शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से पंचायत चुनाव कराने के लिए तय की गई 30 अप्रैल तक की समय सीमा को सुप्रीम कोर्ट ने एक महीना और आगे बढ़ा दिया है।चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की खंडपीठ ने आज सुक्खू सरकार की ओर से दायर एसएलपी को निपटाते हुआ कहा कि 31 मई या उससे पहले पंचायतों के चुनाव निपटा दिया जाए।
सुक्खू सरकार ने 13 फरवरी के हिमाचल हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें पंचायत चुनावों को 30 अप्रैल तक कराने के आदेश दिए गए थे।
कायदे से सुक्खू सरकार को 30 अप्रैल तक ये चुनाव करा देने चाहिए थे लेकिन सरकार ने अजीब फैसला लिया और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी।
सरकार ने दलीलें दी कि पंचायतों,खंड समितियों और जिला परिषद के परिसीमन करने, मतदाता सूची को प्रकाशित करने के लिए समय मांगा था। इसके अलावा दलील दी थी कि अभी तक जनगणना नहीं हुई है। ऐसे में ये परिसीमन करना और वार्डों के आरक्षण करना मुश्किल है।
सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को नकार दिया व कहा कि वो प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश में ज्यादा फेरबदल नहीं कर सकते।पंचायत चुनाव केवल छह महीने तक ही टाले जा सकते है।
उधर, प्रदेश हाईकोर्ट के महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा कि सरकार ने जो समयसीमा सुप्रीम कोर्ट को बताई,उसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर कर लिया है।
कितना खर्च ये बड़ा सवाल
अब एक महीने की समय अवधि हासिल करने के लिए प्रदेश के खजाने से कितनी रकम खर्च हुई इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है लेकिन सरकार एक ओर प्रदेश में आर्थिक संकट का हवाला दे हरी है और दूसरी ओर वकीलों पर सरकारी खजाने से रकम खर्च करने से कतरा नहीं रही हैं।
याद रहे सुक्खू सरकार ने प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर सबको चौंका दिया था।इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के क्यास भी लगाए जाने लगे थे।
पंचायत चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है। लेकिन सुक्खू सरकार ने आपदा अधिनियम की आड़ लेकर इन चुनावों का टालने का कांड कर डाला । बहरहाल अब तो चुनाव कराने ही पड़ेंगे।
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