शिमला। हिमाचल पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड के जिला किन्नौर में स्थापित किए जा रहे 450 मेगावाट केे हाइडल पावर प्रोजेक्ट में पिछले तीन चार महीनों से चल रही हड़ताल को समाप्त करने केे लिए प्रदेश हाईकोर्ट ने डीसी किन्नौर नरेश कुमार लट्ठ को हड़ताली मजदूरों व कंपनी के बीच समझौता कराने के निर्देश दिए है।इससे पहले शोंगटोंग पावर प्रोजेक्ट में मजदूरों की हड़ताल को लेकर अभी तक 36 एफआईआर,और276 अरेस्ट हो चुके हैंं। आलम ये है कि इस प्रोजेक्ट के पांच -छह साइट्स पर दिन रात पुलिस का पहरा है।इसके अलावा प्रोजेक्ट के कर्मचारी भी पुलिस के पहरे में काम पर आ जा रहे है।ये अजीब स्थिति बनी हुई है।इस बीच आज अदालत का ये आदेश आया है।
ये आदेश मजदूरों यूनियन शोंगटोंग कड़छम हाइडल प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मंसूर अहमद मीर और जस्िटस त्रिलोक चौहान की खंडपीठ ने आज जारी किए है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षोंं के बीच बातचीत कर समस्या का समाधान निकाला जाए।
गौरतलब हो कि एचपीसीएल ने इस प्रोजेकट का काम पटेल कंपनी को दे रखा है और दिसंबर 2015से फरवरी से फरवरी 2016 तक मजदूरों का वेतन अदा न करने पर मजदूर पर हड़ताल पर चले गए। कंपनी 200 के करीब कर्मचारियों की छंटनी भी कर दी जिससे मजदूर भड़क गए वामपंथी मजदूर संगठन सीटू के बैनर तले आंदोलन तेज कर दिया।इस सूरत में आंदोलन को कुचलने के लिए डीसी किन्नौर ने जगह- जगह धारा 144 लगा दी।
आलम ये हो गया कि प्रशासन ने मजदूरों को हड़ताल से रोकने केलिए कई हथकंडे अपनाएं व रिकांगपियों में हड़ताली कर्मचारियोंं को अनशन करने की जगह दे दी। जब यहां पर 250 के करीब मजदूर आ गए तो डीसी ने फिर आदेश्ा दे दिए कि यहां पर 35 से ज्यादा मजदूर नहीं बैैठ सकते। आखिर में प्रशासन ने दिलचस्प फैसला लिया और रिकांगपियों में पुलिस लाइन में हड़ताल करने की इजाजत दे दी। मजदूर अपनी मांगों को लेकर वहीं पर अनशन कर रहे है।ये अपने आप दिलचस्प है।13 मार्च को कंपनी व मजदूरों के बीच हुए समझौते में तयहुआ कि दो दिनों के भीतर वेतन दे दिया जााएगा। लेकिन वेतन नहीं दिया गया।
एसपी किन्नौर खुशहाल शर्मा ने रिपोर्टर्स आइ डॉट कॉम से बातचीत में कहा कि वो कंपनी के लोगों को पूरी सुरक्षा दे रहे है व कानून के मुताबिक काम कर रहे है।स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने अभी तक 36 एफआईआर दायर कर दी है। जबकि 276 अरेस्ट की जा चुकी है। आंदोलन की वजह से जिला का सारा पुलिस अमला शोंगटोंग में तैनात कर दिया है। एसपी ने स्थिति को संभालने के लिए 4 सब इंस्पेक्टर,9एएसआई,35 हैड कांस्टेबल, 120 कांस्टेबल और 20लेडी कांस्टेबल बटालियन से बुला कर तैनात कर रखा है।जबकि जिला से चार सब-इंस्पेक्टर,6 एएसआई,14 हैड कांस्टेबल,60 कांस्टेबल और सात लेडी कांस्टेबल को इस हड़ताल को संभालने व कंपनी का काम चलवाने के लिए तैनात कर रखा है।
इस सारे मामले में दिलचस्प ये है कि सीटू ने प्रदेश विधानसभा के डिप्टी स्पीकर जगत सिंह नेगी को इस मामले में लपेट रखा है।सीटू का आरोप है कि पटेल कंपनी ने जगत सिंह नेगी को 95 करोड़ का ठेका दे रखा है व वो सीटू से जुड़े कर्मचारियों को बाहर का रास्ता निकालने में जुटे है।जगत सिंह नेगी यहां से विधायक भी है। इस आंंदोलन में अभी तक भाजपा नहीं कूदी है जबकि कांग्रेस समर्थक मजदूर संगठन इंटक आंदोलनकारियों के खिलाफ स्टैंड ले चुका है।
बड़ा सवाल ये है कि अदालत के आदेश आने से पहले डीसी व सरकार इस मामले में कोई समाधान क्यों नहीं निकाल पाए। क्या कंपनी आंदोलन की आड़ में प्रोजेक्ट की लागत बढ़ाना चाहती है । कंपनी ने समय पर मजदूरों का वेतन क्यों अदा नहीं किया । जब वेतन अदा नहीं हुआ तो प्रदेश सरकार व मोदी सरकार के लेबर विभाग ने कंपनी के खिलाफ कार्यवाही क्योंं नहीं की।कंपनी ने 200 लोगों की छंटनी क्यो की। जब 90 मजदूरों को वापसलेने का समझौता हो गया था तो बाकी 23 मजदूर नेताओं की बहाली को क्यों टाल दिया। क्या हड़ताली मजदूर व सीटू कोई ब्लैकमेल का खेल खेल रही है । या सरकार के अफसर, ठेकेदार, नेता कोई भ्रष्टाचार का खेल खेल रहे है। सरकार इस मामले का पुलिस समाधान क्योंं चाह रही है। ये सारे सवाल बड़े हैं।
समझा जा रहा है कि अदालत के आदेशों के बाद अब संभवत: मामला सुलझ जाए।मामले की अगली सुनवाई 26 जुलाई को लगी है।लेकिन सवालों के जवाब मिलेंगें इन पर संदेह हैं।
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