शिमला। वामपंथ से सबंधित किसान व मजदूर संगठनों ने आज प्रदेश भर में धरना प्रदर्शन कर किसानों की हत्या करने के इल्जाम लगाते हुए केंद्री गृह मंत्री अमित शाह, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर और हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की मांग की हैं।
राजधानी शिमला में डीसी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन के दौरान ऐप्पल फार्मरज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयोजक राकेश सिंघा, किसान सभा अध्यक्ष डॉ कुलदीप सिंह तंवर व सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने मांग की है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व मंत्री अनिल विज पर किसानों की हत्या का मुकद्दमा दर्ज किया जाए। किसान आंदोलन के शहीदों को एक करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।
इन नेताओं ने हरियाणा पुलिस और केंद्रीय बलों की ओर से दिल्ली से लगती खनौरी और शंभू सीमाओं पर किसानों पर बर्बर और अकारण बल प्रयोग, हत्याओं और दमन की कड़ी निंदा की है। किसानों पर लाठीचार्ज, प्लास्टिक की गोलियों और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन्होंने कहा कि इन किसानों का कसूर सिर्फ इतना है कि वे देश की राजधानी दिल्ली पहुंचकर सरकार से मांग करना चाहते थे कि तीन कृषि कानून वापस लेने के लिए हुए आंदोलन के वक्त किसानों से किए गए वादे पूरे किए जाएं। केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार और हरियाणा की भाजपा सरकार किसी भी विरोध को कुचलने के लिए तरह- तरह के गैर कानूनी तरीकों का उपयोग करने पर आमादा हैं।
सिंघा, तंवर व मेहरा ने कहा कि मजदूर किसान राष्ट्र विरोधी मोदी सरकार जो कॉर्पोरेट सांप्रदायिक सांठगांठ करके मजदूरों तथा किसानों पर अत्याचार को बढ़ावा दे रही है। इनके खिलाफ मजदूरों किसानों ने आबू धाबी में शुरू हुए विश्व व्यापार संगठन के सम्मेलन के उद्घाटन के दिन देशभर में प्रदर्शन किए। इसी क्रम में 14 मार्च को रामलीला ग्राउंड में विशाल किसान मजदूर महापंचायत होगी।
इन नेताओं ने कहा कि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू किया जाए। स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशें लागू की जाएं। किसानों की कर्जा मुक्ति सुनिश्चित की जाए। किसानों की हत्याओं, दमन व ट्रैक्टरों को तोड़ने की सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच करवाई जाए। किसानों के तोड़े गए ट्रैक्टरों का मुआवजा दिया जाए। विश्व व्यापार संगठन की शह पर किसानों को बर्बाद करना बंद किया जाए। खेती को अडानी -अम्बानी व अन्य कॉरपोरेट के हवाले करने की साज़िश बन्द की जाए। किसानों को खेती से बेदखल करके बंधुआ मजदूर बनाने की साज़िश बन्द की जाए।
हिमाचल किसान सभा व सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश ने आंदोलनरत किसानों के समर्थन में डीसी ऑफिस शिमला पर धरना दिया व विश्व व्यापार संगठन के खिलाफ डेरा डाल कर बैठे रहे। मजदूरों किसानों ने डीसी ऑफिस से लोअर बाजार होते हुए शेर ए पंजाब नाज शिमला तक एक रैली की।
उधर,किसानों पर हो रहे दमन तथा मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध के खिलाफ आज मंडी के सेरी चांदनी में भी कई संगठनों धरना प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में अखिल भारतीय किसान सभा, सीटू, महिला समिति, नौजवान सभा के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
इस मौके पर किसान सभा जिला सचिव रामजी दास , सीटू प्रधान भूपेंद्र सिंह, जिला सचिव राजेश कुमार गुरदास, जनवादी महिला समिति राज्य अध्यक्ष बीना वैद्य, नौजवान सभा राज्य अध्यक्ष सुरेश सरवाल ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और हरियाणा की खट्टर सरकार ने किसानों पर घोर दमनात्मक कार्यवाही की है। मोदी सरकार कॉरपोरेटस के हित साधने के लिए लगातार किसानों का गला घोंटा रही है। सरकार ने किसानों से किए एक भी वायदे को पूरा नहीं किया। मोदी सरकार ने न तो एमएसपी का कानून बनायाए न बिजली विधेयक वापस लिया, न मुकद्दमे वापस लिए और न ही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया।
मंडी के इन किसान व मजदूर नेताओं ने कहा कि हाल ही में किसानों पर बर्बर गोलियां दागने, अश्रुगैस के गोले दागने, रबड़ बुलेट दागने से यह सिद्ध हो गया कि बीजेपी सरकार कॉरपोरेट की नौकर बनकर रह गई है तथा अंग्रेजों की तरह ही किसानों- मजदूरों का दमन करती है।
उन्होंने कहा कि देश भर के किसान भारत को विश्व व्यापार संगठन से बाहर निकलने की मांग कर रहे हैं। विश्व व्यापार संगठन की 13 वीं मंत्री स्तरीय कांफ्रेंस 26 से 29 फरवरी तक आबू धाबी में होने जा रही है। डब्ल्यूटीओ पर विकसित साम्राज्यवादी देशों का वर्चस्व है और भारत जैसे विकासशील देशों पर वे अपनी एकतरफा शर्तें थोपते हैं। सब्सिडी घटाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य हटाने का दबाव भी उन देशों का है ताकि उनके कम खर्च पर पैदा हुए कृषि उत्पादन भारत की मार्केट में छा जाएं और भारतीय किसानों के उत्पादन पिट जाएं। इस प्रदर्शन के माध्यम से किसानों के लिए एमएसपी का कानून बनाने, बिजली विधायक को निरस्त करने, किसानों का दमन रोकने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग के साथ ही साम्राज्यवादी वर्चस्व वाले विश्व व्यापार संगठन से भारत के बाहर निकलने की मांग भी प्रमुख है।
सभी संगठनों ने आवाहन किया कि आने वाले लोकसभा चुनाव में आम जनता विरोधी सरकार को हारने के लिए सभी संगठन मिलकर काम करेंगे।
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