शिमला। प्रदेश की कांग्रेस की सुखविंदर सिंह सरकार कर्मचारियों के लिए ओपीसी नीति को लेकर सत्ता में आई थी लेकिन अब कांट्रैक्ट भर्ती की जगह गुजरात मॉडल का खाका छानने के लिए नौकरशाही की जुंडली को लगा दिया गया हैं।
भाजपा की गुजरात सरकार की ओर से भर्ती को लेकर बनाई गई नीति का कानूनी दर्जा क्या है इसका पता लगाने के लिए प्रधान सचिव कर्मिक को गुजरात सरकार से ताजा स्थिति पता करने के आदेश दे दिए गए हैं। इसके अलावा नौकरशाही ने भर्ती नीति को अंतिम रूप देने के लिए कंस्लटेंट की सेवाएं लेने पर भी चर्चा कर ली है कि गुजरात की भर्ती नीति पर प्रदेश की सुक्खू सरकार के तहत भविष्य के लिए किस तरह की भर्ती नीति तैयार की जाए।
ये तमाम फैसले छह फरवरी को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सुक्खू सरकार के नौकरशाहों की हुई बैठक में ले लिया गया हैं। साफ है कि अब प्रदेश की कांग्रेस सरकार भाजपा की गुजरात सरकार की भर्ती का मॉडल अपनाएंगी।
ये सब हुआ बैठक में -:
लोकसभा चुनावों से पहले नौकरशाहों की जुंडली की ओर से की जा रही ये कसरत चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा पूरी भाजपा को मददगार साबित होती नजर आ रही हैं।
मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कांट्रैक्ट भर्ती के विकल्प में दूसरा भर्ती का रास्ता अख्तियार करने की संभावना तलाशने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सचिवों के समूह का गठन करने का भी फैसला ले लिया गया हैं। इसमें समूह में वित , कर्मिक और विधि विभाग के प्रधान सचिवों समेत बाकी सचिवों को शामिल करने का फैसला लिया गया हैं । नौकरशाहों का यह समूह भविष्य में होने वाली भर्तियों के लिए वैकल्पिक नीति की सिफारिश करेगा।
मूल रूप से बजट सत्र के शुरू होने से पहले छह फरवरी को मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में हुई नौकरशाहों की इस बैठक में कांट्रैक्ट पर की गई भर्तियों और इन भर्तियों को लेकर अदालतों की ओर से दिए गए आदेशों से उपजी स्थिति पर विचार विमर्श किया गया था।
बैठक में कहा गया कि अदालतों की ओर से कांट्रैक्ट पर लगे कर्मचारियों को लेकर पेंशन लाभों और वरिष्ठता को कांट्रक्ट अवधि की सेवा की गणना को लेकर फैसलें दिए गए हैं।
बैठक में प्रधान सचिव कर्मिक ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से शीला देवी बनाम हिमाचल सरकार मामले में दिए फैसले को लेकर लीगल राय यह आई है कि इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने से कोई लाभ होने वाला नहीं हैं।
नौकरशाहों की इस महत्वपूर्ण बैठक में ताज मोहम्मद बनाम हिामचल सरकार और डाक्टर अजय देयोल बनाम हिमाचल सरकार जैसे मामले पर भी चर्चा हुई । इन मामलों में हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने इन कर्मचारियों की कांट्रेक्ट अवधि की सेवाएं सालाना वेतन बढोतरी और पेंशन लाभों के लिए गिनने के आदेश दिए हैं।
सुक्खू सरकार के नौकरशाहों की इस बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि अगर उपरोक्त इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए फैसलों को लागू किया जाता है तो वरिष्ठता सूची, वरिष्ठता को रिवाइज्ड करने के बाद के लाभों जैसे पदोन्नतियों, विभागीय पदोन्नीति समितियों की समीक्षा,पे रिवीजन,इंक्रामेंटस,एसीपीएस, पेंशन, एरियर, नियमितिकरण के निर्देश,पदों की उपलब्धता, पीछे से नोशनल /वास्तविक आधर पर वेतन और भतों की अदायगी,सेवानिवृति बाद के देयों के अलावा एनपीएस और ओपीएस जैसे मसले अनसुलझे रहने वालें हैं।
ऐसे में प्रदेश की अनिश्चित वितीय स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक भर्ती तरीका की संभावनाएं तलाशने का फैसला किया गया हैं।
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