‍शिमला।दुनिया में हिमाचल का डंका बजाने वाले द ग्रेट खली यानी दलीप सिंह राणा प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्‍खू सरकार के पांवटा राजस्‍व विभाग के अफसरों ने दिन में तारे दिखा रखे है।

ग्रेट खली का इल्‍जाम है कि उनकी जमीन को स्‍थानीय तहसीलदार ने बाकी लोगों से मिलीभगत कर किसी और के सुपुर्द कर दिया और राजस्‍व दस्‍तावेजों में गलत एंट्री कर उनकी जमीन हड़पने का काम कर दिया है।  खली ने आज राजधानी में प्रेस कांफ्रेंस की।

ग्रेट खली ने 2013 में अपने पिता ज्‍वाला राम के नाम से स्‍थानीय रंजीत कौर से पावंटा के सूरजपुर में 16 बीघा के करीब जमीन खरीदी थी। रंजीत कौर के परिवार ने ये जमीन कोई 25 साल पहले परमजीत कौर के परिवार से खरीदी थी।रंजीत कौर व परमजीत कौर दोनों ही इस मौके पर मौजूद थी।  तब तत्‍कालीन पटवारी व कानूनगो के अलावा जमीन मालिक ने निशानदेही के बाद उनको इस जमीन का कब्‍जा भी दे दिया था तब से लेकर अब तक वो इस जमीन पर गन्‍ने की खेती कर रहे थे।तब से लेकर अब तक इस जमीन पर किसी ने कोई दावा नहीं किया।

 

 

लेकिन अक्‍तूबर 2025  में तहसीलदार पांवटा ऋषभ शर्मा और राजस्‍व विभाग के अधिकारी किसी अन्‍य व्‍यक्ति साथ उनकी जमीन पर आए और कहा कि ये जमीन उनकी नहीं है।

जिस समय ये सब हुआ उस समय वो मध्‍य प्रदेश में थे । उन्‍होंने तब डीसी सिरमौर प्रियंका वर्मा के अलावा तहसीलदार से भी आग्रह किया कि उनकी जमीन को किसी और को इस तरह नहीं बिठाया जा सकता। उसकेतीन चार दिन बाद वो पांवटा के तहसीलदार से मिले इस बावत बात की। तहसीलदार ने उनसे कहा कि अभी पटवारी नहीं है। तो मैंने कहा कि पटवारी को अभी बुला लो। लेकिन तहसीलदार ने पटवारी को नहीं बुलाया।

इसके बाद जब वो कमरे से बाहर आए तो पता चला कि इस खेल में तहसीलदार खुद शामिल है।

जिसके चलते  उनके विरोध बावजूद इस जमीन जो इनके कब्‍जे में थी व 2013 में जिस जमीन को पटवारी व कानूनगो उनकी बता गए थे,  उसमें से सात आठ बीघा जमीन की रजिस्‍ट्री किसी अन्‍य के नाम कर दी। अब उनकी जमीन कहीं और बताई जा रही है। ये जमीन वाता नदी में बताई जा रही है।जबकि उनने जो स्‍टैंप डयूटी दी थी वो ऊपजाउ जमीन की अदा की है।

खली ने कहा कि 2013 में जब उनने ये 16 बीघा जमीन खरीदी थी तो उनने 11 लाख रुपए स्‍टैंप डयूटी अदा की थी लेकिन अब जिस व्‍यक्ति ने उनकी जमीन पर मिली भीगत पर दावाकिया उसने 25 बीघा जमीन की स्‍टैंप डयूटी ही पांच लाख से कुछ ज्‍यादा अदा की है।

उनने ये भी इल्‍जाम लगाया कि जब उनकी जमीन का कब्‍जा किसी और को दिया गया तो कब्‍जा के दौरान फर्द कब्‍जा तक नहीं बनाई गई। जबकि कब्‍जा लेने की एक पूरी प्रक्रिया है। इसके अलावा जिसने खरीदी उसने किस चैक नंबर से भुगतान किया व किस बैंक खाते से किया वो भी रजिस्‍ट्री में दर्ज नहीं किया गया। जबकि जब उनने ये जमीन खरीदी थी तो रजिस्‍ट्री में चेक नंबर के अलावा किस बैंक खाते में ये पैसे गए ये सब दर्ज है।

 

खली ने गंभीर इल्‍जाम लगाया कि जब उनकी इस जमीन को दूसरे के नाम इंतकाल किया गया तो उस समय सूरजपुर के नंबरदार को नहीं बुलाया गया किसी दूसरे राजस्‍व गांव  यानी गांव संतोषगढ़ के नंबरदार को मौके पर बुलाया गया। ये क्‍यों किया इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

खली के साथ प्रैस कांफ्रेंस में सूरजपुर के नंबरदार बलविंदर सिंह भी मौजूद थे। उनने भी जोड़ा कि उनको नहीं बुलाया गया था।उन्‍होंने दावा किया जिसकी ये जमीन बताई जा रही है उनने उनको इस जमीन पर कभी नहीं देखा। इसके अलावा जब खली की जमीन का कब्‍जा भी वीरेंद्र नामक व्‍यक्ति को दिया गया तो तो भी ये लोग मौके पर नहीं थे। सब कुछ गोलमाल किया गया।

यही नहीं विवाद के समय जब जमीन पर निशानदेही की गई तो वहां फसल लगी थी। ऐसे में किस तरह की निशानदेही हुई होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

खली ने राजधानी में प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पांवटा के तहसीलदार पर तमाम तरह के गंभीर इल्‍जाम लगा दिए।

ये पूछे जाने पर कि जो आठ बीघा जमीन अब किसी और को दे दी है उसकी गिरदावरी तो किसी के नाम हुई होगी तो खली ने कहा कि पांवटा के राजस्‍व अधिकारी उनको गिरदावरी के कागज नहीं देते हैं। याद रहे हर छह महीने में राजस्‍व विभाग को गिरदावरी करनी होती है व इसके जमीन के मालिक, उसके कब्‍जाधारी व क्‍या फसल उगाई गई उसका जिक्र होता है।

खली ने राजधानी में कहा कि इस कांड की जांच स्‍ंवतंत्र एजेंसी से करवाई जाए व यहां पर हो रहे भ्रष्‍टाचार पर लगाम लगाई जाए।

उनने कहा कि वो मुख्‍यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्‍खू से भी मिलेंगे। उनकी जमीन को इस तरह से नहीं हड़पा जा सकता और जिन अफसरों ने ये कारनामें दिखाए हैं उनको सबक सिखाया जाएगा।

उधर, एसडीएम पांवटा गूंजीत सिंह चीमा ने कहा कि इस मामले में वो जांच कर रहे है। छह दिसंबर को उनके पास शिकायत आई थी उनने खली व बाकी तमाम जुड़े लोगों से उन्‍हें दस्‍तावेज मुहैया कराने को कहा था। लेकिन दो बार रिमाइंडर देने के बाद भी खली की ओर से दस्‍तावेज नहीं दिए गए।  आखिर में 29 दिसंबर को उन्‍हें दस्‍तावेज मुहैया कराए गए है।इसके बाद उन्‍होंने प्रारंभिक जांच डीसी को भेज दी है जिसका खुलासा वो नहीं कर सकते।