शिमला। जिला के कुपवी के जंगल में होली के दिन वन भूमि से सड़क निकालने के लिए दिन दहाड़े बुलडोजर चला दिया गया । स्‍थानीय लोगों ने इस तरह वन विभाग की भूमि से बिना विभाग की मंजूरी के इस चल रहे बुलडोजर का वीडियो बना दिया और कुपवी से लेकर शिमला तक पहुंचा दिया।

स्‍थानीय स्‍तर पर जब वन विभाग की टीमें नहीं जागी तो लोगों ने इस वीडियो को प्रदेश वन विभाग के मुखिया समीर रस्‍तोगी तक पहुंचा दिया। चूंकि वीडियो बाहर आ चुका था तो वन विभाग के मुखिया भारतीय वन सेवा के अधिकारी रस्‍तोगी ने मौके पर वन विभाग की टीम भेज दी। संवभत: उन्‍हें रपट भेजी जाएगी।

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इस बावत इस वीडियो को अतिरिक्त मुख्‍य सचिव  वन के के पंत को भेजा गया लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। लेकिन वन विभाग के मुखिया समीर रस्‍तोगी ने कहा कि मौके के लिए टीम भेज दी गई है व टीम मौके पर पहुंच गई है। मौके पर क्‍या कार्रवाई की गई इस बावत अभी जानकारी नहीं मिली हैं।

वीडियो में बताया जा रहा है कि चटटानों को काटने के लिए कंप्रेसर भी इस्‍तेमाल की जा हरी है और जो पेड़ उखाड़े जा रहे है उनके स्‍लीपर बनाए जा रहे है। स्‍लीपरों का ढेर भी वीडियो में दिखाई दे रहा हैं।

महत्‍वपूर्ण ये है कि ये वन विभाग का महकमा मुख्‍यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्‍खू के अधीन हैं और उनके अधीन विभागों में तमाम तरह के कारनामें हो रहे हैं। पिछले कुछ दिन पहले ही जुब्‍ब्‍ड़हटटी के समीप एक गांव में कई दर्जन पेड़ काट दिए गए थे। लोगों ने शिकायत की तो वन विभाग ने अब निशानदेही के लिए राजस्‍व विभाग को लिख दिया हैं। लेकिन पेड़ काट ही दिए है उस बावत कोई कार्रवाई अभी नहीं हुई हैं।

याद रहे ऊपरी शिमला में इसी तरह वन विभाग की अनदेखी व मिलीभगत के वजह से सैंकड़ों बीघा वन भूमि से देवदार के पेड़ काट कर वहां पर सेब के बगीचे लगा दिए गए ।साफ है वन विभाग वनों के बचाने में नाकाम रहा हैं । यही नहीं जिला कुल्‍लू  के कसोल व बाकी इलाकों में भी लोगों और तस्‍करों ने वन भूमि से पेड़ काट कर वहां पर कई बीघा जमीन पर भांग की खेती शुरू की हुई हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर लंबी कानूनी कार्यवाही चल रही हैं।

याद रहे बीते दिनों मुख्‍यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्‍खू यहीं कुपवी में रात को ठहरे थे वहां पर मुर्गा कांड सूर्खियों में आ गया । इस बावत मीडिया वालों के खिलाफ ण्‍क एफआइआर भी दर्ज की गई है। अब मीडिया वालों के खिलाफ एफआइआर करना तो एक चलन ही हो गया है।लेकिन कानून की धज्जियां उड़ाने वाले पूरी तरह सुरक्षित नजर आते हैं।

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