शिमला।पंजाब नेशनल बैंक की जिस महिला चीफ मैनेजर मानसी नेगी ने बैंक की ओर से पूर्व में सिरमौर और सोलन में कंपनियों को बांटे कर्ज में फ्रॉड और अन्य अनियमितताएं बरतने के मामले को उजागर किया था, प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर उसके रिप्रेजेंटेशन को निपटाते हुए पीएनबी प्रबंधन ने एक चौंकाने वाला राज बाहर किया है।
9 जनवरी को प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस संदीप शर्मा की एकल पीठ ने पीएनबी प्रबंधन को तीन सप्ताह के भीतर चीफ मैनेजर मानसी के रिप्रेजेंटेशन को निपटाने के आदेश दिए थे। अदालत ने इस रिप्रेजेंटेशन पर अंतिम फैसला लेने से पहले व्यक्तिगत सुनवाई का मौका देने का भी आदेश दिया था।
मानसी ने ये रिप्रेजेंटेश बैंक प्रबंधन को 1 दिसंबर 2025 को दिया था। मानसी ने नौ जनवरी को अदालत से फरियाद की थी कि उसकी एक आठ साल की बच्ची व बुजुर्ग मां उसके साथ रहती है। बच्ची की परीक्षाएं है व मां बीमार भी रहती है। ऐसे में बैंक प्रबंधन ने उसका तबादला जो हमीरपुर को किया है, उस पर पुनर्विचार किया जाए जो बैंक की जेंडर नीति के मनमाफिक हो।
फरियाद सुनकर अदालत ने 9 जनवरी को सुनवाई के रोज बैंक प्रबंधन को आदेश दिया था कि वो इस मामले को तीन सप्ताह के भीतर निपटा दें। सुनवाई के रोज़ मानसी नेगी के वकील ने अदालत से आग्रह किया था कि जिस तरह की परिस्थितियां हैं,उसके मुताबिक मानसी को नाहन में ही रहने दिया जाए। अमूमन अदालत के इस तरह क आदेशों को बैंक तो क्या सरकारें भी मान ही लेती हैं।क्योंकि अमूमन अदालतें ऐसे आदेश स्थितियों व ताकतवरों के खेल को जेहन में रखकर ही जारी करती हैं।
इस पर बैंक ने मानसी के रिप्रेजेंटशन पर अंतिम फैसला लेने से पहले उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया व जो स्पीकिंग आर्डर लिखा उसमें एक तथ्य बेहद चौंकाने वाला है। (याद रहे स्पीकिंग आर्डर देने का आदेश जस्टिस संदीप शर्मा की एकल पीठ ने ही मानसी की फरियाद सुनने के बाद दिया था।)
व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान मानसी ने मौजूदा परिस्थितियों का देखते हुए अपना तबादला सोलन करवाने का आग्रह किया। जिसे बैंक ने नामंजूर कर दिया।
मानसी का तबादला सोलन न करने के पीछे बैंक प्रबंधन ने कई दलीलों के में से एक जो दलील दी वो बेहद चौंकाने वाली व तंत्र के भीतर की प्रवृतियों को उजागर करने वाली है। इस स्पीकिंग आर्डर में लिखा है कि पॉश यानी (The Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 (PoSH) जांच करने के बाद इंटरनल कंप्लेंटस कमेटी ने सिफारिश की थी कि सर्कल प्रमुख और मानसी नेगी को डायरेक्ट रिपोर्टिंग रिलेशनशिप में न रखा जाए।
बैंक ने कहा कि ऐसा करने से मानसी सर्कल प्रमुख के प्रशासनिक नियंत्रण में आ जाएगी व इसी लिए उनका तबालदा नाहन से बतौर एलडीएम हमीरपुर किया गया है।
ये दलील बेहद चौंकाने वाली है। अगर मानसी किसी अफसर की वजह से प्रताडि़त है तो कायदे से तो तबादला उस अफसर का किया जाना चाहिए था न कि मानसी का। बैंक ने ऐसा नहीं कर मानसी का ही तबादला करने का कदम उठाया और वो भी उन पारिवारिक परिस्थितियों में जिन्हें जेहन में रखकर अदालत ने भी संज्ञान लिया था और तीन सप्ताह के भीतर मामले को निपटाने के आदेश दिए थे ।
ये दीगर है कि बैंक प्रबंधन ने आठ अक्तूबर 2024 से 2 जुलाई 2025 तक मानसी को इन्हीं सर्कल प्रमुख के डायरेक्ट कंट्रोल में रही थी।
लेकिन मानसी का तबादला तीन मार्च तक भी नहीं हुआ। तीन मार्च को जब सुनवाई हुई तो बैंक प्रबंधन की ओर से जस्टिस अजय मोहन गोयल की एकल पीठ के समक्ष कहा कि गया कि बैंक प्रबंधन ने मानसी को देहरादून भेजने का ऑफर दिया था लेकिन वो सोलन में रहने ही ही जिद कर रही है। लेकिन ये ऑफर कहां दी गई इससे अनजान मानसी के वकील ने अदालत से कहा कि वो देहरादून जाने के लिए तैयार है।
इस पर अदालत ने 23 मार्च तक मानसी का तबादला देहरादून करने का आदेश जारी किया है। यानी नौ जनवरी को अदालत ने तीन सप्ताह का समय दिया था तो बैंक ने मामले को तीन मार्च तक लटका दिया । अब इस बात नजर है कि 23 मार्च तक बैंक प्रबंधन किस तरह से मामले को निपटाता है।
उधर, इसी स्पीकिंग आर्डर में लिखा गया था कि सोलन में पद खाली नहीं है। जबकि तीन मार्च की सुनवाई से तीन दिन पहले ही पीएनबी सोलन से चीफ मैनेजर सेवानिवृत हुए।
याद रहे मानसी ने सोलन व सिरमौर में कर्ज आवंटन में फ्रॉड उजागर किया था और होई कोर्ट में मामले की सीबीआई जांच करने को लेकर याचिका दायर कर रखी है।
बैंक प्रबंधन की ओर से इस याचिका को फालतू यानी बेकार की याचिका करार दिया जा रहा है। हालांकि मामला कर्ज फ्रॉड का है।
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