शिमला।अदालत के आदेश से पहले ही ऊना पुलिस ने कांग्रेस नेता और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनके जुंडली के खिलाफ सीबीआइ व ईडी में शिकायत दर्ज करने वाले युद्ध चंद बैंस की शिकायत पर कांगड़ा सेंट्रल को आपरेटिव बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक और मौजूदा प्रशासक आइएएस अफसर विनोद कुमार समेत बैंक के आठ अफसरों के खिलाफ धारा 420 और 120 बी के तहत मामला दर्ज कर दिया है। इनमें दो महिला अफसर भी शामिल है।
केसीसी बैंक के निदेशक मंडल को सुक्खू सरकार ने अरसा पहले भंग कर दिया था और आइएएस विनोद कुमार को इसका प्रशासक नियुक्त किया गया है।इस एफआइआर के दर्ज होने से सुक्खू सरकार और विजीलेंस में हड़कंप मच हुआ है। ये एफआइआर ऊना पुलिस को बीती रात को दर्ज करनी पड़ी । वो भी तब जब ऊना सीजेएम की ओर से आदेश आने का अंदेशा हो गया था।
एफआइआर बैंक की फाइलों से कर्ज की एवज में गिरवी रखी संपति के वैल्यूएशन के कागजात गायब करने के इल्जाम की जांच करने को लेकर दायर की गई है।
इन अफसरों के नाम FIRमें शामिल
एफआइआर में जिन अफसरों के नाम दर्ज है उनमें आइएएस अफसर और बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक और मौजूदा प्रशासक विनोद कुमार,महाप्रबंधक राकेश शर्मा,डीजीएम रिकवरी के सी भारदवाज,(भारदवाज को सुक्खू सरकार ने बीते दिनों बर्खास्त कर दिया था।)एजीएम वीनू शर्मा,सतीश कुमारी के अलावा सुरजीत राणा,दिनेश शर्मा और बाबू राम शामिल हैं।
ये हैं मामला
याद रहे कि बैंस ने अपने होटल के निर्माण के लिए केसीसी बैंक से लोन लिया था व इसकी एवज में करोड़ों की संपति गिरवी भी रखी थी। इस संपति की वैल्यू के कागजात भी उनने बैंक में जमा कराए थे। गिरवी रखी संपति की ये वैल्यू लिए लोन से कहीं ज्यादा थी।
बैंस ने शिकायत में कहा कि वो मैसर्स होटल हिमालयन स्नो मनाली और मैसर्स होटल लेक पैलेस ,मंडी नालस्र के मालिक है व इन दोनों की होटलों की वैल्यूएशन मैसर्स शारदा आर्किटेक्टस एंड बिल्डर्स, पुरानी मंडी की ओर से की गई थी। इनकी वैल्यूएशन क्रमश: 166.53 करोड़ रुपए और56.36 करोड़ रुपए आंकी गई थी जबकि उनने बैंक से 20 करोड़ के करीब कर्ज लिया था।
याद रहे बीच में मुख्यमंत्री सुखविदंर सिंह सुक्खू सरकार ने सता में आने पर इस मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी । इधर, बैंस ने सुक्खू व उनकी जुंडली पर उनकी संपति को हड़पने और उनसे रिश्वत लेने के इल्जाम ही नहीं लगाए बल्कि ईडी और सीबीआइ में शिकायत भी दर्ज कर दी।
बैंस के इस कदम के बाद सुक्खू सरकार ने बैंस के लोन मामले की फाइल खोल दी और विजीलेंस में विभिन्न धाराओं के तहत एफआइआर दर्ज कर दी। लेकिन बैंस को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और सुक्खू सरकार की विजीलेंस उन्हें अरेस्ट नहीं कर पाई ।/
ये दीगर है कि सुक्खू सरकार ने अब इस जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रखा है। लेकिन उनकी लोन फाइल में से दस्तावेज गायब हो जाने के बाद अब मामला संदिग्ध हो गया है।
जब ये मामला बैंक के नोटिस में आया तो बैंक के तत्कालीन एमडी आदित्य नेगी ने इसकी जांच करा दी व आधा दर्जन से ज्यादा बैंक अफसरों को शो कॉज नोटिस भेज दिया था।
इस पर बैंस ने इस मामले में सुक्खू सरकार की पुलिस से एफआइआर दर्ज कर कागजात गायब करने वाले अफसरों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की गुहार लगाई लेकिन गुहार अनसुनी कर दी तो बैंस ने धारा 156/3 के तहत ऊना की अदालत में एफआइआर दर्ज करने की मांग को लेकर अर्जी दायर की थी। बीते रोज इस मामले की सुनवाई हुई । सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक तौर पर कहा था कि या तो पुलिस एफआइआर दर्ज कर दें या फिर एसएचओ को अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।
शाम होने तक पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर दी। वहीं आज दोपहर को ऊना पुलिस ने शिकायत कर्ता युद्धचंद बैंस के ब्यान भी दर्ज कर लिए ।
बताते है कि आज सुबह से ही ऊना थाने के फोन दिन भर घनघनाते रहे ।केसीसी बैंक के पूर्व एमडी व मौजूदा प्रशासक आइएएस विनोद कुमार सुक्खू सरकार के लाडले अफसरों में शुमार है।कहा जाता है कि वो मुख्यमंत्री की विधायक पत्नी कमलेश ठाकुर के स्कूल -कॉलेज के समय के सहपाठी रह चुके है और अगले दो-तीन महीने बाद सेवानिवृत होने वाले हैं।
युद्ध चंद बैंस ने इस मामले में एफआइआर दर्ज कराने के लिए चार नंवबर को शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन मामला टॉस होता रहा तो बैंस ने अदालत का दरवाजा खटखटा दिया।
अब मामला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। कहा जा रहा है कि बैंस इस मामले की जांच को लेकर प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते है। क्योंकि उन्हें अंदेशा है कि सुक्खू सरकार की पुलिस इस मामले की निष्पक्षता से जांच नहीं करेगी।ऐसे में वो मामले की सीबीआइ जांच की मांग को लेकर विधिवेताओं से सलाह मशवरा करने में लगे है।
KCC Bank Loan कांड: सुक्खू सरकार में लोन केस के कागजात फाइलों से गायब,FIR के लिएअदालत से गुहार
KCC Bank loan FIR में जांच में सहयोग नहीं कर रहा आरोपी बैंस,जमानत रदद करने की मांग,
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