शिमला। कोटखाई में दसवीं की छात्रा गुडिया के साथ दुष्कर्म व हत्या मामले में पकड़े आरोपी सूरज की पुलिस लॉकअप में हुई हत्या के ट्रायल को सुप्रीम कोर्ट ने शिमला की सीबीआइ अदालत से चंडीगढ़ की सीबीआइ अदालत को स्थानातंरित कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई,न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने आज ये आदेश दिए।
सीबीआइ ने इस मामले में प्रदेश के ताकतवर पुलिस अधिकारियों के शामिल होने का हवाला देकर ट्रायल को दिल्ली स्थनातंरित करने की सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। सीबीआइ ने साथ ही कहा था कि आरोपी इतने प्रभावशाली है कि ये ट्रायल को लंबा खींचने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रहे है। ऐसे में अगर ट्रायल शिमला की सीबीआइ अदालत में चला तो ये गवाहों को प्रभावित कर सकते है।
इसके अलावाइस मामले में आरोपी आइ जी जैदी ने भी इस मामले को यहां से स्थानांतरित करने की अर्जी दी थी। उन्होंने आग्रह किया था कि यहांपर उनकी ओरसे वकील पैरवी नहीं कर पा रहे है, ऐसे में उनके मामले को यहां से स्थानातंरित कर दिया जाए। बाद में जैदी ने अपनी अर्जी वापस ले ली थी।
सीबीआइ की अर्जी पर अदालत ने सभी आरोपियों को शो कॉज नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।
आरोपियों में से आरोपी नंबर नौ एसपी शिमला डोंडुप वांग्याल नेगी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करते हुए उनकी वकील वंदना सहगल ने दलीलें दी की आरोपियों की ओर से शिमला के ट्रायल कोर्ट में वकीलों को पैरवी करने नहीं दी जा रही है। वहां पर बार एसोसिएशन ने कोई प्रस्ताव पास कर इस मामले में सभी वकीलों को आरोपियों की पैरवी न करने का फैसला लिया था। ऐसे में आरोपियों की ओर से वकील अदालत में हाजिर नहीं हो पा रहे थे। लेकिन अब ये मामला सुलझ गया है व वकील पैरवी कर रहे है। ऐसे में मामले को स्थानातंरित करने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा उन्होंने दलीलें दी कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है। चालान भी पेश हो चुका है। मामले से जुड़े तमाम गवाह शिमला व आसपास के इलाके हैं हैं ऐसे में अगर इस मामले को स्थानातंरित ही करना है तो इसे किसी नजदीक की अदालत में स्थानातंरित किया जाए।
वंदना सहगल ने कहा कि इस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने मामले को चंडीगढ़ की सीबीआइ अदालत को स्थानांतरित कर दिया है। याद रहे इस मामले में चालान पेश करने से लकर अब तक 19 महीनों में आरोपियों के खिलाफ केवल आरोप ही निर्धारित हो पाए है। जबकि अब तक इस मामले में सुनवाई पूरी हो जानी चाहिए थी। या रहे इस मामले में जैदी, नेगी व जोशी को जमानत मिल चुकी है व बाकी आरोपियों को अभी जमानत नहीं मिली है।
याद रहे कोटखाई पुलिस लॉकअप में 18 व 19 जुलाई 2017 की रात को गुडिया दुष्कर्म व हत्या मामले में पकड़े गए एक आरोपी सूरज की हत्या हो गई थी। प्रदेश पुलिस ने इस हत्या का इल्जाम इसी मामले में पकड़े गए दूसरे आरेपी राजू पर लगा दिया था। बाद में जनाक्रोश के बीच यह मामला सीबीआइ के सुपुर्द हो गया और सीबीआइ ने सूरज की हत्या को पुलिस की ओर से किया करार दिया व इस मामले में प्रदेश पुलिस के आइजी जहूर हेदर जैदी, एसपी डोंडुप नेगी, ठियोग के डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई थाने के एसएचओ राजेंद्र कुमार, एएसआइ दीपचंद व चार सिपाहियों को गिरफतार किया था। इनके खिलाफ शिमला की सीबीआइ अदालत में ट्रायल चल रहा था लेकिन रफतार से आगे नहीं बढ़ रहा था।
