शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के लाडले कैबिनेट रैंक पर्यटन निगम व पर्यटन विकास बोर्ड के अध्यक्ष व नगरोटा बगवां से कांग्रेस विधायक रघुवीर सिंह बाली की पत्नी के नाम पालमपुर में जिस होटल की खरीद की थी उसकी कीमत यानी वैल्यू 2016 में 22 करोड़ तक पहुंच गई थी लेकिन सुक्खू राज में न जाने क्या हुआ कि इस होटल की कीमत करीब नौ साल बाद 2025 में घट कर 21 करोड़ रह गई। इस होटल की ये वैल्यूएशन जब भी करवाई गई वो कांगड़ा सेंट्रल बैंक की ओर से ही करवाई गई।
इस होटल की वैल्यूएशन का ये तामझाम मंडी से कांग्रेस नेता होटलियर युद्ध चंद बैंस की ओर ये दायर आरटीआई के बाद सामने आया है। मुख्यमंत्री के अधीन इस बैंक ने आरटीआइ के तहत ये जानकारी अपील में जाने के बाद दी। ये दीगर है कि देश में आरटीआइ कानून कांग्रेस राज में ही लागू हुआ था ।
याद रहे केसीसी बैंक से युद्ध चंद बैंस ने भी अपने होटलों के लिए कर्ज लिया था जिसकी वैल्यू बैंक ने 2017 में 75 करोड़ लगाई बाद में 2022 में उसे घटा 15 करोड़ कर दिया। वैाल्यूएशन का ये गड़बड़झाला हो कैसे सकता है, इस पर से अभी तक पर्दा नहीं उठ पा रहा हैं। बैंस के मामले में तो वैल्यूएशन के दस्तावेज ही केसीसी बैंक ने फाइलों से गायब कर रखे है। जिस बावत ऊना थाने में केसीसी बैंक के मौजूदा प्रशासक व तत्कालीन एमडी समेत आठ अफसरों के खिलाफ एफआइआर दर्ज हैं।
बहरहाल बाली की पत्नी के नाम खरीदे गए इस होटल की ये वैल्यू नौ साल बाद घट कैसे गई इस रहस्य पर से तो ईडी भी पर्दा नहीं उठा पा रही है जबकि ईडी ने केसीसी बैंक से कई कागजात मंगवा लिए हैं। यहां बड़ा मसला ये है कि प्रदेश में बैंक जो पहले सहकारिता विभाग के अधीन होते थे वो अब मुख्यमंत्री सुक्खू ने खुद अपने अधीन लिए हुए हैं।
पहले बाली की पत्नी के नाम से खरीदे इस होटल पर ये खुलासा
याद रहे बाली परिवार ने यह होटल कांगड़ा सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक की ओर की लाई गई ओटीएस स्कीम को निपटाते हुए खरीदा था। पालमपुर में स्थित आर एस सरोवर पोर्टिको नाम के इस होटल के पूर्व मालिकों ने केसीसी बैंक से इस होटल के लिए कर्ज लिया था। लेकिन वो इस कर्ज को लौटा नहीं पाए। तो उनने वन टाइम सेटलमेंट के तहत इस कर्ज मामले को सेटल करने का रास्ता अख्तियार किया।
इसके लिए होटल की वैल्यू का आकलन जरूरी था तो केसीसी बैंक ने होटल का आकलन करवाया।जिसकी बैंस ने आरटीआइ के तहत जानकारी मांग ली। याद रहे बैंस और सुक्खू के बीच अरसे से आपस में तनातनी चल रही है।
हैरान करना वाला है खुलासा
9 जनवरी को बैंक की ओर से मुहैया करवाई गई आरटीआइ में जो खुलासा किया गया है वो हैरान करने वाला ही नहीं बल्कि कई सवाल खड़ा करने वाला भी है।
केसीसी बैंक की ओर से कहा गया है कि 2013 में जब इस होटल के लिए जब पूर्व मालिकों के कर्ज को मंजूरी दी गई थी तो इस होटल की मार्किट वैल्यू 7 करोड़16 लाख 49 हजार रुपए थी। 2014 में ये वैल्यू बढ़कर10 करोड़ 9 लाख 89 हजार रुपए हो गई।जबकि 2015 में ये 14 करोड़ 96 लाख 70 हजार और 2016 में इस होटल वैल्यू में बड़ा उछाल आ गया ये वैल्यू 22 करोड़ 1 लाख 20 हजार रुपए तक पहुंच गई।
इसके बाद 2019 में इस होटल की वैल्यू कितनी थी बैंक ने कहा कि इसके कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।ओटीएस के तहत 2025 में इस कर्ज को सेटल कर लिया गया व आश्चर्यजनक तरीके से इस होटल की मार्किट वैल्यू घट कर 21करोड़ 19 लाख 4 हजार रुपए रह गई।जबकि ये सालाना बढ़ती रहनी चाहिए थी।
24 करोड़ में हुआ सौदा जिस पर हो गया विवाद
