| शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने अर्की तहसील की मांगल पंचायत के गांव भलग और समत्याड़ी के दर्जन भर लोगों की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने अपनी जमीन का कब्जा अल्ट्राटेक को देने के हाईकोर्ट की एकल जज की पीठ के फैसले को चुनौती दी थी। इसी मामले में कुछ अन्य लोगों ने अलग आधार पर एक ओर याचिका दायर कर रखी है जिस पर कल हाईकोर्ट में सुनवाई होनी हैं। अब इन किसानों की तमाम उम्मीदें इसी याचिका के फैसले पर टिकी हैं।मुंशीराम बनाम अल्ट्राटेक मामले में इन लोगों की ओर से दायर एलपीए की आज प्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस राम चंद राव और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने एकल जज के फैसले को बहाल रखा व इन ग्रामीणों को आदेश दिए कि वह अदालत में तीन दिन के भीतर अंडरटेकिंग दे कि वह दो सप्ताह के भीतर शांतिपूर्ण तरीके से जमीन का कब्जा कंपनी को दें देंगे । अगर ये लोग कब्जा नहीं देते है तो प्रशासन को दो सप्ताह की अवधि के पूरा होने के बाद इन्हें इस जमीन से बेदखल करना होगा। इसके अलावा अंडरटेकिंग न देने या निर्धारित अवधि में कब्जा न देने की सूरत में एकल पीठ के फैसले को तुरंत लागू किया जाए। यद रहे कि जेपी कंपनी के सीमेंट कारखाने के लिए इन किसानों की जमीनों का अधिगृहित करने के लिए 2005 में अधिसूचना जारी की गई थी और 10 जनवरी 2008 अवार्ड घोषित कर दिया गया था। इसके बाद पूरक अवार्ड 2 मई 2022 को घोषित किया गया। (अवार्ड यानी जमीनों व घरों की कीमत)। खंडपीठ ने कहा कि कि अधिगृहित जमीनों पर इन जमीन मालिकों को रहने दिया जाता है तो यह कानून के उल्ट होगा। जबकि यह जमीन अल्ट्राटेक कंपनी के फायदे के लिए अधिगृहित की गई हैं।खंडपीठ ने कहा कि उसे अदालत एकल जज की पीठ की ओर से सुनाए गए फैसलें में कोई कमी नजर नहीं आ रही हैं। अब कल दूसरी एलपीए की न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति संदीप शर्मा पीठ में सुनवाई होनी है।
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