शिमला।परिवहन मंत्री जीएस बाली व उनके बाबूओं की ओर से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का सहारा लेकर परिवहन निगम के कर्मचारियों की हड़ताल रोकने का हथियार बेकार साबित हुआ है। एचआरटीसी के दस  हजार कर्मचारियोंं की हड़ताल के वजह से एक भी बस सड़क पर नहीं उतरी और लोगों को भारी परेशानियोंं का सामना करना पड़ा। अपनी मांगों  को लेकर ये कर्मचारी सोमवार सुबह चार बजे सेे लेकर मंगलवार रात 12 बजे तक हड़ताल पर जाने का एलान किया है।कर्मचारियों ने कहा है कि मंगलवार रात 12 बजे तक एचआरटीसी की एक भी बस सड़क पर नहीं उतरेगी।

उधर, एचआरटीसी प्रबंधन ने एचआटीसी यूनियन को सोमवार  को दोपहर बाद  तीन बजे वार्ता के लिए बुलाया है। इससे पहले भी मंत्री जी एस बाली  व प्रबंधन ने हड़ताली कर्मचारियोंं से हड़ताल न करने का आहवान किया व अदालत में याचिका तक दायर की।

उधर,हाईकोर्ट की ओर से हड़तााल को अवैध ठहराने  के बावजूद पहिए थम जाने पर हाईकोर्ट ने एमडी एचआरटीसी  व प्रधान सचिव परिवहन  को अवमानना नोटिस जारी  कर दिए है।

 

लेकिन हड़ताली कर्मचारियोंं ने अदालत,मंत्री और प्रबंधन की एक नहीं सुनी व राजधानी के मुख्‍य बस अडडे पर सरकार, मंत्री  जी एस बाली व प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

हड़ताल रुकवाने के लिए  अदालतमें याचिका भी दायर की गई  जिस पर हाईकोर्ट ने  हड़ताल को गैरकानूनी भी ठहरा दिया । बावजूद इसके कर्मचारी हड़ताल पर गए और एक भी बस सड़क पर नहीं उतरी।कर्मचारियोंं ने पूरी एकजूटता दिखाते हुए सरकार को मुश्किल में डाल दिया  है।साथ ही अदालत के आदेशोंं को भी ठेंगेंं पर रख दिया। हालांकि ये अदालती  कार्रवाई यूनियन के नेताओं को दबोचने का हथकंडा हो सकता है। लेकिन ये बाद में ही पता चलेगा जब  इसनके खिलाफ कोई कार्रवाई होगी या वार्ता में कोई समझौता  होगा।

उधर आज सोशल वेलफेयर ट्रस्‍ट ने  हाईकोर्ट में हड़ताल  होने पर अवमानना याचिका दायरकर दी जिस पर हाईकोर्ट ने  एचआरटीसी के एमडी व परिवहन विभाग के सचिव कोनोटिस जारी कर जवाब तलब किया हैै। ट्रस्‍ट ने  अदालत  में दलील दी कि हाईकोर्ट ने परिवहन निगम के कर्मचारियों की हड़ताल को अवैध ठहरा दिया था उसके बावजूद हड़ताल कैसे हो गई है।

मंत्री जीएस बाली व कर्मचारियों के बीच एक अरसे से तनातनी चली हुई है। बाली कर्मचारियों को अपने दबाव  में रखना चाहते हैं तो कर्मचारी बाली से दो- दो हाथ करने पर आ गए है।

बड़ी बात ये है कि प्रदेश की  आय का बड़ा कहिस्‍सा टूरिज्‍म से आता है और ये हड़ताल ऐसे समय में हुई हैं जब टूरिज्‍म सीजन पूरे यौवन पर है

ये हैैंं एचआरटीसी कर्मचारियों की मांगें-:

एचआरटीसी कर्मचारी यूनियन एक्‍शन कमेटी  ने अपनी नौ बिंदुओं वाला मांग चार्टर हड़ताल से पहले एचआरटीसी प्रबंधन को दिया था।इसमें पहली मांग एचआरटीसी को रोडवेज  बनाने की है। इसके अलावा एचआरटीसी के कर्मचारियों को पैंशन व अन्‍य देय भतों को अदा करने के लिए बजट का प्रावधान शामिल है।इसके अलावा  इन कर्मचारियों ने प्रदेश में गैरकानूनी  तरीक से चल रहे परिवहन के धंधे को रोकने की मांग भी की थी।ये मांंग वैसी ही है जैसे पंजाब में बादल परिवार के  ट्रांसपोर्ट धंधें को बंद करने  की मांग है।
कर्मचारियों में ठेके पर रखे कर्मचारियों को यूनिफार्म नीति बनाने,एचआरटीसी की हरेक गाड़ी का बीमा कराने,एचआरटीसी में खाली पदों को भरने ,देय भतों को एक मुश्‍त अदा करनेे की मांगे शामिल है।
यही नहीं कर्मचारियों  का 150  करोड़ रुपए का सीपीएफ भी परिवहन निगम ने कहीं और जगह खर्च कर दिया है।हालांकि  बीते रोज मुख्‍यमंत्री वीरभद्र  सिंह ने कहा था कि वो परिवहन निगम की अधिकांश मांगों को मान चुके हें लेकिन  एचआरटीसी यूनियन के साथ इस बावत कोई बात नहीं हुई है।यहां ये महत्‍वपूर्ण है कि वीरभद्र सिंह व बाली में तनातनी रहती है।