शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने आज शिमला में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक संजय ठाकुर की पुस्तक शब्द-पहरी का विमोचन किया। शब्द-पहरी मानव-जीवन को गहरे रूप से प्रभावित करने वाले देश-विदेश के संजीदा विषयों पर आधारित है। इस पुस्तक में बेरोज़गारी, ग़रीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक व आर्थिक उन्नति से सम्बद्ध कई चुनौतियों को उजागर करते हुए इन पर प्राथमिकता के आधार पर काम किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है।
संजय ठाकुर ने कहा कि अमीर और ग़रीब के बीच की लगातार बढ़ती खाई विकास के मार्ग का एक बड़ा अवरोध है। इस खाई को पाटे बिना विकास की परिकल्पना बहुत मुश्किल है। ठाकुर ने कहा कि ऐसी कई आर्थिक और सामाजिक समस्याएं हैं, जिन्हें दूर किए बग़ैर विकास की सही दिशा निर्धारित नहीं की जा सकती। व्यापक समझ और दृढ़ राजनीतिक इच्छा-शक्ति के साथ ही इन पर क़ाबू पाया जा सकता है।
संजय ठाकुर ने कहा कि एक ऐसा राजनीतिक वातावरण तैयार करने की ज़रूरत है, जिसमें सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के साथ-साथ लोकतान्त्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास क़ायम रखा जा सके। ठाकुर ने कहा कि व्यापक स्तर पर आम सहमति बनाकर आर्थिक विकास की गति को तेज़ करते हुए समग्र विकास सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
संजय ठाकुर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या के रूप में उभरी है। ठाकुर ने कहा कि ग़रीब, किसान, मज़दूर और पिछड़े वर्ग के लोग आज भी हाशिए पर हैं। उन्होंने कहा कि ज़्यादातर गाँव आज भी पूरी तरह उपेक्षित हैं। आदिवासियों की लगभग दस करोड़ की एक बड़ी आबादी हाशिए पर है, जिसे आज तक मुख्यधारा से नहीं जोड़ा गया है।
नक्सलवाद और आतंकवाद जैसी समस्याएं भी अभी जस की तस हैं। यह भी एक बहुत बड़ी वास्तविकता है कि करोड़ों बच्चे आज भी आजीविका के लिए मज़दूरी करने को मजबूर हैं। लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने को कभी भी महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया, जिस कारण बहुत-से लोग आज भी कुपोषण के शिकार हैं। स्वास्थ्य-सेवाओं का भी यह स्तर है कि एक हज़ार से ज़्यादा मरीज़ों के लिए भी मुश्किल से ही एक बिस्तर और एक चिकित्सक उपलब्ध हो पाता है। बहुत-सी शैक्षणिक योजनाओं के बावजूद उपलब्ध करवाई जा रही शिक्षा अभी भी मूल उद्देश्यों की पूर्ति में असफल है। भ्रष्टाचार लगातार जड़ों को खोखला करता जा रहा है। एक बड़ी संख्या में लोग नशे की चपेट में हैं, जिनमें एक भारी संख्या युवाओं की है।
संजय ठाकुर ने कहा कि इनके अतिरिक्त भी बन्धुआ मज़दूरी, जातिवाद, लिंग-भेद, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, महिलाओं का यौन-शोषण, दहेज-प्रथा, बाल यौन शोषण, अस्पृश्यता, धार्मिक उन्माद और बाल-अपराध जैसी कई सामाजिक समस्याएं हैं, जिन पर काम किए जाने की ज़रूरत है। जनता को गहरे रूप से प्रभावित करने वाले इन मुद्दों पर गम्भीरता से विचार करके ठोस क़दम उठाने होंगे।
संजय ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय में एक ऐसा वातावरण बनाए जाने की ज़रूरत है, जिसमें पारस्परिक रूप से लाभप्रद पारिस्थितिकी तन्त्र में बेहतर स्वास्थ्य व शिक्षा, यथोचित रोज़गार, न्याय, उन्नत तकनीक और उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी तक लोगों की पहुँच बनाई जा सके। इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए कि स्वास्थ्य, शिक्षा और न्याय जैसी ज़रूरतें लोगों से दूर न हों।
ठाकुर ने कहा कि स्वास्थ्य-सेवाओं एवं शिक्षा के प्रसार, इनकी गुणवत्ता और इनको सभी को सहज-सुलभ करवाने जैसे सभी पहलुओं पर समान व प्रभावी रूप से काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ, स्वच्छता, जल और देखरेख के लिए ज़्यादा धन की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के साथ-साथ रोज़गार भी उपलब्ध करवाया जा सकता है। पारम्परिक रोज़गार के अवसर उपलब्ध करवाने के साथ-साथ अपारम्परिक रोज़गार का भी सृजन किया जाना चाहिए। असमानता कम करने के लिए ग़रीबों के लिए विशेष नीतियां बनाकर उन्हें व्यावहारिक रूप दिए जाने की ज़रूरत है।
संजय ठाकुर ने कहा कि अर्थव्यवस्था में लोगों के बीच के बहुत बड़े अन्तर को कम करना वर्तमान समय की एक बहुत बड़ी ज़रूरत है।
संजय ठाकुर जनसत्ता, दैनिक जागरण जैसे समाचार पत्रों से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न पत्रिकाओं में उनके लेख छपते रहे हैं। वो कवि,उपन्यासकार तो है ही साथ की ज्योतिष का भी अध्ययन -मनन करते रहते हैं।
(31)






