शिमला। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के मंत्री बागवानी व सिंचाई मंत्री महेंद्र सिह ठाकुर ने बीते रोज शुक्रवार को बैंक की ओर से की जाने वाली फंडिंग को लेकर बैंक को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि 2012 के बाद नाबार्ड की योजनाओं में फंडिंग गैप बहुत बढ़ा हैं।
नाबार्ड की ओर से राजधानी में शुक्रवार को आयोजित स्टेट क्रेडिट सेमीनार के मौके पर
महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि नाबार्ड की अधिकांश योजनाओं में आधा काम हो गया बचे
काम के लिए फंड का इंतजार करना पड़ता हैं। उन्होंने कहा कि दरिया से पानी उठा लिया गया हैं,ऊपर टैंक भी बन गया हैं लेकिन जिन खेतों तक पानी पहुंचना हैं वहां के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। जिनके लाभ के लिए योजना थी ,उन्हें कोई लाभ भी नहीं मिला व देश का पैसा भी खर्च हो गया। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी योजनाओं के लिए नाबार्ड क्या करता हैं। इसी तरह सड़कों का भी हाल हैं। नाबार्ड अधिकारियों के पास उनके सवालों का कोई जवाब नहीं था। उन्होंने इस फंडिंग गैप को पूरा करने के लिए एकमुश्त फंडिंग का आग्रह किया व कहा कि इससे नाबार्ड की भी व सरकार की भी छवि जनता में सही नहीं बन रही हैं।
उन्होंने जंगली जानवरों से निपटने के लिए नाबार्ड की सोलर फेंसिंग योजना जिसे पिछल्ली सरकार ने लागू किया था को भी कटघरे में खड़ा किया व कहा कि आवारा सांड एक ही धक्के में लगाई इस फेंसिंग को उखाड़ देते हैं। इस बावत उन्होंने सुझाव भी दिए। उन्होंने नाबार्ड से गौसदनों के निर्माण में मदद करने का आग्रह किया व कहा कि प्रदेश में 40 हजार गाएं व इनकों नाबार्ड को मुफत देने को तौयार हैं। बैंक डेयरी का काम चलाएं। बैल सड़कों पर घूम रहे हैं। जंगली जानवरों व अवारा पशुओं की वजह से हजारों बीघा जमीन बंजर पड़ गई हैं।
इस दिशा में बैंक सरकार की मदद करे।डेयरी की दिशा में काम करे । सरकार के लिए यह क्षेत्र चिंता का विषय हैं। उन्होंने एंटी हेल गन और एंटी हेल नेट खरीद मामले में बैंक का सहयोग मांगा।
इसके अलावा उन्होंने बैंक से सरकार को रियायतें देने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि सरकार नाबार्ड की सबसे बड़ी कर्जदार हैं और सौ फीसद कर्ज पर ब्याज भी देती हैं। ऐसे में नाबार्ड को कर्ज देते हुए सरकार को कुछ तो रियायत देनी चाहिए। आखिर सरकार के दम पर बैंक का बड़ा कारोबार चल रहा हैं। उन्होंने कहा कि दो -अढाई सौ करोड़ से काम नहीं चलने वाला। उन्होंने जयराम सरकार का एक बड़ा राज भी खोला व कहा कि वह बड़े कर्ज की मांग को लेकर केंद्र सरकार के पास गए व कहा कि नाबार्ड के दो अढाई सौ करोड़ के कर्ज से उनके कुछ होने वाला नहीं हैं। केंद्र ने एक रास्ता बताया व कहा कि एक रास्ता है फारेन फंडिंग का उन्होंने कहा कि वह प्रदेश लौटे व मुख्यमंत्री से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने उन्हें आगे बढ़ने की छूट दी।
