शिमला हिमाचल  प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष व भाजपा सांसद  अनुराग ठाकुर  के कारनामे भी मुख्‍यमंत्री  वीरभद्र सिंह  व उनको को कर्ज देने  वाले वक्‍कामूला से कम नहीं है। कम से कम उनकी ओर से खरीदी जमीनों  के दस्‍तावेज व उनकी ओर से चुनाव आयोग के समक्ष दायर किए हलफनामे तो ये ही साबित कर रहे है।

इन कागजातों को खंगाला जाए तो जो तस्‍वीर सामने उभरती है वो चौंकाने वाली है। अनुराग ठाकुर और अरुण धूमल ने  दिसबंर 2007 में प्रदेश में सरकार बनने के बाद शुरू के तीन चार महीनों में ही तीन जगह जमीनें खरीदी।धर्मशाला  में प्रेमु  से दोनों भाइयों ने  जमीन खरीदी।  सरकार ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर रखी है।इसके अलावा अनुराग ने  2008 में ही कुल्‍लू  और बंजार में भी जमीनें खरीदी।जिनमें  कारनामें दिखा रखें है।

भारतीय जनता युवा मोर्चा  के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अनुराग ठाकुर ने 2008  में सांसद बनने के बाद इसी साल अगस्‍त में जिला कुल्‍लू के बंजार तहसील के तांदी फाटी तलोक पुर में 4-10-0 बीघा ज़मीन  खरीदी।

जमीन खरीद के दस्‍तावेजों में अनुराग ठाकुर ने कारनामा दिखाया है। जिस तरह  वीरभद्र  सिंह  के सेब स्‍कूटरों  पर ढोए  गए  दर्शाए गए है उसी तरह उन्‍होंने खुद को कुल्‍लू  का निवासी बताया  हुआ है।। जबकि अनुराग ठाकुर ने 2009 में चुनाव आयोग के समक्ष हलफनामे में साफ लिखा है कि वह हमीरपुर के गांव समीरपुर के रहने वाले है। बड़ा सवाल ये है कि अनुराग आखिर कहां के निवासी है और उन्‍होंने खुद को कुल्‍लू का निवासी क्‍यों बताया।

जमीन खरीद के जिस दस्‍तावेज में उन्‍होंने  खुद को कुल्‍लू  का निवासी बताया है उसे संबंधित अफसरों ने अनुराग का कुल्‍लू  का निवासी होना सत्‍यापित कर रखा।  जिस समय ये सब कारनामे हो रहे थे, अनुराग ठाकुर के पिता  प्रेम  कुमार धूमल  प्रदेश के मुख्‍यमंत्री थे।

अनुराग  ठाकुर कुल्‍लू के निवासी  है ये तथ्‍य तस्‍दीक करने के लिए कुल्लु के बुजुर्ग नेता नवल ठाकुर ने  आरटीआई से जानकारी हासिल की व अनुराग के राशनकार्ड आदि मांगे। लेकिन देश के चाल चरित्र और चेहरे वाली पार्टी के सांसद  के वहां निवासी  होने  के कोई दस्‍तावेज उन्‍हें प्रशासन  ने मुहैया नहीं कराए। उन्‍होंने स्‍पीकर मीराकुमार  के नोटिस में ये वाक्‍या लाया।  मीरा कुमार ने नवल ठाकुर  की शिकायत को प्रदेश सरकार को भेजी ।ये शिकायत कहां गई कुछ पता नहीं है। दस्‍तावेजों  में अनुराग  खुद को कभी जालंधर  तो कभी हमीरपुर का निवासी बताते  रहे है। इस दस्‍तावेज में कुल्‍लू  का निवासी बताया गया है।  हो सकता है कोई और दस्‍तावेज  मिल  जाए उसमें वो कहीं  और के भी  निवासी हो सकते है।

भाजपा  सांसद के कारनामें यही नहीं रुके है।इस जमीन पर एक मकान भी बना हुआ था और 2008 में जमीन की  बाजार कीमत 10,28,000 रूपये रिकार्ड पर दर्ज है। स्टांप डयूटी भी 10,28,000 रूपये पर ही अदा की गयी है। लेकिन जमीन मालिक को इसकी कीमत  केवल  दो लाख रुपए अदा की गई है।जब ये कीमत अदा  की गई तो अनुराग सांसद थे और उनके पिता मुख्‍यमंत्री  थे। जमीन मालिक  को कुल दो लाख रुपए क्‍यों अदा किए गए  इसका  राज किसी को पता नहीं है। कायदे से तो मुख्‍यमंत्री के सांसद पुत्र को  जमीन मालिक को बाजार  कीमत से ज्‍यादा पैसे देने चाहिए थे। ताकिजो व्‍यक्ति  मजबूरी में अपनी जमीन बेचने को  तैयार  हुआ हो  उसे अच्‍छे  पैसे मिलते। ये जगजाहिर है कि किसान मजबूरी  में ही अपनी जमीन बेचते है और लैंड माफिया उनकी मजबूरी का फायदा उठाते है।यहां क्‍या  हुआ होगा ये पता  नहीं है।

