नई  दिल्‍ली/शिमला।सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए प्रदेश के कारपोरेट सेक्‍टर के सात हजार कर्मचारियों को पैंशन देने के हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश को निरस्‍त कर दिया है। प्रदेश की वीरभद्र सिंह सरकार ने प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव शर्मा  के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती  दी थी जिसमें कहा गया था कि 2004 के बाद प्रदेश के निगमोंं व बोर्डों के कर्मचारियों को पैंशन दी जाए।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे एस केहर की खंडपीठ ने प्रदेश हाईकोर्ट के इस आदेश को बुधवार को  प्रदेश हाईकोर्ट के  फैसले को रदद कर दिया।इससे प्रदेश के कारपोरेट सेक्‍टर   के सात हजार के करीब कर्मचारियों को पैंशन मिलने का सपना चकनाचूर हो गया। इन कर्मचारियों  में  वीरभद्र सिंह सरकार के खिलाफ इस बात को लेकर गुस्‍सा है कि सरकार उनको मिलने वाले लाभों के खिलाफ है व पैंशन का लाभ देने  से वंचित कर रही है।

कारपोरेेट सेक्‍टर के कर्मचारी प्रदेश हाईकोर्ट में जंग जीत गए थे वउन्‍हें उम्‍मीद थी कि  उन्‍हें पैंश्‍ान मिलेंगी। लेकिन सरकार नहीं मानी  और  सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया।

कारपोरेट कर्मचारी पैंश्‍ानर्स  संघ के संयोजक व इस मामलेको सुप्रीम कोर्ट ले जाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभााने वाले  पूर्व कर्मचारी नेता गोबिंद चतरांटा  ने कहा कि व कानूनविदों  से राय लेकर  अगला कदम उठाएंगे।

हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले में वरिष्‍ठ वकीलासें के साथ पेश होने वाले वकील सूर्या नारायण ने रिपोर्टर्ज आइ डॉट कॉम से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नंबर दो  की जस्टिस जे एस केहर की अदालत ने आज फैसला सुना दिया व सरकार की अपील मंजूर करते हुए प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को निरस्‍त  कर  दिया है।

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