आइपीएच विभाग ने 4751 करोड़ 24 लाख का रेन हार्वेस्टिंग की परियोजना बनाई व इसे मंजूर कराने में कामयाब हो गए। कुछ हौसला बढ़ा तो 1688 करोड़ की एक और परियोजना मंजूर कराने में कामयाब हो गए। मशरूम के लिए 510 करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर करा दिया। उन्होंने नाबार्ड अधिकारियों से कहा कि दस बीस करोड़ के प्रोजेक्टों से कुछ होने वाला नहीं हैं। अभी 4893 करोड़ की एक ओर योजना को मंजूरी मिलने वाली हैं। एडीबी ने कहा कि वह एडवांस में मिशन भेज रहा हैं।
महेंद्र सिंह ने कहा कि नाबार्ड की ओर से रियायतें नहीं मिल रही इसलिए सरकार को एशियन डवलपमेंट बैंक व बाहर के बाकी बैंकों के पास जाना पड़ा। वहां से सरकार एक तो बड़े कर्ज लेने में कामयाब हुई और दूसरे मिले कर्ज में से प्रदेश सरकार को 20 फीसद ही लौटाना होता हैं बाकी केंद्र सरकार लौटाती हैं। इससे राज्य सरकार को तो फायदा हो ही जाता हैं।
महेंद्र सिंह ठाकुर ने नाबार्ड से कहा कि वह विधायकों को विश्वास में ले। विधायक लोगों की भावनाओं से जुड़े होते हैं। दिल्ली व शिमला में कार्यालयों में बैठ कर बनाई योजनाएं इसलिए जमीन पर विफल हो जाती हैं क्योंकि उन्हें धरातल की असलियत को ध्यान में रखकर नहीं बनाया जाता। उन्होंने नाबार्ड से शहतूत उगाने वाले क्षेत्र में भी काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगर बैंकों की ओर से दिए जाने वाजे कर्ज से विकास व बेरोजगारी दूर नहीं हुई तो ये तमाम कसरत बेकार हैं।
महेंद्र सिंह ने कहा कि वह सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से प्रदेश मेें सैनिक अकादमी
खोलने का प्रस्ताव भेज रहे हैं। इस अकादमी में प्रदेश के उन युवाओं को कोचिंग देने का इरादा है जो एनडीए, सीडीएस व बाकी सेवाओं में जाना चाहते हैं। अभी युवाओं को चंडीगढ़ जाना पड़ता हैं। उन्होंने नाबार्ड से इस बावत गौर करने का आहवान भी किया।
उन्होंने दोनों नौणी व पालमपुर विवि के वैज्ञानिकों से भी आग्रह किया कि वह खेतों में जाए। उनकी पीएचडी व बाकी डिग्रियों का कोई फायदा नहीं हैं अगर उनका लाभ किसानों व बागवानों को नहीं मिल रहा हैं। उन्होंने इस मौके पर एक साल में केंद्र से मंजूर कर लाई हजारों करोड़ों रुपयों की योजनाओं का भी खुलासा किया व भरोसा दिया कि वह खुद मौके पर खड़े हो कर एक-एक काम करवाएंगे।
इससे पहले बागवानी व वानिकी विवि नौणी के कुलपति एससी शर्मा ने कहा नाबार्ड से आग्रह किया कि दोनों विवि के वैज्ञानिकों को भी अपने साथ जोड़े । उन्होंने कहा कि सबसे पहले खेती को मान्यता देने की जरूरत हैं। हमनें इटली से सेब के पौधे खरीदे । नौणी विवि को अगर 25 करोड़ का अनुदान मिल जाए तो वह प्रदेश में हर तरह के पौधों की जरूरत पूरा कर देगा। लेकिन यह अनुदान सरकार से तो मिला नहीं हैं। ऐसे में बैंक अगर आगे आए तो बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि खेती व बागवनी को बढ़ावा देने के लिए बीज उद्योग को प्रदेश में बुलाना होगा। उन्होंने बागवानी व संचाई मंत्री से प्रदेश में उगाई जाने वाली तमाम फसलों को समर्थन मूल्य देने की भी वकालत की।
इस मौके पर विशेष सचिव डीडी शर्मा ने कहा कि 2022 तक किसानों की आय दुगुनी केवल खेती से ही नहीं होगी। इसके लिए खेती , पशुपालन व संबंधित क्षेत्रों में भी काम करना पड़ेगा। उन्होंने प्रदेश में कर्ज लेने की घटती दर पर चिंता व्यक्त की ।
नोट: फारेन फंडिंग के खतरों व जटिलताओं से प्रदेश सरकार कितना वाकिफ हैं, इस पर बात कभी आगे ।
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