा किया व कहा कि हर तीन या पांच साल बाद बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों हजार बारह सौ किलोमीटर दूर तबादला कर दिया जाता है। जिसका कोई औचित्य नहीं है।शर्मा ने कहा कि अगर पांच दिन का सप्ताह कर दिया जाता है तो इन पांच दिनों में बैंकर्स रोजाना 40 मिनट ज्यादा देर काम करने को तैयार है।
चलते रहेंगे ATM,रविवार को खुले रहेंगे बैंक,शनिवार को छुटटी
तीन दिन तक चलने वाली इस हड़ताल की वजह से उपभोक्ताओं को असुविधा न हो इसके लिए एटीएम व डिजिटल लेनेदेन चलता रहेगा । शर्मा ने कहा कि आरबीआई के निर्देशों पर रविवार को तमाम बैंक खुले रहेंगे ।हालांकि इस पर बैंक यूनियंस को आपति है। ये आरबीआइ का एकतरफा फैसला है। फैसला लेने से पहले यूनियंस से कोई चर्चा नहीं की गई। शर्मा ने कहा कि कल यानी 26 सितंबर को बैंकों में छुटटी रहेगी।
परफार्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव पर बड़ा खुलासा
बैंक कर्मियों व अधिकारियों को मिलने वाले परफार्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव को भेदभावपूर्ण करार देते हुए नरेंद्र शर्मा ने खुलासा किया कि बैंक के चतुर्थ व तृतीय श्रेणी कर्मचारियों व अधिकारियों को मिलने वाले इस इंसेंटिव में भी भारी झोल है। चतुर्थ व तृतीय श्रेणी के कर्मियों को केवल 15 दिन का इंसेंटिव मिलता है जो आठ दस हजार होता है।जबकि अधिकारियों को 18 से 28 लाख रुपए तक का इंसेंटिव मिल रहा है। इसमें अधिकारियों के बीच भी भेदभाव है किसी को 28 लाख रुपए तक मिल रहे है तो किसी को कुछ भी नहीं मिलता।उन्होंने कहा कि ये इंसेंटिव सभी को एक समान मिलना चाहिए।
दो लाख करोड़ के प्रॉफिट में बैंक,आबादी 140 करोड़ खाते 160 करोड़
नरेंद्र शर्मा ने कहा कि देश के तमाम सरकारी बैंकों का सालाना प्रॉफिट दो लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। लेकिन नई भर्ती नहीं हो रही है। चपड़ासी व सुरक्षा कर्मियों की भारी कमी है। युवाओं को रोजगर नहीं दिया जा रहा है। इस प्रॉफिट को युवाओं को रोजगार देने में खर्च किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटाइजेशंस के बाद 24 करोड़ बैंक खाते बढ़े हैं । देश की आबादी 140 करोड़ है जबकि बैंकों में खाते 160 करोड़ तक पहुंच गए है। इन सबको बैंक कर्मियों को ही संभालना पड़ता है।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन के राज्य अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा इंडियन बैंकर्स एसोसिएशन के साथ होने वाले किसी भी समझौते को छह महीने के भीतर लागू कर दिया जाता है लेकिन इस बार 30 महीने से ज्यादा हो गया है। ये हड़ताल सरकार की ओर से उन पर थोपी गई है।
26 अक्तूबर से अनिश्चित कालीन हड़ताल की धमकी
आशुतोष शर्मा ने कहा कि इस बार वो अपनी मांगों को मनवा कर रहेंगें अगर तीन दिन की हड़ताल के बाद भी सरकार न चेती तो तमाम बैंक यूनियंस 26 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगी व इसकी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।
28 से 30 सितंबर तक देश भर में बैंकर्स तमाम जिला उपायुक्तों के कार्यालयों के बाहर धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध जाताएंगे।
