शिमला। तीन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली करारी जीत के बाद हिमाचल कांग्रेस  की सुक्‍खू सरकार मंत्रिमंडल विस्‍तार भी याद आ गया और जिला मंडी की अनदेखी भी याद आ गई।

मंत्रिमंडल में दो मंत्रियों राजेश धर्माणी और यादविंदर गोमा को शामिल करने के बाद सुक्‍खू ने एलान कर दिया कि मंडी से जीते कांग्रेस के एक मात्र विधायक चंद्रशेखर की भी सरकार में कहीं ताजपोशी की जाएगी।

वामपंथी से कांग्रेसी बने चंद्रशेखर पूर्व मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी रहे हैं। उन्‍होंने भाजपा के पूर्व सरकार में सबसे ताकतवर मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के पुत्र को चुनाव में हराया था। बीजेपी जिला मंडी की दस सीटों में से केवल एक धर्मपुर की ही सीट हारी थी ।

सुक्‍खू ने एक साल तक मंडी की ताबड़तोड़ अनदेखी की थी। चूंकि ये प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष व हालीलाज  कांग्रेस की सर्वेसर्वा प्रतिभा सिंह का संसदीय क्षेत्र था तो सुक्‍खू ने इस जिला की सुध तक नहीं ली।

लेकिन तीन  पांच राज्‍यों में हुए चुनावों के बाद जिस तरह से राजस्‍थान, छतीसगढ़ और मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस की करारी हार हुई उसे बाद सुक्‍खू व उनकी जुंडली के होश ठिकाने आ गए।

सता में एक साल पूरा होने के दूसरे दिन ही सुक्‍खू ने मंत्रिमंडल का विस्‍तार कर दिया। महिलाओं को 15 सौ रुपए पैंशन देने की लाहुल- स्पिति से ही सही शुरूआत करने का एलान कर दिया।

पिछले एक साल में सुक्‍खू ने बहुत से ऐसे फैसले जो वीरभद्र सिंह की तानाशाही वाली रिवायत की याद दिलाते हैं। लेकिन सुक्‍खू को समझना चाहिए था कि वीरभद्र सिंह का प्रदेश में जनाधार था व वह इस जनाधार को बरकरार रखने के लिए हर कदम उठाते  थे।उन्‍हें अपने लाडलों व विरोधियों की पूरी परख थी । सुक्‍खू इन तमाम मामलों में पूरी तरह विफल निकले।

यही नहीं क्रप्‍शन के खिलाफ जंग में तो सुक्‍खू सरकार पूरी तरह से मौन ही हो गई हैं। चुनावों से पहले बनाई गई चार्जशीट कहीं दफन हो गई।

 अब देखना है कि वह दस सीटों वाली मंडी को कब तरजीह देते हैं व किस तरह से मंडी को बीजेपी के वर्चस्‍व से निकालने की मुहिम छेड़ते हैं।