शिमला।सुक्खू सरकार की तमाम ड्रामेबाजी के बीच हिमाचल की 3577पंचायतों के चुनावों के लिए राज्य चुनाव आयोग ने शंखनाद कर दिया है। राज्य चुनाव आयोग के अध्यक्ष व पूर्व मुख्य सचिव अनिल खाची ने आज इस बावत अधिसूचना जारी कर प्रदेश भर में आचार संहिता लागू कर दी है। ये आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। जो सीमाओं में बदलाव को लेकर है। यानी अब पंचायतों की सीमाओं में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
ये चुनाव प्रदेश की कांग्रेस सरकार,मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और तमाम मंत्रियों की लोकप्रियता व साख को उजागर कर देने वाले है।याद रहे बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की भदद पिट चुकी है।ऐसे में हिमाचल में ये चुनाव ऐसे में दौर में हो रहे है जब प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का संगठन ही नहीं है। बिना संगठन के ये चुनाव कांग्रेस पार्टी व सरकार कैसे निपटाएंगी ये देखना भी दिलचस्प होगा।बहरहाल,अब आचार संहिता लग गई है और ज्यादा लेने-देने का काम भी होने वाला नहीं हैं।यानी लुभावनी घोषणाएं भी कम हो सकेगी।
हालांकि अभी चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है।यानी की मतदान किस दिन होना है इस बावत अलग से अधिसूचना जारी होनी है।
पंचायत चुनावों को लेकर सुक्खू सरकार ने तमाम तरह की ड्रामेबाजी की है। बीते दिनों मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने प्रदेश में आपदा अधिनियम का सहारा लेकर एक अधिसूचना जारी की थी कि जब तक तमाम रास्तें व सड़कें दुरुस्त न हो जाए तब तक पंचायत चुनावों का स्थगित किया जाता है।
इस अधिसूचना की मौजूदा समय में क्या स्थिति है ये किसी को जानकारी नहीं हैं।
इसके अलावा पंचायत चुनावों को लेकर मुख्यमंत्री सुक्खू व उनके मंत्री भी अलग -अलग राग अलापते रहे थे। जिससे ये संदेश जनता के बीच जा रहा था कि सुक्खू सरकार पंचायत चुनावों को स्थगित करने के रास्ते तलाश रही है।
इस बावत नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर तो सरेआम सरकार पर इल्जाम लगाते आ रहे थे। बहरहाल, आज राज्य चुनाव आयोग ने आचार संहिता लागू कर अब तमाम अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है।
याद रहे प्रदेश की 3548 ग्राम पंचायतों,90 पंचायत समितियों,11 जिला परिषदों और 71 शहरी स्थानीय निकायों का पुनर्गठन का काम पूरा हो चुका है।इनमें से 3548 ग्राम पंचायतोंऔर 70 शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए मतदाता सूचियां भी तैयार हो चुकी है।
खाची की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि बची 29 ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों को एक दिसंबर तक अंतिम रूप दे दिया जाएगी जबकि बचे एक शहरी स्थानीय निकाय में ये काम सात दिसंबर को पूरा हो जाएगा।
अब पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों और नगर निगमों के सीमाओं के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी।
गौरतलब हो कि प्रदेश की ग्राम पंचायत संस्थानों के अवधि 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो रही है जबकि 50 शहरी स्थानीय निकायों की अवधि 18 जनवरी2026 और धर्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन नगर निगमों की अवधि 13 अप्रैल 2026 को पूरी हो रही है। इसके अलावा अंब,चिड़गांव,कंडाघाट,नेरवा व निरमंड इन पांच नगर पंचायतों की अवधि 16 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही है।
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