शिमला। 18 जुलाई 2023 को मालरोड़ के नजदीक हिमाचल रसोई में हुई धमाके की जगह पर IED और RDX पाया गया था। प्रदेश के सबसे वरिष्ठ 1989 बैच के आइपीएस अफसर व डीजीपी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में उनकी पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी की ओर से यह दावा किया गया। डीजीपी कुंडू की ओर से ये बेहद सनसनीखेज और गंभीर दावा हैं।
उनके इस दावे से फारेसिंक लैब जुन्गा की जांच कटघरे में आ गई है । इसके अलावा इस लैब की ओर से अब बरसों से दी गई बाकी रपटें भी संदेह में आ गई हैं। गुडिया कांड में फारेसिंक लैब जुन्गा की रपट जांच एजेंसियों ने ली थी ।
( हालांकि इस बावत फारेसिंक लैब जुन्गा की निदेशक मीनाक्षी महाजन Reporterseye .com से पहले ही साफ कर चुकी है कि ये लैब एशिया की बेस्ट लैब में से एक है। हर तरह से बेहद उन्नत है । तमाम विशेषज्ञ अपने काम में निपुण हैं। उनकी लैब की रपट बिलकुल सही हैं। अगर एनएसजी की रपट में कुछ आया है तो जब तक उसे उनके साथ साझा नहीं किया जात तब तक वह कुछ नहीं कह सकती। )
आरडीएक्स बावत डीजीपी कुंडू का यह दावा उनको अपने पद से हटाए जाने के हाईकोर्ट के आदेश को रदद करने बावत चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश में सामने आया हैं। पालमपुर के कारोबारी निशांत शर्मा और वरिष्ठ वकील के डी श्रीधर के कारोबारी झगड़े को निपटाने के लिए दिए गए दखल की वजह से डीजीपी कुंडू विवादों में आ गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कुंडू की ओर से पैरवी करने वाले वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी की दलीलों का इस आर्डर में जिक्र किया है। यह आर्डर आज गुरुवार देर सायं ही सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर लोड हुआ हैं। हालांकि यह आदेश 12 जनवरी को सुना दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में मुकुल रोहतगी की ओर दर्ज की गई दलीलों में डीजीपी कुंडू की ओर से कहा गया है कि 18 जुलाई 2023 को शिमला में एक ब्लास्ट हुआ। जिसमें दो लोगों की जानें चली गईऔर कई लोग घायल हुए थे।
इस ब्लास्ट की जांच एसपी शिमला की देखरेख में की गई। कुंडू के मुताबिक एसपी ने इस ब्लास्ट को एलपीजी सिलेंडर ब्लास्ट के तौर पर ढकने की कोशिश की गई। इस बावत कुंडू ने गृह मंत्री अमित शाह के अधीन गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव को एक चिटठी लिख इस ब्लास्ट की जांच एनएसजी के नेशनल बम डाटा सेंटर से कराने का आग्रह किया।
इसके बाद उन्होंने दस अगस्त और एक सितंबर 2023 को इस बम धमाके के बाद की बाद जांच में लापरवाही बरतने बावत मुख्य सचिव को चिटठी लिखी और धमाके में आइइडी और आरडीएक्स का संदेह जताते हुए एनएसजी जांच की जरूरत बताई। उनका संदेह सही निकला और धमाका स्थल से आइइडी और आरडीएक्स पाया गया। यह सब सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दर्ज हुआ हैं।
इस दावे के बाद अब बड़े -बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
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