शिमला। हिमाचल प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले बिसात बिछनी शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू पर किया गया तीखा हमला केवल एक बयान नहीं, बल्कि आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की एक ‘रक्षात्मक घेराबंदी’ करार दी जा रही है।
बिट्टू बहाना, ‘अपनों’ पर निशाना?
राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि विनय कुमार ने रवनीत बिट्टू को ‘गद्दार’ कहकर अपनी ही पार्टी के उन विधायकों को संदेश देने की कोशिश की है , जो पाला बदलने की फिराक में हो सकते हैं। इसे “ऑपरेशन लोटस-2” को रोकने की कांग्रेस की कोशिश माना जा रहा है। पार्टी में लोटस टू के अंदेशे को लेकर खौफ सामने आ रहा है।
2024 की वो यादें और 2026 का डर
2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के पास 40 विधायकों का स्पष्ट बहुमत था, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी देश के नामी वकील अभिषेक मनु सिंघवी की हार ने पार्टी को हिलाकर रख दिया था। कांग्रेस से भाजपा में गए हर्ष महाजन की जीत ने साबित किया था कि नंबर गेम से ज्यादा ‘फ्लोर मैनेजमेंट’ अहम है। अब जब भाजपा की इंदु गोस्वामी का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है, मुख्यमंत्री सुक्खविंदर सिंह सुक्खू किसी भी कीमत पर भाजपा को ‘लोटस-2’ का मौका नहीं देना चाहते।ये उनके राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है।
रजनी पाटिल बनाम ‘बाहरी’ का मुद्दा
कांग्रेस की ओर से प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल का नाम संभावित उम्मीदवार के रूप में सामने आ रहा है। 2024 में भी सिंघवी के ‘बाहरी’ होने को बगावत का एक मुख्य कारण बना था। पाटिल भी महाराष्ट्र से हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री सुक्खू से नाराज कांग्रेस विधायकों के लिए यह उनको सबक सिखाने और हिसाब पूरा करने का एक मौका है। वैसे भी अब चुनाव के लिए दो साल से कम का समां बचा है और कांग्रेस रिपीट होगी, ये संभव नहीं लग रहा। ऐसे में अगर कांगेस विधायकों ने भाजपा का पक्ष लिया तो उनको अगली सरकार में सत्ता सुख मिलने का लालच जरूर है।
‘गद्दारी’ की परिभाषा और चरित्र पर प्रहार
विनय कुमार ने बिट्टू के बहाने जो शब्दावली चुनी है, वह बहुत गहरी है व सोच समझ कर मौके को ध्यान में रखकर ही चुनी है।उन्होंने प्रदेश के कांग्रेस नेताओं को विरासत के अपमान का डर दिखा दिया है। बेअंत सिंह की शहादत का जिक्र कर उन्होंने संदेश दिया है कि पाला बदलने वालों को ‘कुलघाती’ के रूप में पेश किया जाएगा।
साथ ही चारित्रिक हमला भी है । उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जो भी विधायक क्रास-वोटिंग करेगा, उसे राजनीति में ‘गद्दार’ के तमगे के साथ जीना होगा। यह विधायकों के लिए एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है।
जाहिर है विनय कुमार का ‘गद्दारी वाला पंच’ फिलहाल हवा में है। इसका असर राज्यसभा नामांकन के वक्त कितना नजर आएगा ये देखा जाना है।
ये कहा विनय ने
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का रवनीत सिंह बिट्टू को ग़द्दार कहना यह सिर्फ़ एक शब्द नहीं है,यह बिटटू के पूरे राजनीतिक जीवन उनकी नीयत और चरित्र का सबसे सटीक, सबसे ईमानदार और सबसे बेबाक मूल्यांकन है। यह शब्द बिट्टू की राजनीति की असलियत को बेनकाब करता है।
सच्चाई यह है कि रवनीत बिट्टू उन गिने-चुने नेताओं में शामिल रहे जिन्हें कांग्रेस ने बिना किसी शर्त, बिना किसी संदेह, भरपूर सम्मान और अवसर दिए। एक साधारण कार्यकर्ता से सांसद बनने तक बिट्टू की हर सीढ़ी कांग्रेस के संगठन, त्याग, कार्यकर्ताओं की मेहनत और राहुल गांधी जैसे नेताओं के विश्वास की वजह से चढ़ी गई।कांग्रेस ने उन्हें पहचान दी, पद दिया, मंच दिया, और जनता के बीच उन्हें एक नेता की तरह खड़ा किया।
लेकिन जब व्यक्तिगत लालच, सत्ता का नशा और निजी फायदे की चमक आंखों पर भारी पड़ गई, तब बिट्टू ने वही किया जो सिद्धांतहीन, अवसरवादी और लालची नेता करते है। उन्होंने पार्टी की विचारधारा बेच दी, भरोसा तोड़ दिया, पार्टी की निष्ठा को पैरों तले रौंद दिया और भाजपा की गोद में जाकर बैठ गए। यह केवल पार्टी छोड़ना नहीं था,यह विचारधारा, विश्वास, और नैतिकता सबकी खुली ग़द्दारी थी।
विनय कुमार ने कहा है कि कांग्रेस विचारधारा का घर है, लेकिन बिट्टू जैसे लोग इस घर में रहने नहीं आते वे बस लेने आते हैं। यह वही प्रवृत्ति है जो सत्ता के दरवाज़े खुलते ही सिद्धांतों को बाहर फेंक देती है। जनता भी जानती है कि भाजपा में जाने वाले अधिकतर नेता विचारधाराएं नहीं बदलते वह सिर्फ़ अपनी कीमत तय करके बिक जाते हैं।
इसीलिए राहुल गांधी का बिट्टू को गद्दार कहना न कड़वा था, न व्यक्तिगत,वह बिट्टू के चरित्र पर एक सटीक राजनीतिक चोट थी। ग़द्दार वही कहलाता है जिसे पार्टी बहुत देती है, और वह बदले में पार्टी और विचारधारा दोनों को मुश्किल समय में धोखा दे देता है।
रवनीत बिट्टू ने वर्षों की कांग्रेस की मेहनत, कार्यकर्ताओं के विश्वास और पार्टी की विरासत को कुछ पलों की सत्ता की भूख के लिए बेच दिया। ऐसे लोग न संगठन के होते हैं, न विचारधारा के वह सिर्फ़ अपने लाभ और सुविधा के होते हैं।
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