गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेश उत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान भक्त भगवान गणेश को घर में विराजमान कर प्रतिदिन पूजा, आरती और भोग लगाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग दिनों में गणपति की विशेष आराधना, मंत्र जाप और अनुष्ठान किए जाते हैं। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी से […]
गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेश उत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान भक्त भगवान गणेश को घर में विराजमान कर प्रतिदिन पूजा, आरती और भोग लगाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग दिनों में गणपति की विशेष आराधना, मंत्र जाप और अनुष्ठान किए जाते हैं। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक 10 दिनों में किस दिन क्या पूजा करें, कौन से मंत्र का जाप करें और गणपति विसर्जन के समय किन बातों का ध्यान रखें।यहां संक्षिप्त सा विवरण हैं।
पहला दिन
भाद्रपद की शुक्लपक्ष की चतुर्थी को घरों में पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी की मूर्ति स्थापना व प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। शुभ मुहर्त में भगवान गणेश की मूर्ति को चौकी पर स्वच्छ लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करे। एक तांबे के लोटे में पानी, थोड़ा सा गंगाजल,सुपारी व सिक्का डाले और ऊपर आम के पत्तों पर नारियल रख दें। हाथ में जल और अक्षत यानी चावल लेकर संकल्प लें कि गणेश जी को कितने दिनों तक घर में रखना हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मूर्ति को डेढ,पांच,सात या दस दिन तक रखने के विधान है। इसके बाद पूजा करे व भोग लगाए।
दूसरा दिन
अगर कोई काम अटके पड़े है तो ”गणेश संकटनाशन स्तोत्र” को तीन या ग्यारह बार पाठ करना चाहिए है। मान्यता है कि ऐसा करने से विघ्नहर्ता संकटों से पार लगा देते है।
तीसरा दिन
इस दिन ”ॐ गं गणपतये नम:” मंत्र का जाप करे । धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अपनी किसी विशेष कामना के लिए श्री गणेश जी की प्रतिमा के सामने चौमुखा दीया जलाएं। महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में गणेश चतुर्थी से तीसरे दिन घर में मां गौरी का आहवान व स्वागत करने की परंपरा भी है।
चौथा दिन
चौथे दिन माता गौरी का घर में स्वागत किया जाता है और बप्पा के विघ्नहर्ता स्वरूप की पूजा होती है। माता गौरी की स्थापना व पूजा के दैरान “ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः।”मंत्र का जाप करे। मान्यता के है कि इससे में सुख व समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इसके अलावा दुर्गा माता के निम्न मंत्र का भी श्रद्धा के साथ जाप किया जा सकता है:
” सर्वमंगल मागल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।”
गणपति भगवान के लिए इस दिन गणेश गायत्री मंत्र का 108 बार या एक माला जाप करना उत्तम माना जाता हैं। ये मंत्र निम्न है:
“ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती: प्रचोदयात॥”
पांचवा दिन:
पांचवे दिन घरों में माता गौरी व गणेश जी की संयुक्त पूजा होती है। इस दिन कई घरों में विसर्जन किया जाता । इस दिन को आध्यात्मिक तौर पर बेहद शुभ माना जाता है।
इस दिन माता गौरी व गणेश के संयुक्त मंत्र का जाप करना चाहिए।
“ॐ ग्लौं गौरीपुत्राय वक्रतुण्डाय नमो नमः।”
यदि जीवन में कोई बहुत बड़ा संकट या रुकावट आ रही है, तो पांचवें दिन गणेश जी के इस प्रभावी मंत्र का जाप किया जा सकता है :
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
कई घरों में पांचवे दिन मूर्ति विसर्जन भी किया जाता है। विसर्जन के दौरान पूजा में हुई त्रुटियों लिए गणेश जी से क्षमा निम्न मंत्र का जाप कर जरूर मांगनी चाहिए
“आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥”
सुहागिन महिलाएं इस दिन माता गौरी व गणेश जी को सुहाग की सामाग्री जैसे चूडि़या, सिंदूर और बिंदी आदी भी समर्पित करती है।
छठा दिन:
छठे दिन मां गौरी को विदा करने के बाद गणेश जी की पूजा के दौरान “गणेश अथर्वशीर्ष” का पाठ पूरी श्रद्धा व भक्ति के साथ करना चाहिए। ऐसा करना बेहद शुभ प्रभावी माना जाता है।
सातवां दिन:
बहुत से घरों में इस दिन गणेश मूर्ति का विसर्जन करते हैं।इस दिन जरूरतमंद लोगों को को दान -दक्षिणा देनी चाहिए । इस दिन गणेश गायत्री मंत्र व गणेश बीज मंत्र का जाप करना उत्तम रहता है।
आठवां दिन:
यह दिन शक्ति व बुद्धि के मिलन के रूप मनाया जाता है।आध्यात्मिक रूप से ये दिन बेहद प्रभावशाली माना जाता है। इस दिन गणेश जी के आठ पवित्र स्वरूपों ”अष्टविनायक” का स्मरण करना चाहिए।
निम्न मंत्र का जाप बेहद शुभ होता है:
“ॐ वक्रतुण्डाय नमः।
ॐ एकदन्ताय नमः।
ॐ महोदराय नमः।
ॐ गजाननाय नमः।
ॐ लम्बोदराय नमः।
ॐ विकटाय नमः।
ॐ विघ्नराजाय नमः।
ॐ धूम्रवर्णाय नमः॥”
नवां दिन:
यह गणेश की प्रतिमा के विसर्जन से पहले का दिन है। इस भौतिक और आध्यत्मिक सफलताओं को स्थाई रूप से मांगने के लिए निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए:
ॐ नमो सिद्धी विनायकम सर्व कार्य कर्त्रेय,सर्व विघ्न प्रशमनाय,सर्वाजाय
वश्यकर्णाय सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रृंग ओम़ स्वाहा।
दसवां दिन:
इस दिन को अनंत चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन गणपति भगवान को पूरी श्रद्धा के साथ घर से विदा किया जाता है। यह दिन गणेश जी की प्रतिमा के महाविसर्जन का दिन है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की भी पूजा की जाती है।इन दस दिनों में दौरान गणेश पूजा के दौरान हुई त्रुटियों के लिए क्षमायाचना करनी चाहिए और दिन गणेश गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।
दस दिनों तक इन बातों का रखें ध्यान
भारत में गणेशोत्सव दस दिनों तक चलने वाला महाउत्सव है। इन दस दिनों में भगवान गणेश को घरों में अतिथि की तरह विराजमान किया जाता है।इन दस दिनों में रोजना सुबह-शाम आरती करनी चाहिए। भगवान गणेश को रोजाना ताजा भोग लगाना चाहिए। गणपति को दूर्वा (21)व मोदक बेहद पसंद है। स्वच्छता का खास ख्याल रखना चाहिए।
प्रतिमा की स्थापना करने के बाद घर में किसी न किसी को जरूर रहना चाहिए।विसर्जन से पहले मूर्ति को खिसकाना नहीं चाहिए।