2009 में अनुराग ने फिर हमीरपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और तब जो शपथ पत्र दायर किया गया उसमें इस जमीन  की एक साल में ही बाजार कीमत बढ़ी हुई दर्शाई  गई।  ये 11,52,809 रुपए हो गई।

बंजार के अलावा क्रिकेट  का खेल  खेलने  वाले  खिलाड़ी  अनुराग  ठाकुर ने 2008 में  ही कुल्‍लू में भी जमीन खरीदी। चुनाव आयोग के समक्ष दायर हलफनामें में इस जमीन  की कीमत 23,41,170 रूपये दर्शायी गयी है। अनुराग ने 2009 में भी लोकसभा का चुनाव लड़ा और  20 अप्रैल 2009 को चुनाव आयोग को दिए हलफनामे  में  इसकी कीमत 19,56,764 रुपए दर्शाई  गई है। इस भाजपा सांसद के साथ  यहां  बुरा  हुआ  । इसकी जमीन  की कीमत ही घट  गई।जबकि दूसरी ओर  अरुण धूमल,अनुराग धूमल  व प्रेम  कुमार धूमल की माने तो वीरभद्र ने अपनी जो रिवाइज्‍ड आयकर रिटर्नें  भर कर दी उसमें उनकी आय  कई गुना बढ़ गई। ये हैरतअंगेज है कि इस जमीन की कीमत कम कैसे हो गई। रियल एस्‍टेट  की दुनिया में जमीनों की कीमतें आसमान  छू  रही थी लेकिन पूर्व मुख्‍यमंत्री के इस सांसद लाडले की जमीनों की कीमतें घट गई। अगर कीमत घटी  नहीं  तो चुनाव आयोग  में दायर हलफनामे में वीरभद्र सिंह  व उनकी  पत्‍नी  की तरह ही अनुराग  ने भी गलत जानकारी  दी गई है।

अनुराग  के नाम एचपीसीए को सोसायटी से कंपनी बनाने का कारनामा  पहले ही सुर्खिया बना हुआ है और इस कंपनी के नाम सरकार  की ओर से सोसायटी को एक रुपए लीज पर दी गई जमीन कराने का मामला भी विजीलेंस के पास है।

बंजार में 10लाख 28 हजार रुपए  की संपत्ति अनुराग को  दो लाख में कैसे मिल गयी। ज़मीन मालिक को अपनी ज़मीन की सही कीमत का अंदाजा न हो  ये बात भाजपाई  भी मानने  को तैयार नहीं है।बड़ा  सवाल ये है कि क्‍या राजनीतिक दवाब डालकर  अनुराग ने 10 लाख 28 हजार रुपए की ये जमीन केवल दो लाख रुपए खरीद ली। या कुछ और खेल हुआ है। ज़मीन मालिक नूप राम ने एक मुख्यातर डोला राम के माध्यम से यह ज़मीन बेची है। ऐसे में यह कतई नहीं माना जा सकता कि अनुराग और संबंधित राजस्व अधिकारियों ने नूप राम और डोला राम को आसानी से मूर्ख बना दिया हो। बड़ा सवाल ये भी है कि  क्‍या इस खरीद में  जमीन मालिक  को बाकी पैसा ब्लैक में दिया गया है क्योंकि मालिक को तो पूरी कीमत मिलने तक वास्ता था और उसे इसकी जानकारी बहुत संभव है न रही हो कि बाकी पैसा ब्लैक में दिया जा रहा हो। अनुराग के कुल्‍लू में कोई रिश्‍तेदार मामा,मौसी भी नहीं

सोलन जिले के कई भागों से ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जहां पर मालिकों को एक तरह से लूटा गया है या फिर पैसा ब्लैक में दिया गया है। लेकिन विजिलैंस ऐसे मामलों की  जांच करने का साहस नहीं कर पा रहा है। जहां एक सांसद जिसका पिता सूबे का मुख्यमंत्री और ससुर राजस्व मंत्री रहा हो इस तरह की खरीद में सीधे लिप्त हो वहां पर किसी भी जांच का साहस कोई कैसे कर पायेगा।

कारनामें दिखाने में देश भर में नेताओं का कोई सानी नहीं है। ऐसे में हिमाचल  के नेता भला  पीछे कैसे रह सकते है।