शिमला। पीजीआइ चंडीगढ़ में डिप्टी डायरेक्टर (प्रशासन) व हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा के 2000 बैच के अधिकारी पंकज राय की ओर से हिमाचल स्टेट इलैक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के अध्यक्ष पद पर तैनाती की प्रक्रिया पर हिमाचल हाईकोर्ट से लिए स्टे को सुक्खू सरकार हटवा नहीं पाई है। ये स्टे 11 दिसंबर को मिला था।अदालत ने सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब दायर करने के लिए नोटिस जारी किए थे। लेकिन दो सप्ताह के भीतर सरकार इस मामले में जवाब ही दायर नहीं कर पाई। सरकार ने आज सुनवाई के दिन ही जवाब दायर किया।
एजी आफिस के सूत्रों पर भरोसा किया जाए तो इस मामले को लेकर एजी आफिस में फाइल ही नहीं मिली तो दूसरी बार फाइल तैयार करवानी पड़ी।
इस मामले में आज यानी 30 दिसबंर को सुनवाई हुई और जस्टिस विवेक ठाकुर और जस्टिस रोमेश वर्मा ने पांच जनवरी 2026 को बहस सुनने के लिए तारीख रख दी है।
ये रहा आज का आदेश
| Pankaj Rai vs. State of H.P. & Ors. 30.12.2025 Present :Mr. Shrawan Dogra, Senior Advocate with Mr. Tejasvi Dogra, Advocate, for the petitioner. Mr. Rajiv Atma Ram, Senior Advocate with Mr. Ramakant Sharma & Mr. Shalabh Thakur, Additional Advocate Generals and Ms. Swati Draik, Deputy Advocate General, for the respondents-State.As prayed, reply is permitted to be filed during the course of the day. Rejoinder thereto, as prayed, be filed within three days. List for consideration on 05.01.2026.(Vivek Singh Thakur) Judge (Romesh Verma) Judge 30th December, 2025 |
हैरानी की बात ये है कि प्रदेश हाईकोर्ट में महाधिवक्ता व अतिरिक्त व उप महाधिवक्ताओं की बड़ी टीम होने के बावजूद सुक्खू सरकार ने इस मामले की पैरवी करने के लिए 20 लाख में बाहर से वकील तैनात किया है।हालांकि ऐसा करना सरकार के क्षेत्राधिकार में है लेकिन छोटे-छोटे व रूटीन के मामलों में भी महाधिवक्ताओं की टीम होने के बावजूद अगर इतने बड़ी फीस पर पैरवी कराई जाने लगेगी तो तमाम तरह के सवाल तो उठेंगे ही है।
सरकार के भीतरी सूत्रों व दस्तावेजों के मुताबिक इस मामले की पैरवी के लिए सुक्खू सरकार ने वकील की 20 लाख की फीस मंजूर की है।बाहर से वकील आएंगे तो वो फीस तो लेंगे ही । वीरभद्र सिंह और धूमल के शासन काल में भी बाहर से नामी वकील पैरवी के लिए किए जाते थे लेकिन वो बड़े मामले होते थे। अब बिजली नियामक बोर्ड में अध्यक्ष की तैनाती का मामला सामान्य मामला है।
याद रहे मुख्यमंत्री खुद कहते रहे है कि प्रदेश आर्थिक संकट से गुजर रहा है । यही नहीं विश्वविद्यालयों में समय पर वेतन व पेंशन नहीं दी जा रही है। जबकि रूटीन के मामलों में भी बाहर से महंगे वकील किए जा रहे है। जबकि सरकार ने पहले की काबिल महाधिवक्ता व दर्जनों उप महाधिवक्ता तैनात किए हुए है।
ये है मामला
सुक्खू सरकार ने 14 अगस्त 2025 को हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष की तैनाती के लिए विज्ञापन निकाला था।
इस पद के लिए IAS पंकज राय ने भी आवेदन कर दिया।चयन समिति ने 14 सितंबर 2025 को हुई चयन समिति की बैठक में इस पद के लिए दो सदस्यों के नामों की सिफारिश कर दी लेकिन बाद में सुक्खू सरकार ने इन दोनों ही नामों में से किसी की भी नियुक्ति अध्यक्ष के पद पर नहीं की।
सरकार ने इस चयन प्रक्रिया को रदद कर दिया। सरकार ने दलील दी कि the selection process to the post of Chairperson has been cancelled by raising finger with
respect to suitability of the petitionerयानी पंकज राय।
इसके खिलाफ पंकज राय ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया और कहा कि उनने 3000 के करीब मामले विभिन्न पदों पर रह कर निपटाएं है। वो बी डीओ से लेकर डीसी, निगमायुक्त तक के पद पर रहे है।
इस पद के लिए उनकी suitability पर अंगुली उठाना कानूनन तो गलत है ही साथ तथ्यों के भी विपरीत है।
11 दिसंबर को इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने सुक्खू सरकार को इस पद को दोबारा पुनर्विज्ञापित करने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
सरकार के भीतरी सूत्रों पर भरोसा किया जाए तो सुक्खू सरकार इस पद पर अपने किसी लाडले को तैनात करना चाहती थी लेकिन किसी करणवश जब तैनाती नहीं हुई तो सरकार ने ये चयन प्रकिया ही रदद कर दी।
अब मामला दिलचस्प हो गया है । अब पांच जनवरी को देखा जाना है कि इस मामले में क्या होता है। अभी तक बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष पद की तैनाती का काम रुका ही हुआ है।
इससे पहले सुक्खू सरकार ने रेरा के अध्यक्ष पद को लेकर भी कई कुछ हेरफेर किया था लेकिन हाईकोर्ट ने जब पांच लाख का जुर्माना लगाया तो सरकार को होश आया था।
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