शिमला। अदालत के आदेश पर अगरअर्की प्रशासन घरों व मकानों समेत जमीन का जबरन कब्जा लेने पर आ जाता है तो समत्याड़ी गांव की 92 साल की कमला देवी और 78 साल की गांव भलग की विमला देवी समेत डेढ दर्जन से ज्यादा परिवारों के सामने बेघर होने का खतरा मंडरा गया हैं। इन परिवारों के सिर पर छत नहीं रहने वाली हैं।
इसी तरह गांव भलग की 92 साल की पार्वती ऊर्फ पार्बतु पत्नी टोहणू और उनके बेटे बृजलाल चौहान जो 71 साल है के भी बेघर होने की नौबत आ गई है।
गांव भलग व समत्याड़ी के डेढ दर्जन के करीब लोगों को अपनी जमीनें व घरबार खाली कराने के लिए एसडीएम अर्की से नोटिस जारी हो गए हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश हैं ऐसे मे वो 27 फरवरी तक अपनी जमीनों व घर बार का कब्जा खुद छोड़ दें अन्यथा प्रशासन जबरन कब्जा ले लेगा।
उधर, गांव के ये लोग अदालत से राहत पाने की आस में है लेकिन हाईकोर्ट में छुटिटयां है ऐसे में हाईकोर्ट में अब कल यानी 26 फरवरी से कामकाज शुरू होना हैं।
खुद पर बेघर होने की तलवार लटकी देख ये परिवार बेहद परेशान हैं।
याद रहे बागा,भलग, समत्याड़ी गांवों की सालों पहले जेपी कंपनी के सीमेंट कारखाने के लिए जमीन अधिगृहित की गई थी। अब यह कारखाना बिड़ला समूह ने खरीद लिया है । इन परिवारों का कहना है कि एकतरफा कार्यवाही हुई । उनकी जमीनें लेने के लिए तो न तो प्रशासन ने उनसे बात की और न ही कंपनी की ओर से कोई बात करने आया।
सब कुछ कागजों पर ही होता आया हैं।
समत्याड़ी के सुरजीत सिंह का कहना है कि प्रशासन ने नोटिस भेजे है कि कंपनी के लिए जमीन व घर बार छोड़ दो नहीं तो जबरन कब्जा कर लिया जाएगा। ट्रैजरी में कोई पैसा जमा हुआ हैं। हमने पक्के घर बना रखे है । सुना है कि जो मुआवजा मिला है वह 70 हजार रुपए प्रति कमरे के हिसाब से बनाया गया हैं।70 हजार रुपए में कमरा कहां बनता हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी दादी कमला देवी की उम्र 92 साल की हैं। अगर प्रशासन जबरन कब्जा करता है और हमें घर से निकाल दिया जाता है तो दादी समेत तमाम परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे आ जाएंगे। वह कहते है कि उनकी दादी उनके चाचा बलवंत सिंह के साथ रहती है उन्हें भी इसी तरह के नोटिस आए हैं। कमरों के अलावा जमीन का मुआवजा 4 लाख 25 हजार रुपए के हिसाब से जमा कराया गया हैं। जबकि आज पांच लाख प्रति विस्वा के हिसाब कहीं जमीन नहीं मिल रही हैं।
सुरजीत सिंह कहते है कि इन परिवारों की गऊशालाएं भी है। अगर जबरन कब्जा होता है तो लोग व पशु सब खुले आसमान के नीचे आ जाएंगे। उनके पास दूसर जगह रहने के लिए मकान भी नहीं और जमीन भी नहीं हैं। अगर प्रशासन घर तोड़ने आएंगे तो उनसे ही गुहार लगाएंगे कि आप भी आंखें खोलों आपकी भी तो परिवार हैं।अगर मकान बनाना होगा तो जमीन खरीदनी पड़ेगी। उसके लिए पैसे चाहिए होंगे। जिस तरह का मुआवजा जमा कराया गया है उसके बूते क्या ही कर पाएंगे।