की छात्रा गुडिया के साथ दुष्कर्म व हत्या मामले में पकड़े आरोपी सूरज की पुलिस लॉकअप में हुई हत्या के ट्रायल को सुप्रीम कोर्ट ने शिमला की सीबीआइ अदालत से चंडीगढ़ की सीबीआइ अदालत को स्थानातंरित कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई,न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने आज ये आदेश दिए।
सीबीआइ ने इस मामले में प्रदेश के ताकतवर पुलिस अधिकारियों के शामिल होने का हवाला देकर ट्रायल को दिल्ली स्थनातंरित करने की सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। सीबीआइ ने साथ ही कहा था कि आरोपी इतने प्रभावशाली है कि ये ट्रायल को लंबा खींचने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रहे है। ऐसे में अगर ट्रायल शिमला की सीबीआइ अदालत में चला तो ये गवाहों को प्रभावित कर सकते है।
इसके अलावाइस मामले में आरोपी आइ जी जैदी ने भी इस मामले को यहां से स्थानांतरित करने की अर्जी दी थी। उन्होंने आग्रह किया था कि यहांपर उनकी ओरसे वकील पैरवी नहीं कर पा रहे है, ऐसे में उनके मामले को यहां से स्थानातंरित कर दिया जाए। बाद में जैदी ने अपनी अर्जी वापस ले ली थी।
सीबीआइ की अर्जी पर अदालत ने सभी आरोपियों को शो कॉज नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।
आरोपियों में से आरोपी नंबर नौ एसपी शिमला डोंडुप वांग्याल नेगी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करते हुए उनकी वकील वंदना सहगल ने दलीलें दी की आरोपियों की ओर से शिमला के ट्रायल कोर्ट में वकीलों को पैरवी करने नहीं दी जा रही है। वहां पर बार एसोसिएशन ने कोई प्रस्ताव पास कर इस मामले में सभी वकीलों को आरोपियों की पैरवी न करने का फैसला लिया था। ऐसे में आरोपियों की ओर से वकील अदालत में हाजिर नहीं हो पा रहे थे। लेकिन अब ये मामला सुलझ गया है व वकील पैरवी कर रहे है। ऐसे में मामले को स्थानातंरित करने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा उन्होंने दलीलें दी कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है। चालान भी पेश हो चुका है। मामले से जुड़े तमाम गवाह शिमला व आसपास के इलाके हैं हैं ऐसे में अगर इस मामले को स्थानातंरित ही करना है तो इसे किसी नजदीक की अदालत में स्थानातंरित किया जाए।
वंदना सहगल ने कहा कि इस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने मामले को चंडीगढ़ की सीबीआइ अदालत को स्थानांतरित कर दिया है। याद रहे इस मामले में चालान पेश करने से लकर अब तक 19 महीनों में आरोपियों के खिलाफ केवल आरोप ही निर्धारित हो पाए है। जबकि अब तक इस मामले में सुनवाई पूरी हो जानी चाहिए थी। या रहे इस मामले में जैदी, नेगी व जोशी को जमानत मिल चुकी है व बाकी आरोपियों को अभी जमानत नहीं मिली है।
याद रहे कोटखाई पुलिस लॉकअप में 18 व 19 जुलाई 2017 की रात को गुडिया दुष्कर्म व हत्या मामले में पकड़े गए एक आरोपी सूरज की हत्या हो गई थी। प्रदेश पुलिस ने इस हत्या का इल्जाम इसी मामले में पकड़े गए दूसरे आरेपी राजू पर लगा दिया था। बाद में जनाक्रोश के बीच यह मामला सीबीआइ के सुपुर्द हो गया और सीबीआइ ने सूरज की हत्या को पुलिस की ओर से किया करार दिया व इस मामले में प्रदेश पुलिस के आइजी जहूर हेदर जैदी, एसपी डोंडुप नेगी, ठियोग के डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई थाने के एसएचओ राजेंद्र कुमार, एएसआइ दीपचंद व चार सिपाहियों को गिरफतार किया था। इनके खिलाफ शिमला की सीबीआइ अदालत में ट्रायल चल रहा था लेकिन रफतार से आगे नहीं बढ़ रहा था।
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