शिमला। प्रदेश कांग्रेस पार्टी में छिड़े घमासान के बीच आज पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने खेमे के 11 विधायकों को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ मैदान में उतार दिया हैं। जिन विधायकों को वीरभद्र सिंह ने मैदान में उतारा है उनमें नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री शामिल नहीं हैं। इस घमासान के बीच राहुल गांधी की ओर से नियुक्त किए गए नए अध्यक्ष्ज्ञ कुलदीप सिंह राठौर सहम गए हैं। कहा जा रहा है कि यह कदम उन्हें दबाव में लेने के लिए उठाया गया हैं।
राठौर ने बीते रोज हालीलॉज जाकर वीरभद्र सिंह मुलाकात भी की। उधर, सुक्खू को लेकर जो कुछ भी जारी हुआ उसे हालीलॉज की ऊपज मान जा रहा हैं। आशा कुमारी का टिवट जो डनहोंने राठौर के अध्यक्ष बनने पर किया था, में सुक्खू के कार्याकाल को उल्लेखनीय करार दिया हैं।
बहरहाल ,कांग्रेस पार्टी में सुक्खू व वीरभद्र सिंह के बीच छिड़े मीडिया वार के तहत सोमवार को कांग्रेस की वरिष्ठ विधायक आशा कुमारी, वीरभद्र सिंह के पुत्र व विधायक विक्रमादित्य सिंह, धनीराम शांडिल,आशीष बुटेल,मोहन लाल ब्राक्टा, नंदलाल, जगत सिंह नेगी,पवन काजल, इंद्र दत लखनपाल,विनय कुमार व राजेंद्र राणा ने साझे बयान में कहा है कि पिछल्ले रोज सुक्खू की ओर से वीरभद्र सिंह के बारे में की गई टिप्पणियां उनके कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष वीरभद्र सिंह हिमाचल ही नहीं बल्कि पूरे देश में कांगेस के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं । वह प्रदेश के 6 बार मुख्य मन्त्री, कई बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व केन्द्रीय मन्त्री के रूप में भी जनता की सेवा कर चुके हैं । इन विधायकों की ओर से जारी बयान में किसी के भी दस्तख्त नहीं हैं।
कहा जा रहा है कि इन विधायकों से फोन पर सहमत ली गई।
इन विधायकों ने कहा कि सुक्खू की ओर से की गई बयानबाजी न केवल वीरभद्र सिंह को अपमानित करता है बल्कि कांग्रेस पार्टी व प्रदेश की जनता को भी अपमानित करने वाला है ।
सुक्खू पिछले छह सालों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे थे और उनकी निष्क्रिय कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए व लोक सभा के चुनावों के दृष्टिगत उनकी जगह आलाकमान ने नये अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया ।
इन विधायकों ने कहा कि सुक्खू का यह कहना कि पिछले विधान सभा चुनाव में हार की जिम्मेवारी सरकार की है संगठन की नहीं ,हास्यस्पद ही नहीं बचकाना भी है । वीरभद्र खेमे के इन विधायकों ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष होने के नाते यह दायित्व पार्टी का था और अपनी नैतिक जिम्मेवारी को दूसरे पर डालना किसी भी तरह उचित नहीं हैं । कायदे से सुक्खू को विधानसभा की हार के बाद हार की जिम्मेदारी अपने उपर लेते हुए पार्टी अध्यक्ष पद से खुद ही त्यागपत्र दे देना चाहिए था। इन विधायकों ने दावा किया कि पिछले विधान सभा चुनाव में सुक्खू ने पार्टी अध्यक्ष होने के नाते जिन जिन नेताओं को कांग्रेस टिकट दिए उनमें ज्यादातर नेता अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए ।
इन विधायकों ने कहा कि सुक्खू का यह कहना कि वीरभद्र सिंह ने केन्द्रीय नेतृत्व को गुमराह किया यह भी हास्यस्पद है । क्योंकि छह बार मुख्य मंत्री बनना व इतने लम्बे समय तक प्रदेश की राजनीति में छाये रहना प्रदेश की जनता के समर्थन के साथ बिना केंद्रीय नेतृत्व के पूर्ण सहयोग के बिना सम्भव नहीं था।
वीरभद्र खेमे के इन विधायकों ने कहा कि सुक्खू की ओर से विधान सभा हलकों में स्थापित नेताओं को अस्थिर करने के लिए कई नियुक्तियां स्थानीय विधायकों की इच्छा के खिलाफ की गई।
इन विधायकों ने कहा कि सुक्खू का यह कहना कि वीरभद्र सिंह प्रदेश में पार्टी अध्यक्ष के हमेशा खिलाफत करते रहे हैं तथ्यों से परे हैं। इन विधायकों ने सुक्खू से एकजुट होने का आहवान किया हैं।
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