गौरतलब हो कि इस गांव के कुछ परिवारों को छोड़कर बाकियों ने दूसरी जगह मकान बना लिए है व उनका कंपनी के साथ सौदा भी हो गया था। सुरजीत सिंह कहते है कि उनके पास तो दूसरी जगह जमीन ही नहीं हैं। गांव में एक जगह एक बीघा जमीन है जिसके 35 हिस्सेदार हैं। ऐसे में एक-एक विस्वा जमीन भी नहीं आएगी।
इसी तरह की स्थिति गांव भलग के बलदेव राज व बाकियों की भी हैं। उन्हें भी जमीनें व घरबार खाली कराने के नोटिस आएं है और 27 फरवरी तक खाली नहीं किए गए तो जबरन कब्जा करने के फरमान हैं।
बलदेव राज कहते हैं कि उनकी मां विमला देवी की उम्र 72 साल की है और उनका महीना पहले ही आंखों का आपरेशन हुआ है। अगर जबरन कब्जा हुआ तो वो आसमान के नीचे आ जाएंगे। प्रशासन कह रहा है कंपनी के लिए कब्जा छोड़ दो अगर ऐसा करते हैं तो हम जाएंगे कहां। हमें प्लॉट मिलने थे। वो मिले नहीं हैं।
जब ये जमीन अधिगृहित हुई तो उनसे तो कुछ पूछा ही नहीं गया। एकतरफा सब होता रहा। मकानों के अलावा पशुशालाएं भी । उन्हें भी खाली कराने का फरमान हैं। ऐसे में हमारे पास कोई रास्ता नहीं है कि हम लोग अपने परिवारों व पशुओं को लेकर कहां जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग तो पहले ही शिफट हो गए हैं। जिनके साथ सौदा पक्का हो गया वो चले गए व उनके पास दूसरी जगह आसपास जमीनें भी थी। उनकी तो कोलधार में जमीन हैजहां के लिए पैदल जाने का ही डेढ़ घंटा लगता हैं। उनके पास पैसे भी नहीं हैं। ट्रैजरी में कंपनी की ओर जो पैसा जमा कराया है वह उन्हें मान्य ही नहीं हैं तो उस पैसे को उन्होंने लिया भी नहीं हैं।
उधर एसडीएम अर्की की ओर से इस तरह के नोटिस को लेकर जब सुक्खू सरकार के डीसी सोलन मनमोहन शर्मा से बात की गई तो मनमोहन शर्मा ने कहा कि उन्हें इस बावत कोई जानकारी ही नहीं हैं आप एसडीएम अर्की से ही बात करो।सुक्खू सरकार की मशीनरी भी लाजवाब है । कहीं पर जबरन घर खाली करने के नोटिस चले गए और जिला के टॉप अफसर बेखबर हैं।
बहरहाल, एसडीएम अर्की यादविंदर पाल ने कहा कि स्थानीय प्रशासन तो हाईकोर्ट के आदेशों की पालना कर रहा हैं। ये आदेश नवंबर- दिसबंर में आ गए थे। इनका मुआवजा ट्रैजरी में जमा है। ये लोग अदालत भी गए थे। लेकिन अदालत ने इनकी बात नहीं मानी तो प्रशासन के पास अदालत के आदेशों की पालना करने के अलावा क्या विकल्प बचा हैं। यह पूछे जाने पर कि अगर जबरन इन्हें बाहर निकाला तो ये बेघर हो जाएंगे जैसा कि ये लोग दावा कर रहे हैं। एसडीएम यादविंदर पाल ने कहा कि इस बावत वो क्या ही कह सकते हैं। प्रशासन को तीन महीने के भीतर आदेशों की पालना करने का हुक्म है। इनको अदालत से ही कोई राहत मिल सकती हैं।
वो कहते है कि आप खुद ही अदालत का आदेश पढ़ लो।
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