शिमला। मतदान के लिए महज 10 दिन बचे होने के बावजूद शिमला संसदीय हलके में कांग्रेस नेता जमीन से गायब है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपने चुनावी हलके अर्की में नहीं पहुंचे है। इसी तरह शिमला ग्रामीण हलके में वीरभद्र सिंह के पुत्र व कांग्रेस विधायक नजर नहीं आ रहे है। कसुम्पटी विधानसभा हलके से कांग्रेस प्रत्याशी अनिरुद्व सिंह भी अपने हलके में ज्यादा नजर नहीं आ रहे है। आज जरूर वह शिमला शहर मे प्रचार टोली संग नजर आए। इसी तरह की स्थित ठियोग में भी है। ठियोग में कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर जरूर गए लेकिन भीड़ नहीं जुटी।
चौपाल हलके में पार्टी के महासचिव रजनीश किमटा वहां पर हेलीकाप्टर लेकर पहुंचे । उन्होंने वहां अपनी ताकत दिखाई लेकिन भीड़ नहीं जुट पा रही है। किमटा ने अपना रुतबा पार्टी में पार्टी अध्यक्ष से कम नहीं रखा है। वह चौपाल विधानसभा हलके से है व आगामी विधानसभा चुनावों में वह वहां से चुनाव लड़ने की मंशा पाले हुए है।
भाजपा को चौपाल विधानसभा हलके से ही सबसे ज्यादा बढ़त मिलने की उम्मीद है। इस बढ़त को तोडने के लिए कांग्रेस के पास न तो कोई नेता है और न ही रणनीति है। उधर जुब्बल कोटखाई मं पूर्व कांग्रेस विधायक रोहित में प्रचार में लगे है लेकिन रफतार धीमी है। जबकि वीरभद्र सिंह के गढ़ रोहड़ू में कांग्रेस विधायक मोहन लाल ब्राक्टा प्रचार में लगे है या नहीं इस बावत पार्टी के शिमला मुख्यालय में स्थित पदाधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है।
जिलना सोलन में अर्की विधानसभा हलके में लोग वीरभद्र सिंह के इलाके में कम दिनों तक रहने से वैसे ही खफा चले हुए है । वहां पर मंडल में भी विद्रोह की स्थिति चली हुई है। वीरभद्र सिंह ने एक कनिष्ठ नेता को आगे किया हुआ है जिससें बाकी स्थानीय नेता खफा है। उधर नालागढ़ में कांग्रेस विधायक लखविंदर राणा व कसौली में हाल ही में कांग्रेस में लौटे बागी हरदीप सिंह बाबा से पार्टी को कुछ उम्मीद है।
दून विधनसभा हलका पहले ही भाजपा विधायक के कब्जे में है। वहां से कांग्रेस को ज्यादा बढ़त मिलने के आसार नहीं है। केवल सोलन हलके में कांग्रेस प्रत्याशी धनीराम शांडिल की वजह से बढ़त के आसार है। धनीरा शांडिल सोलन हलके से ही विधायक है। वह अपने ही दम पर प्रचार में जुटे है। सिरमौर में ंजरूर वीरभद्र सिंह उनके साथ प्रचार में गए थे। शांडिल को लेकर वीरभद्र सिंह पहले ही जनसभा में बोल चुके है कि वह पुराने पापी है। याद रहे धनीराम शांडिल सुखराम की पार्टी हिविकां के टिकट पर 1999 में सांसद बने थे। वीरभद्र सिंह उस वाक्ये को भुला नहीं पा रहे है। ऐसे में वह शांडिल का कितना साथ देंगे यह महत्वपूर्ण है।
सिरमौर में शिलाई विधानसभा हलके से कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है। वहां से हर्ष वर्धन चौहान कांग्रेस विधायक है लेकिन उन्हें पार्टी ज्यादा भाव नहीं दे रही है। श्री रेणुकाजी विधानसभा हलके से कांग्रेस विधायक विनय कुमार कितनी बढ़त दिला पाएंगे यह देखना है। नाहन विधानसभा हलके से विधासभा अध्यक्ष भाजपा विधायक व विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल में तस्वीर बदलने का दमखम है लेकिन वह मंत्री न बनाए जाने से खफा है। दूसरे, जयराम ठाकुर सोलन में उनके विरोधी महेंद्र नाथ सोफत को पार्टी में ले आए है। ऐसे में वह क्या बिसात बिछाएंगे यह देखा जाना है। नाहन से कांंग्रेस नेता अजय सोलंकी बिंदल से चार हजार से कम मतों से ही जीत पाए थे। ऐसे में सोलंकी इस बढ़Þत को कितना कम कर पाएंगे , शांडिल के लिए यही बड़ी बात होगी। पच्छाद भाजपा प्रत्याशी सुरेश कश्यप की का विधानसभा हलक ा है। यहां से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व पूर्व कांग्रेस विधायक गंगूराम मुसाफिर अगर कुछ काम कर पाते है तो वह सुरेश कश्यप की बढ़त को कुछ हद तक ही कम कर पाएंगे। सिरमौर में भी कांग्रेस नेता प्रचार में कम ही नजर आ रहे है। मतदान को 11 दिन बचे होने के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी प्रचार को लेकर शिमला संसदीय हलके में कोई रोडमैप तक नहीं बना पाई है।
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