शिमला। केंद्र की मोदी सरकार में गजब के मंत्री नितीन गडकरी के एनएचएआइ यानी राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्रधिकरण के अफसरों ने हिमाचल के किसानों का प्रदेश भर में जीना मुहिाल कर रखा है। कहीं जमीनें तबाह कर दी है तो कहीं अवैध डंपिंग से पानी के प्राकृतिक स्रोत, रास्‍ते, खडडे, कूहलें व खेत तबाह कर दिए है।

कहीं पर फोरलेन के लिए ऐसी कटिंग की कि किसानों के बने बनाए मकान हवा में टंग गए हैं।

किसानों ने इस तरह के तमाम खुलासे प्रदेश किसान सभा की ओर से सरकाघाट में फोरलेन प्रभावितों के मामले पर 12 नवंबर को आयोजित राज्‍य स्‍तरीय अधिवेशन में किए।

सरकाघाट के कोटली गांव के मेहर सिंह ने अपनी व्‍यथा साझा करते हुए कहा कि एनएच के लिए उनकी जमीन ली गई। उनकी जमीन पर अवैध तौर पर खनन कर दिया गया ।

अब पिछले तीन सालों से पटवारी ने उन्‍हें काम पर लगा रखा है और तीन सालों से निशनदेही नहीं हो रही है। उनको अब तक मुआवजा नहीं मिला है।मेहर सिंह ने एनएचएआइ के अफसरों पर धमकाने तक का इल्‍जाम लगगा दिया।

उधर,हमीरपुर से आए रंजन ने तो सीधे -सीधे केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को ही कठघरे में खड़ा कर दिया । रंजन ने कहा कि हमीरपुर में एनएचएआइ ने तबाही मचा रखी है । वहां किसानों की आवाज उठाने के लिए कोई संगठन भी नहीं हैं। रंजन ने कहा कि हमीरपुर में कुठेड़ा से आगे बन रहे फोरलेन बनाने वाली कंपनी के अफसर साफ कहते है कि वो किसी से नहीं डरते।

संगरोह गांव में इस कंपनी ने 20 के करीब खातरियां बर्बाद कर दी। विक्रम सिंह बकरियां दब कर मर गई थी। उनका मुआवजा अब तक नहीं मिला है। लोग के खेत व घर बर्बाद कर दिए गए ।

 

सरकाघाट के टिकरी गांव के रणजीत ने कहा कि उनकी जमीन डंपिंग के लिए ली थी। इस बावत एग्रीमेंट भी बना लेकिन अब कंपनी इस एग्रीमेंट को ही नहीं मान रही। कंपनी डीसी तक की नहीं मान रही।दो कुंए बर्बाद हो गए। जदराली से 164 नामक स्‍थान तक दो-दो तीन गांवों की जमीनें तबाह कर दी गई है।सारा पानी एक ही जगह डाल दी। बरसात में  सारी मिटटी पानीके साथ बह गई।

 

सरकाघाट के गलोट गांव के जीतराम ने कहा कि जो जमीन अधिग्रहित की उसके साथ की जमीन को तबाह कर दिया।अब इसका मुआवजा नहीं मिल रहा है। हमारे गांव में संगाह यानी सीढ़ी लगाकर  बुजुर्ग व बाकी लोग रास्‍ते पार कर रहे है। दस दिन के भीतर रास्‍ता ठीक करने का भरोसा मिला था आज दस महीने बाद भी कुछ नहीं हुआ है।

सरकाघाट की रखोह पंचायत के बृजलाल ने कहा कि जहां बुर्जी लगी थी उसके आगे काम कर दिया। जबकि बुर्जी से आधे फुट आगे तक काम नहीं हो सकता। चार साल उनकी दुकानें उखाड़ रखी है।उन्‍होंने कहा कि उनके घर के आगे दो बुर्जियों में से एक को उखाड़ दिया गया है।गऊशाला के साथ मिटटी फेंक दी है। जहां नाला था वहां कल्‍वट नहीं बनाई ।

सिरमौर से आए जीवन सिंह ने कहा कि जिला में मजदूरों की मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है।फोरलेन और हाइवे के निर्माणा की वजह से आ रही दिक्‍कतों को लेकर लोगों ने वहां पदयात्रा भी की थी लेकिन कुछ नहीं हुआ।

शिमला से गए वाइ डी शर्मा ने कहा कि किसानों की जमीनें अधिग्रहित की गई लेकिन जो दो -तीन विस्‍वा जमीन बची वो अब किसानों के किसी काम की नहीं है। अस्‍सी मीटर का डंगा लगना था। एनएचएआई ने दस मीटर का डंगा लगाकर अपनप काम समाप्‍त कर दिया।पिछली बार लोगों को रातों रात अपना बोरिया बिस्‍तर ले के अपने घरों से जाना पड़ा । कहीं कोई डंपिंग साइट नहीं है।

सोलन से आए अशोक कुमार ने परवाणु से केथलीघाट तक बने फोरलेने की दौरान किसानों के साथ हुए धक्‍के का जिक्र किया। उन्‍होंने कहा कि कहीं घर टूट गए तो कहीं घरें में दरारें आ गई।मुआवजे को लेकर दस बार डीसी से मिल चुके है । कहीं कुछ नहीं हो रहा है। सलोगड़ा में 2017 में प्राइमरी स्‍कूल की बिल्डिंग तबाह हो गई थी इसका निर्माण आज तक नहीं हुआ है। यहां डेढ सौ के करीब बच्‍चे है  व कक्षाएं मंदिर के कमरे में लग रही हैं। सनावरा में टोल प्‍लाजा से पैसे की उगाही लगातर हो रही है।

कुल्‍लू से आए अंगद ने कहा कि फोरलेन के लिए 2018 में लोगों के मकान व जमीनें चली गई।आंदोलन भी किए लेकिन हाथ सिर्फ निराशा लगी। बरसात में खुब तबाही मच चुकी है । जहां नाले थे वहां कल्‍वटें नहीं बनाई। पानी किसानों के खेतों में चला गया।

 

किसानों की तमाम तरह की व्‍यथाएं है लेकिन न तो केंद्र की मोदी सरकार और न ही एनएचएआइ और ही सुक्‍खू सरकार किसानों की सुध ले रही है। अब मजबूरन आंदोलन की राह पर चलना पड़ रहा है।