शिमला। प्रदेश के अदारे भारी वितीय संकट में है इसका भंडा किसी और ने नहीं सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार के पर्यटन निगम के एमडी राजीव कुमार ने प्रदेश हाईकोर्ट में लिखित में हल्फनामा देकर फोड़ दिया हैं। याद रहे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बीते दिनों बड़ा दावा किया था कि प्रदेश में कोई […]
शिमला। प्रदेश के अदारे भारी वितीय संकट में है इसका भंडा किसी और ने नहीं सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार के पर्यटन निगम के एमडी राजीव कुमार ने प्रदेश हाईकोर्ट में लिखित में हल्फनामा देकर फोड़ दिया हैं। याद रहे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बीते दिनों बड़ा दावा किया था कि प्रदेश में कोई वितीय संकट नहीं हैं।
लेकिन पर्यटन निगम के एमडी राजीव कुमार ने जो हलफनामा अदालत में दायर किया है उसमें साफ किया गया है कि पर्यटन निगम भारी वितीय संकट में हैं।
नालदेहरा होटल गोलफ ग्लैड से दिसंबर 2022 में सेवानिवृत हुए प्रबंधक जय कृष्ण मेहता ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसके ग्रेच्यूटी के नौ लाख रुपए अदा नहीं किए गए हैं। उसे केवल एक लाख रुपया दिया है। उसने अपनी सेवानिवृति के बाद के देयों के भुगतान की गुहार हाईकोर्ट से लगाई थी।
न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ की अदालत में एमडी पर्यटन निगम राजीव कुमार ने हलफनामा देकर कहा है कि निगम वितीय संकट में है और जैसे की फंड उपलब्ध होंगे ये रकम अदा चरणबद्ध तरीके से अदा कर दी जाएगी।
राजीव कुमार ने अदालत में हलफनामे में कहा है कि कोविड और 2023 की प्राकृतिक आपदा की वजह से ये संकट आया है।
हलफनामे में हा गया है कि निगम के कर्मचारियों के 1 जनवरी 2016 से 31 अगस्त 2024 तक डीए,एरियर, और गेच्यूटी व लीव इनकैशमेंट के 35 करोड़ 13 लाख 13 हजार 386 के बकाया भुगतान निगम के पास लंबित पड़े हैं।
न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने एमडी कह ओर से दायर हलफनामे का हवाला देकर अपने आदेश में जिक्र किया है कि जो विवरण हलफनामे में दिया गया है वह चौंकाने वाला है।
हिमाचल जिसे दूवभूमि कहा जाता है और जो पर्यटन भूमि के नाम से भी विख्यात है वहां पर पर्यटन निगम के हालात बदहाल है। अदालत ने आदेश में जिक्र किया है कि ऐसा नहीं कि सैलानी हिमाचल नहीं आ रहे है वो आ रहे है लेकिन वो निगम के होटलों में नहीं ठहर रहे हैं। जबकि नगम के होटल प्राइम जगहों पर हैं। वो निगम के रेस्तरां में भी नहीं जाते है।
कम से कम निगम के ओर दिए गए विवरण के मुताबिक ये होटल जितनी की जानी चाहिए थी उतनी आय का सृजन नहीं कर रहे है। अगर निगम इन होटलों को चलाने में समर्थ नहीं है तो वो इन्हें निजी व साझेदारी में चलाने व अन्यों कदमों को क्यों नहीं उठाता है।
अदालत ने अपने आदेश में ये भी जिक्र किया है कि अन्यथा अदालत इन होटलों को बंद करने की बावत आदेश पारित करने की ओर भी सोच सकती है।
अब इस मामले में तीन अक्तूबर को एमडी से जवाब मांगा हैं। अगली सुनवाई तीन अक्तूबर को होंगी।
