शिमला।सुप्रीम कोर्ट ने पावर कारपोरेशन के तत्‍कालीन चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्‍यम मौत मामले में सीबीआइ जांच की बखिया उधेड़ दी और सीबीआइ पर तमाम तरह की मौखिक टिप्‍पणियां कर दी। अदालत ने कहा कि सील्‍ड कवर में जो रपट पेश की गई है उसमें एक भी कंकरीट सबूत का हवाला नहीं हैं।

तमाम तरह की टिप्‍पणियां करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में  आरोपी कारपोरेशन के तत्‍कालीन निदेशक इलेक्ट्रिक्‍ल देशराज की नियमित जमानत का रास्‍ता साफ कर दिया।

अदालत ने कहा कि देशराज को निचली अदालत में सरेंडर करना होगा या उसे गिर फतार किया जाता है तो उसे निचली अदालत को जमानत देनी होगी । इसके लिए अदालत ने तीन सप्‍ताह का समय दे दिया।

 

 

बीते रोज यानी 17 नवंबर को देशराज की जमानत याचिका पर न्‍यायमूर्ति अहसनुदीन अमानुल्‍लाह और न्‍यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

 

देशराज की ओर से पैरवी करते हुए दलील दी गई कि देशराज को सीबीआइ ने तीन घंटों तक इंटेरोगेट कर किया गया लेकिन सूसाइड अबेटमेंट को लेकर कुछ भी नहीं पूछा गया।

सीबीआइ की ओर से हिमाचल के तत्‍कालीन अतिरिक्‍त मुख्‍य सचिव गृह ओकार शर्मा की रपट की आड़ ली। इसके बाद विमल नेगी  के शव से निकाले पैन ड्राइव जिसे एएसआइ पंकज ने निकाल लिया था और उसे फार्मेट कर दिया था का हवाला भी दिया। इस पर अदालत ने कहा कि इस बावत सीबीआइ की जांच रपट में क्‍या उल्‍लेख किया गया है।

 

अदालत ने पूछा कि कहा कि इसे आत्‍महत्‍या को उकसाने वाला कैसे बताया जा सकता है। जस्टिस अमानुल्‍लाह ने ये भी पूछा कि लोकल पुलिस से कितने दिन बाद सीबीआइ के सुपुर्द इस मामले को कर दिया गया था।

सीबीआइ की ओर से कहा गया कि लोकल पुलिस की जांच को लेकर विमल नेगी की पत्‍नी ने इल्‍जाम लगाया था कि जांच सही दिशा में नहीं  हो रही है।

सीबीआइ ने अपनी रपट में ये भी दलील दी थी कि देशराज जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। अदालत ने कहा कि ये बहुत ही ‘वेग’ यानी ये साधारण इल्‍जाम है।

सीबीआइ की सील्‍ड कवर रपट को देखने के बाद जस्टिस अमानुल्‍लाह ने कहा कि ये चाइल्डिश है।

उन्‍होंने सवाल किया कि इंवेस्टिगेटर कौन है। आरोपी से किस तरह के सवाल पूछे गए। अब कहा जा रहा है वो जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। क्‍या जमानत के लिए अर्जी देना उसका अधिकार नहीं है।

अदालत ने टिप्‍पणी कर दी की सीबीआइ में किस तरह के अफसर है। पूरी तरह से बोगस अफसर है। ये सीबीआइ में सर्विस के लिए फिट नहीं है।

इस बीच सीबीआइ की ओर से दोबारा से ओंकार शर्मा की रपट का हवाला देने की कोशिश की लेकिन अदालत ने कहा कि ये इल्‍जाम महज अनुमान है।कोई कंकरीट सबूत नहीं हैं। आप रपट में देख लीजिए।

जस्टिस अमानुल्‍लाह ने कहा कि सीबीआइ इस मामले में हमारे सामने एक्‍सपोज हो गई है।नार्मल पुलिस इससे बैटर जांच करती है।हम अफसर पर कमेंट करेंगे। ‘इट शोज थोरो इनकंपीटेंस ऑफ अफसर। अफसर कौन है।  सामने आओ।क्‍या ये सीबीआइ के अफसर का न्‍यूट्रल रोल है।ये आपके बारे में वाल्‍यूम में बोलता है। आपको डिसमिस किया जा सकता है। क्‍या ये राजनीति है।

इस रपट में एक भी पैराग्राफ नहीं है जिसमें सबूत का जिक्र हो। आरोपी प्रताडि़त कर रहा था, यही लिखा है। ये वेग स्‍टेटमेंट है। बर्दाश्‍त करने की भी एक सीमा है। हर बार एक जैसी ही रपट होती है।

अभी भी रपट में यही लिख रहे है कि हम हर एंगल से जांच कर रहे है और इनकी अभी भी जांच चल रही है। ये राजनीति खेल रहे है। ऐसे जांच कर्ता को तो निलंबित कर देना चाहिए।

अदालत ने सीबीआइ के जांच अधिकारी से पूछा कि कितनी उम्र हो गई है सीबीआइ में और आपकी कंपीटेंस का ये लेवल है।’शर्मानाक’। इट शोज द थोरो इनकंपीटेंस।ट्राइंगि टू द गैलरी।यही वजह है सीबीआइ यहां तक पहुंच गई है और कोई भी तुमको ट्रस्‍ट नहीं करता है।

अदालत ने टिप्‍पणी की कि ये क्‍या लिखा है कि जांच अभी भी जारी है। इससे बेतर तो लोकल पुलिस और एसएचओ जांच कर लेता है।आप केवल टारगेट करना चाहते है क्‍योंकि ऐसाा करने में तुम्‍हरारी कोई कंपल्‍शन है।

जस्टिस अमानुल्‍लाह ने कहा कि वो जानते हैं कि सीबीआइ बेहतरीन आर्गेनाइजेशन है और वहां पर शानदार सिस्‍टम हैं। लेकिन इस केस में सब कुछ तबाह कर दिया गया है।

सीबीआइ की ओर से कहा गया कि इस मामले में रिश्‍वत को लेकर टिप्‍पणी की गई है तो अदालत ने पूछ लिया कि रपट में क्‍या सीबीआइ ने इस पर कोई टिप्‍पणी की है।मुझे तुम्‍हारी आर्गेनाइजेशन यानी सीबीआइ पर टिप्‍पणी करनी चाहिए।

इसके बाद अदालत ने सील्‍ड कवर में पेश जांच रपट को सीबीआइ को वापस कर दिया और आदेश दिए कि आरोपी की अंतरिम जमानत को नियमित किया जाता है। वो निचली अदालत में तीन सप्‍ताह के भीतर आत्‍मसमर्पण करने या उसे गिर फतार करने पर निचली अदालत उसे नियमित जमानत दे। अगर वो अदालत की शर्तों का उल्‍लंघन करता है तो उसकी उसकी जमानत को रदद किया जा सकता है।

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