जब इस होटल की खरीद पर विवाद खड़ा हुआ तो आर एस बाली ने दावा किया था कि सब कुछ पारदर्शी तरीके से हुआ है। उनने कहा था कि अगस्त 2025 को अखबार में होटल की बिक्री का विज्ञापन प्रकाशित हुआ। इसके बाद 24 करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ। इसमें से 18 करोड़ रुपये सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से लिए गए लोन और 6 करोड़ रुपये का भुगतान उनके निजी खाते से हुआ। पूरी डील चेक और डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से की गई। उन्होंने कहा कि होटल मालिकों ने केसीसी बैंक से लोन लिया था, जिसकी अदायगी वे नहीं कर पाए। बाद में वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) स्कीम के तहत लोन निपटाया गया। सुक्खू के बेहद करीबी बाली ने उस समय उनके परिवार की छवि खराब करने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की भी चेतावनी दी थी।
ओटीएस का बैंक के निदेशकों ने किया था विरोध
इस होटल के मामले को इस तरह से ओटीएस के तहत निपटाने का बैंक के कई निदेशकों ने विरोध किया था। इनमें से कइयों ने लिखित में अपना विरोध दर्ज कराया था जबकि कइयों ने मौखिक तौर पर विरोध दर्ज कराया था। विरोध का ये खुलासा बैंक के निदेशक मंडल की हुई बैठक की 29 नंवबर 2024 की प्रोसीडिंग्स में दर्ज हैं।
सवाल ये है कि जब बैंक इस प्राइम जगह में स्थित होटल की खुली नीलामी कराकर रिकवरी के तौर पर करोड़ों रुपए की आमदन बैंक को करा सकता था तो ओटीएस का रास्ता क्यों अपनाया गया। इसका जवाब नहीं मिल रहा है।
बैंस बोले मेरे साथ भी हुई इसी तरह की साजिश
उधर, इस होटल की वैल्यूएशन के कागजात आरटीआई के तहत बाहर लाने वाले कांग्रेस नेता युद्ध चंद बैंस ने कहा कि बैंक ने उनके साथ भी इसी तरह की साजिश की । उनका इल्जाम है कि सरोवर होटल की वैल्यूएशन कम करा कर केसीसी बैंक को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाया गया जबकि इस होटल की मार्किट वैल्यू 80 से 100 करोड़ रुपए से कम नहीं है।यानी जनता के खजाने में सेंध लगाई गई। अब गलत तरीके से लाभ किसे पहुंचाया गया ये सबको पता है।याद रहे आर एस बाली प्रदेश में सबसे ज्यादा आयकर अदा करने वालों में शुमार शख्सियत हैं।
बैंस कहते है कि उनकी मनाली में उनकी 25 बीघ जमीन है जो पहले से बने पंचसितारा होटल के बिलकुल करीब है व जहां के लिए सड़क सुविधा भी है और पूरी जमीन समतल है। केसीसी बैंक ने इसकी वैल्यू 2022 में तत्कालीन जयराम सरकार में15 करोड़ रुपए कर दी।यानी ढाई लाख प्रति बिस्वा कर दी गई। जबकि इसी जमीन की वैल्यूएशन 2017 में केसीसी बैंक ने 75 करोड़ लगाई थी। बड़ा सवाल यही है कि 2017में वैल्यूएशन ज्यादा कैसे थी और 2022 में ये कम कैसे हो गई। बैंस इज्लाम लगाते है कि ये सब तत्कालीन एमडी विनोद कुमार का किया धरा था।
बैंस दावा करते है कि इस जमीन का मार्किट वैल्यू आज के दिन 15 से 20 लाख प्रति विस्वा है। ये तो यहां जमीनों की खरीद फरोख्त कर रहे किसी भी प्रापर्टी डीलर से पता किया जा सकता है कि बुराह और शांनग में जमीन का मार्किट रेट क्या है।वो कहते है कि साजिश के तहत प्रापर्टी को सस्ता दिखाया गया ।
वो कहते है कि उनकी मंडी स्थित होटल में 50 कमरे, बैंकवेट हाल और पांच बीघा जमीन की कीमत बैंक ने छह करोड़ लगाई जबकि उनके पास तीस करोड़ से ज्यादा के बिल और आरटीजीएस के कागजात मौजूद है।वो कहते है कि वो इन मामलों को लेकर ईडी ,सीबीआइ के अलावा अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
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