शिमला।हिमाचल की एक और सरकारी यूनिवर्सिटी में कुलपति का कार्याकाल पूरा होने वाला है और राजभवन की ओर से नए कुलपति की नियुक्ति को लेकर अभी तक प्रक्रिया तक शुरू नहीं की गई है।
मामला डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी व वानिकी विवि नौणी सोलन का है। इस विवि के कुलपति राजेश्वर चंदेल का कार्याकाल आठ मई को पूरा होने वाला है व आज 30 अप्रैल हो चुके है। नए कुलपति की नियुक्ति के लिए अब कुल आठ दिन बचे है और अभी तक नए कुलपति की नियुक्ति को लेकर विज्ञापन तक जारी नहीं हुआ हैं। इसके बाद कुलपति की तलाश के लिए सर्च कमेटी बनेगी तब कहीं जाकर नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी व वानिकी विवि नौणी सोलन के मौजूदा कुलपति राजेश्वर चंदेल की नियुक्ति को लेकर विवि के ही एक प्रोफेसर ने प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दासर की हुई हैं।
याचिका में कहा गया है प्रोफेसर चंदेल की नियुक्ति गैर कानूनी है क्योंकि उनकी नियुक्ति में लिए जो समिति गठित हुई थी उसमें आइसीएआर के महानिदेशक शामिल नहीं थे। इस समिति में आइसीएआर के महानिदेशक की ओर से डीडीजी को नामित किया गया था। जिसका विवि एक्ट में प्रावधान ही नहीं हैं।
इस बावत याचिका में हाल ही में पालमपुर विवि में कुलपति की नियुक्ति को लेकर शुरू की गई नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका में हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया हैं।
पालमपुर विवि में कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया को पालमपुर विवि के एक प्रोफेसर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इस याचिका का निपटारा करते हुए फैसला सुनाया था कि विवि के एक्ट में कुलपति की नियुक्ति के लिए जो सर्च समिति बनी उसमें राजभवन का एक सदस्य का नामांकन करेगा जबकि दो अन्य सदस्यों में यूजीसी और आइसीएआर के महानिदेशक शामिल होंगे।
प्रदेश हाईकोर्ट ने मार्च में पालमपुर विवि के कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया को अवैध ठहरा दिया था । अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि पालमपुर विवि के कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी में आइसीएआर के महानिदेशक को होना अनिवार्य था लेकिन आइसीएआर की ओर से इस कमेटी में उप महानिदेशक को भेजा गया जिसका एक्ट में प्रावधान ही नहीं हैं। इस मामले में राजभवन भी एक पक्ष रहा था जो अपने आप हैरतअंगेज करने वाला था। अमूमन राजभवन कानूनी जटिलताओें में नहीं पड़ता है। वो ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री के साथ सहमति बनाकर आगे बढ़ते हैं। लेकिन ये अपने आप में अलहदा मामला हैं।
अब नौणी विवि में मामले में भी राजभवन को पक्ष बनाया गया हैं। इस मामले की सुनवाई अब कल यानी 1 मई के लिए निर्धारत की गई है। इस मामले की पहले 22 अप्रैल को सुनवाई हुई थी और अदालत ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर रखा हैं। अब देखना है कि कल यानी एक मई को होने वाली सुनवाई में राजभवन व सरकार की ओर से इस मामले में क्या जवाब दिया जाता हैं।
याद रहे हिमाचल की तीसरी सरकारी यूनिवर्सिटी है जिसमें अब नियमित कुलपति नहीं रहने वाला हैं।
हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी समरहिल में अप्रैल 2022 से स्थाई कुलपति नहीं हैं।जबकि चौधरी सरवण कुमार पालमपुर कृषि विवि में भी एक लंबा अरसा हो गया जहां स्थाई कुलपति नहीं हैं। कुलपतियों नियुक्ति के मामले में राज्य सरकार के साथ –साथ राजभवन भी कटघरे में हैं।
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